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और सस्ते हो सकते हैं लोन, ब्याज दर कम होने की अभी भी गुंजाइश

मार्केट कैप के आधार देश के टॉप 10 बैंकों की लिस्ट

1.HDFC बैंक                       5.04 लाख करोड़ रुपए

2.कोटक महिंद्रा बैंक             2.23 लाख करोड़ रुपए

एसबीआई 2.22 लाख करोड़ रुपए
ICICI बैंक 1.85 लाख करोड़ रुपए
एक्सिस बैंक 1.37 लाख करोड़ रुपए
इंड्सइंड बैंक 1.12 लाख करोड़ रुपए
यस बैंक 71 हजार करोड़ रुपए
बैंक ऑफ बड़ौदा 40 हजार करोड़ रुपए
पीएनबी 27 हजार करोड़ रुपए
10. आरबीएल बैंक‍                21 हजार करोड़ रुपए

मार्केट कैप के आधार देश के टॉप 10 बैंकों की लिस्ट 1.HDFC बैंक                       5.04 लाख करोड़ रुपए 2.कोटक महिंद्रा बैंक             2.23 लाख करोड़ रुपए एसबीआई 2.22 लाख करोड़ रुपए ICICI बैंक 1.85 लाख करोड़ रुपए एक्सिस बैंक 1.37 लाख करोड़ रुपए इंड्सइंड बैंक 1.12 लाख करोड़ रुपए यस बैंक 71 हजार करोड़ रुपए बैंक ऑफ बड़ौदा 40 हजार करोड़ रुपए पीएनबी 27 हजार करोड़ रुपए 10. आरबीएल बैंक‍                21 हजार करोड़ रुपए

रिजर्व बैंक ने हालिया मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर में कटौती नहीं की है, लेकिन निजी क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक ने कहा कि बैंकों के पास कर्ज पर ब्याज दरों में कमी लाने के लिए अब और गुंजाइश है.

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    रिजर्व बैंक ने हालिया मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर (पॉलिसी इंटरेस्ट रेट) में कटौती नहीं की है, लेकिन निजी क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार को कहा कि बैंकों के पास कर्ज पर ब्याज दरों में कमी लाने के लिए अब और गुंजाइश है.

    एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी आदित्य पुरी ने यहां नास्कॉम के सम्मेलन में कहा कि हालांकि, केंद्रीय बैंक ने (नया) तटस्थ नीतिगत रुख अख्तियार किया है, लेकिन बैंकों के पास दरों में और कटौती की गुंजाइश है. यह मुद्रास्फीति और तरलता पर निर्भर करता है.

    केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में कटौती का यह मतलब नहीं है कि इसका लाभ बैंक सीधे ग्राहकों को दे देंगे. इस लाभ को देने में देरी पर उन्होंने कहा कि संपत्ति का मूल्य बैंक की देनदारियों से तय होता है.

    उन्होंने कहा कि अगर मैं अपनी जमा दर में कटौती नहीं करता हूं तो ऋण दर में कमी नहीं कर पाऊंगा. एमसीएलआर दर जमा दरों में कटौती से निकाली जाती है. अगर जमा दरें गिरती हैं तो मैं ऋण दर में कटौती करुंगा.

    पुरी ने कहा कि इसकी वजह यह है कि हमारी बैंकिंग प्रणाली बाजार से तीन प्रतिशत ही उधार लेती है. शेष 97 प्रतिशत कोष जमाओं से आता है. जब तरलता अधिक होती है और उस समय नियामक दरें घटाएं या नहीं, बैंक खुद दरों में कटौती कर देते हैं.

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