Lockdown: प्रेग्नेंट महिलाओं का दर्द- 21 अप्रैल को डिलिवरी डेट, नाक से आ रहा है खून, लेकिन चेकअप के लिए बदल रहीं अस्पताल

Lockdown: प्रेग्नेंट महिलाओं का दर्द- 21 अप्रैल को डिलिवरी डेट, नाक से आ रहा है खून, लेकिन चेकअप के लिए बदल रहीं अस्पताल
कम उम्र में प्रेग्नेंसी के चलते हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है.

दिल्ली के साथ-साथ आगरा में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women) डिलिवरी के लिए किसी प्रकार अस्पताल पहुंची हैं, लेकिन लापरवाही होने के कारण मरे हुए बच्चों को जन्म दिया है

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2020, 7:09 PM IST
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नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) को सबसे ज्यादा परेशानी देखने को मिल रही है. इस भीषण आपदाकाल में सबसे ज्यादा परेशानी प्रेग्नेंट महिलाएं झेल रही हैं. बात करें दिल्ली, आगरा और नोएडा की तो प्रेग्नेंट महिलाओं ने अपना दर्द बयां किया है. इन गर्भवती महिलाओं का कहना है कि प्राइवेट अस्पताल डिलिवरी करने से साफ इनकार कर रहे हैं. वहीं सरकारी अस्पतालों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है. कभी सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जाने वाली गर्भवती महिलाएं इस कोरोना के कहर में डिलिवरी के लिए भटक रही हैं. इतना ही नहीं न तो इन्हें पर्याप्त इलाज मिल पा रहा है और न ही जरूरी चेकअप हो पा रहे हैं. इनकी वैक्सीन भी नहीं लग पा रही हैं.

बता दें कि दिल्ली के साथ-साथ आगरा में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब गर्भवती महिलाएं डिलिवरी के लिए किसी प्रकार अस्पताल पहुंचीं, लेकिन लापरवाही होने के कारण उन्होंने मृत बच्चों को जन्म दिया. अभी भी उन महिलाओं का इलाज चल रहा है. ऐसी घटनाओं से महिलाओं में डर बढ़ता जा रहा है.

इलाज करने वाली डॉक्टर बोलती हैं- डिलीवरी कहीं और करवाओ
आगरा निवासी निधि अग्रवाल बताती हैं, 'मल्होत्रा अस्पताल में गाइनी की डॉक्टर से उनका इलाज चल रहा है, लेकिन सात महीने पूरे होने के बाद उन्हें अस्पताल की ओर से साफ मना कर दिया गया. उनसे कहा गया है, डिलीवरी कहीं और कराओ. इतना ही नहीं निधि को टिटनेस का इंजेक्शन भी नहीं लगा है और न ही दवाएं मिल रही हैं. अगर बच्चे को कुछ हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा. पहले से एक डेढ़ साल की बच्ची होने के कारण वो सरकारी अस्पताल में जाने से डर रही हैं जहां कोरोना के मरीज हैं.'
डॉक्टर बोली- नर्स ओर कंपाउंडर करेंगे डिलिवरी, रात में दर्द हो तो न आएं


21 अप्रैल को डिलिवरी डेट होने पर आगरा के रामबाग स्थित एक अस्पताल में गई गर्भवती रिंकी बताती हैं, 'डॉक्टर ने उनसे साफ कहा कि अगर रात में दर्द उठे तो यहां डिलीवरी के लिए न आएं. वहीं डिलिवरी नर्स ओर कंपाउंडर करेंगे. बेहद जरूरी होने पर ही वो आ पाएंगी.'

रिंकी बताती हैं कि इससे पहले भी वो दो अस्पतालों में चक्कर काट चुकी हैं जहां डॉक्टर नहीं मिली. तय समय से ऊपर होता जा रहा है लेकिन वो डिलीवरी के लिए भटकने को मजबूर हैं.

चेकअप के लिए बदल रहीं अस्पताल
इसी तरह शारदा की जून में डिलीवरी होने वाली है, लेकिन उन्हें नोएडा के सेक्टर 52 की डॉक्टर ने इलाज और चेकअप करने से मना कर दिया. शारदा को नाक से खून आता है साथ ही प्रेग्नेंसी की अन्य परेशानियां हैं, लेकिन अब वो दिल्ली के जीटीबी अस्पताल और नोएडा के ही सेक्टर 51 के अस्पतालों में पर्चे बनवाकर दिखाती घूम रही हैं.

सीएमएएओ के प्रेसिडेंट और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट के.के अग्रवाल ने न्यूज़ 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहा, 'सरकार के सर्कुलर के मुताबिक प्रेग्नेंट महिलाओं की डिलिवरी एक आवश्यक सेवा है. इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जा सकता. अगर कोई डॉक्टर ऐसा कर रहा है तो ये गलत है. ऐसा करने पर डॉक्टरों को आईएमए को एडवांस नोटिस भी देना होगा.' अग्रवाल कहते हैं कि किसी महिला को कोरोना नहीं है तो उसकी डिलिवरी करानी होगी. इसके लिए मना न किया जाए.

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