Lok Sabha Election 2019 : इस हथियार से ध्वस्त हुआ UP में गठबंधन का जातीय गणित

Anil Rai | News18Hindi
Updated: May 24, 2019, 3:31 PM IST
Lok Sabha Election 2019 : इस हथियार से ध्वस्त हुआ UP में गठबंधन का जातीय गणित
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लोकसभा चुनावों के परिणाम को देखें तो उत्तर प्रदेश में करीब 20 सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही.

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लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश में जाति और धर्म का गणित पूरी तरह ध्वस्त हुआ. ब्रांड मोदी के आगे महागठबंधन का जातीय गणित बुरी तरह बिखर गया. समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के जातीय गणित को देखें तो 20 फीसदी मुस्लिम, 20 फीसदी दलित और 7 फीसदी यादव यानी कुल 47 फीसदी वोटों को ये दोनों दल अपना मान रहे थे और इस गठबंधन का आधार भी यही था. लेकिन दोनों दलों के ये नेता भूल गए कि जब जातीय गणित के सहारे गठबंधन बनेगा तो 53 फीसदी वोट इस गठबंधन के खिलाफ होगा. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शीर्ष नेतृत्व ने इसे समय रहते भांप लिया.

बीजेपी के वॉर रूम में ये फैसला हुआ कि इन 53 फीसदी वोटों को अपने पाले में रखने के साथ-साथ गठबंधन के 47 फीसदी वोटों में ब्रांड मोदी के सहारे सेंध लगाई जाए. चुनाव परिणाम ये साफ संकेत दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी एसपी-बीएसपी गठबंधन के वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल रही है.

2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को जहां 19.3 फीसदी वोट मिले हैं वहीं समाजवादी पार्टी 18 फीसदी वोटों पर सिमट गई है. यानी दोनों पार्टियों ने अपने जातीय गणित के जिस वोट बैंक के सहारे गठबंधन किया उसमें से 10 फीसदी वोट उनके खाते से जाता रहा.

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कामयाब रही बीजेपी
बीजेपी इनके परंपरागत वोटों में सेंध लगाने और करीब 50 फीसदी वोट अपने पाले में करने में कामयाब रही. इस बात का अंदाजा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की सीट के परिणाम से लगाया जा सकता है. कन्नौज में मुस्लिम, यादव और दलित वोटों का जोड़ 55 फीसदी के आस-पास था लेकिन डिंपल को सिर्फ 48.3 फीसदी वोट मिले, जबकि बीजेपी के सुब्रत पाठक को करीब 49.3 फीसदी वोट मिले.

कुछ यही हाल मेरठ लोकसभा सीट का रहा. दलित, जाट और मुस्लिम वोटों के गठजोड़ की बात करें तो यहां 60 फीसदी से ज्यादा वोट इस जातीय गणित के नाते गठबंधन के खाते में थे, लेकिन इस सीट पर भी बीजेपी ने कब्जा जमा लिया.
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करीब 20 सीटें ऐसी जहां BJP रही सफल
लोकसभा चुनावों के परिणाम को देखें तो उत्तर प्रदेश में करीब 20 सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही. वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय कि मानें तो इन चुनावों में मोदी एक बड़े ब्रांड के रुप में उभरे और वोटरों ने उन्हें वोट देने के लिए जाति-धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर मतदान किया. इसमें सबसे ज्यादा युवा मतदाता थे.

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First published: May 24, 2019, 2:49 PM IST
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