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सबरीमाला मंदिर के कपाट खुले, 10 महिलाओं को पुलिस ने लौटाया, तृप्ति देसाई बोलीं-सरकार महिलाओं के खिलाफ

News18Hindi
Updated: November 16, 2019, 10:05 PM IST
सबरीमाला मंदिर के कपाट खुले, 10 महिलाओं को पुलिस ने लौटाया, तृप्ति देसाई बोलीं-सरकार महिलाओं के खिलाफ
सबरीमला मंदिर में 10-50 साल के बीच की महिलाओं की एंट्री पर रोक है. फोटो. पीटीआई

सबरीमाला में धार्मिक यात्रा 17 नवंबर से शुरू हो रही है. जहां हजारों लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे. इसी बीच सबरीमाला मंदिर के दर्शन करने आ रही 6 महिलाओं को केरल पुलिस ने आधे रास्ते से ही लौटा दिया है.

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  • Last Updated: November 16, 2019, 10:05 PM IST
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तिरुवनंतपुरम. महिलाओं की एंट्री को लेकर चल रहे विवाद के बीच सबरीमाला मंदिर के कपाट शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की एंट्री संबंधी मामले को बड़ी बैंच के पास भेज दिया है. हालांकि कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को यथावत रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को देखने के लिए बड़ी बैंच का गठन किया है, जो इस मुद्दे को फिर से देखेगा. सबरीमाला में धार्मिक यात्रा 17 नवंबर से शुरू हो रही है. जहां हजारों लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे. इसी बीच सबरीमाला मंदिर के दर्शन करने आ रही 10 महिलाओं को केरल पुलिस ने आधे रास्ते से ही लौटा दिया है.

पुलिस के अनुसार ये छह महिलाएं मंदिर के दर्शन के लिए जा रही थीं. लेकिन जब पुलिस ने इनके आईडी प्रूफ चैक किए इसके बाद इन्हें पंबा से ही वापस भेज दिया. इन महिलाओं में दो की पहचान सुजाता (36) और दनालक्ष्मी (48) के रूप में हुई है. बता दें कि सबरीमाला में 10 से 50 साल उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगी हुई है. सूत्रों का कहना है कि जब तीनों महिलाओं को मंदिर की परंपरा के बारे में बताया गया, तो वो वापस जाने को राजी हो गईं. वहीं, जत्थे में शामिल बाकी लोग आगे बढ़ गए.


एक्टिविस्ट तृप्ति देसाई ने कहा, सरकार का रवैया इस मामले में बुरा है. उसने पहले ही कह दिया कि हम महिलाओं को सुरक्षा नहीं दे सकते. इसलिए महिलाएं बिना सुरक्षा के मंदिर जा रही हैं. अब महिलाओं को रोका जा रहा है. ऐसे में ये सरकार महिलाओं के खिलाफ काम कर रही है.
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सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलते ही मंडल पूजा समारोह के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया है. यहां दर्शन करने पहुंचे लोगों ने कहा, मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं मिलना चाहिए.

इससे पहले शनिवार सुबह लॉर्ड अयप्पा मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात 32 वर्षीय सिविल पुलिस अफसर ड्यूटी के दौरान ही गिर पड़ा. इसके बाद उसकी मौत हो गई. पुलिस के अनुसार, उसके गिरते ही उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने वाले 28 सितंबर, 2018 के उसके आदेश पर स्थगन नहीं है, इसके बावजूद महिलाओं को जाने से रोका जा रहा है.

सबरीमाला मामले को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को भेजने के बाद केरल सरकार ने स्पष्ट किया कि वह महिलाओं को दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर में ले जाने के लिए कोई कदम नहीं उठाएगी. पिछले साल केरल पुलिस ने महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की थी, जिसका दक्षिणपंथी ताकतों के कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया था और उन्हें वहां से भगा दिया था.

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First published: November 16, 2019, 5:23 PM IST
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