OPINION: महागठबंधन में मायावती हो सकती हैं 2019 का प्रधानमंत्री फेस

OPINION: महागठबंधन में मायावती हो सकती हैं 2019 का प्रधानमंत्री फेस
बसपा प्रमुख मायावती (File Photo)

मायावती का जनाधार उत्तर प्रदेश के बाहर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत हिंदी हार्टलैड में थोड़ा-बहुत हर जगह है. यहां तक कि दक्षिण के कई राज्यों में भी बीएसपी के वोटर हैं. ऐसे में ममता बनर्जी का कद माया से छोटा दिखता है.

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आम चुनाव से पहले लगातार बनते बिगड़ते गठबंधनों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि महागठबंधन का प्रधानमंत्री चेहरा कौन होगा? पीएम मोदी और अन्य बीजेपी नेता प्रधानमंत्री के चेहरे के बहाने महागठबंधन पर अक्सर हमला भी करते रहे हैं. महागठबंधन के पीएम फेस की बात करें तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लगातार उछाला जा रहा है. लेकिन हिंदी हार्टलैंड में बैठे क्षेत्रीय दल राहुल को नेता मानने को तैयार नहीं हैं.

सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में तो समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करना भी लाजमी नहीं समझा. ऐसे में जो दूसरा नाम आता है वह है बीएसपी सुप्रीमो मायावती का, क्योंकि उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सहयोगी पार्टी सपा ने माया की पीएम की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. जिस तरह से राष्ट्रीय जनता दल का चेहरा माने जाने वाले तेजस्वी यादव की बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ की तस्वीरें आई हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर बीएसपी सुप्रीमो का नाम आगे आता है तो आरजेडी को आपत्ति नहीं होगी.

मायावती के पैर छूते आरजेडी नेता तेजस्वी यादव




महागठबंधन के प्रधानमंत्री पद के चेहरे की रेस में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी आगे चल रहा है, लेकिन लोकसभा सीटों का गणित देखें तो माया का नाम रेस में ममता से आगे दिख रहा है. ममता का पीएम पद का चेहरा जहां 42 सीटों वाले बंगाल से आएगा, वहीं माया 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश से.  मायावती का जनाधार उत्तर प्रदेश के बाहर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत हिंदी हार्टलैड में थोड़ा-बहुत हर जगह है. यहां तक कि दक्षिण के कई राज्यों में भी बीएसपी के वोटर हैं. ऐसे में ममता बनर्जी का कद माया से छोटा दिखता है.



ममता का वोट बैंक पश्चिम बंगाल के बाहर सिर्फ बंगाल से सटे हुए राज्यों में है. चन्द्रबाबू नायडू में भी कुछ लोगों को पीएम का चेहरा दिख रहा है. लेकिन जिस तरह तेलंगाना में उनका हाल हुआ है, उसके बाद सिर्फ 25 सीटों वाले आंध्र प्रदेश के सहारे पीएम की कुर्सी तक पहुंचना मुश्किल है. मायावती को एक और बात जो सबसे अलग करती है वो ये है कि माया ने उत्तर प्रदेश में अपने सबसे धुर विरोधी समाजवादी पार्टी को पीएम पद के चेहरे पर अपने साथ कर लिया है.

ममता और नायडू इस मामले में माया से काफी पीछे हैं. बात करें गैर कांग्रेस और गैर बीजेपी दलों की तो यूपीए-1 के समय जब परमाणु करार पर मनमोहन सरकार खतरे में थी तो एसपी को छोड़ वामपंथियों समेत करीब-करीब सभी गैर कांग्रेस गैर बीजेपी पार्टियां मायावती के नाम पर सहमति जता चुकी थी, यानी साफ है कि माया महागठबंधन के पीएम की रेस में फिलहाल सबसे आगे दौड़ रही हैं.

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