महज 9 साल की मुस्कान झुग्गी में चलाती हैं लाइब्रेरी, अब सम्मानित करेंगी साक्षी मलिक!

महज 9 साल की मुस्कान झुग्गी में चलाती हैं लाइब्रेरी, अब सम्मानित करेंगी साक्षी मलिक!
तस्वीर साभार: आईबीएन7 रिपोर्टर

बदलाव के लिए एक छोटी सी सोच की ज़रूरत है। मुस्कान ने अपनी सोच किताबी मस्ती नाम से छोटी सी लाइब्रेरी शुरू कर दिखाई है।

  • News18India
  • Last Updated: September 7, 2016, 9:25 PM IST
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भोपाल। ओलंपिक की पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक भोपाल में झुग्गी में लाइब्रेरी चलाने वाली नौ साल की मुस्कान को सम्मानित करेंगी। नीति आयोग की तरफ से नौ सितंबर को दिल्ली में ये सम्मान दिया जाएगा। Women Transforming India यानि भारत को बदलती  बारह महिलाओं में मुस्कान को रनर-अप चुना गया है।

भोपाल में दुर्गा नगर झुग्गी बस्ती में बनी लाइब्रेरी की नींव मुस्कान नाम की नौ साल की लड़की ने रखी है। बच्चे तो बच्चे, मोहल्ले का हर शख्स जानता है मुस्कान की इस लाइब्रेरी को। अब तो नीति आयोग ने भी मुस्कान की लाइब्रेरी पर तमगा लगा दिया है। नीति आयोग ने मुस्कान को बदलाव लाने वाली लड़की माना है और मुस्कान ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक के हाथों सम्मानित होने जा रही हैं। मुस्कान के चेहरे पर मुस्कान आना लाज़मी है।

मुस्कान की लाइब्रेरी अलग है। कोई मेंबरशिप फीस नहीं। कोई लेट फीस नहीं। आइए पढ़िए और अच्छा लगे तो किताब को घर भी ले जाइए। बस वक्त पर वापस कर दीजिए। मोहल्ले के बच्चे खेलते-खेलते जब बोर हो जाते हैं तो मुस्कान की लाइब्रेरी में आ जाते हैं। मुस्कान चौथी क्लास में पढ़ती हैं मगर पढ़ने पढ़ाने का गजब का जज़्बा रखती हैं। इस साल 26 जनवरी से शुरू हई लाइब्रेरी में अभी 400 किताबें हैं।



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मुस्कान अपने आसपास झुग्गी में रह रहे बच्चों को पढ़ते देख खुश हैं मगर अब अपनी लाइब्रेरी के लिए आशियाना तलाश रही हैं। पापा मजदूर हैं इसलिए हर मिलने वाले शख्स से ये कहना नहीं भूलतीं कि दुआ करो कि वो जितना चाहे पढ़ सके...पैसे की कमी आड़े ना आए। बगैर पढ़े लिखे परिवार के लोग मुस्कान में अपनी तालीम तलाश रहे हैं।



मुस्कान का कहना है कि इस खास मौके पर बहुत अच्छा लग है। ये एक छोटी सी लाइब्रेरी है और मुझे साक्षी मलिक से अवॉर्ड मिल रहा है तो मुझे बहुत खुशी हो रही है। मुस्कान की दादी रजनी का कहना है हम तो नहीं पढ़ पाए। मजबूरी थी कि मेरे बच्चे नहीं पढ़ पाए। खुशी होती है कि पोती खुद भी पढ़ रही है औऱ दूसरे बच्चों को भी पढ़ा रही है।

बदलाव के लिए एक छोटी सी सोच की ज़रूरत है। मुस्कान ने अपनी सोच किताबी मस्ती नाम से छोटी सी लाइब्रेरी शुरू कर दिखाई है। मुस्कान सिर्फ अपने चेहरे पर नहीं मोहल्ले के सारे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाई है...है ना, मुस्कान की नई सोच।
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