चुनावों की गहमा गहमी से कहां गायब हैं धर्मेंद्र प्रधान?

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दिल्ली की राजनीति को किनारे छोड़ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं. हर सुबह एक नए गांव की ओर निकल पड़ते हैं ताकि राहत का जायजा ले सकें.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: May 13, 2019, 3:53 PM IST
चुनावों की गहमा गहमी से कहां गायब हैं धर्मेंद्र प्रधान?
चुनावों की गहमा गहमी से कहां गायब हैं धर्मेंद्र प्रधान?
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: May 13, 2019, 3:53 PM IST
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इन दिनों कहीं नज़र नहीं आ रहे. 29 अप्रैल को ओडिशा में चुनाव समाप्त हो गया, लेकिन प्रधान न तो दिल्ली और न ही कहीं और प्रचार करते नज़र आए. ना ही वो उन राज्यों में रणनीति बनाते नज़र आए जहां के वो प्रभारी भी हैं. पिछले कुछ सालों से प्रधान के पैर दिल्ली में नहीं टिकते थे. उनका ज्यादातर वक्त ओडिशा में ही गुज़र रहा था. ज़ाहिर है ओडिशा में चुनाव ख़त्म होने के बाद लुट्येन्स दिल्ली में नज़र नहीं आए तो उनकी गुमशुदगी पर सवाल तो उठने ही थे.

दरअसल धर्मेंद्र प्रधान गायब नहीं हुए हैं. वो तो ओडिशा में चुनाव खत्म होने के बाद वहीं टिक गए थे क्योंकि मौसम विभाग ने चक्रवात फानी का फोरकास्ट जो कर दिया था. 29 अप्रैल के बाद एक बार प्रधान दिल्ली आए और पीएम मोदी और कैबिनेट सचिव से मिले. तूफान फानी से बचने और राहत कार्यों पर चर्चा की और वापस चले गए. उसके बाद धर्मेंद्र बाबू ओडिशा के दूर दराज के गांव में खो गए. प्रधान ने साफ कर दिया कि पुनर्निर्माण में केंद्र सरकार का ही अहम रोल होगा.

पहले बिहार और फिर मध्य प्रदेश से राज्य सभा में चुने जाने के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान का ओडिशा प्रेम कहीं से कम नहीं हुआ है. धर्मेंद्र बाबू ने चुनाव के दौरान बिना थके-बिना रुके अपनी पार्टी के लिए दिन रात एक कर दिया था. लेकिन नतीजों का इंतज़ार किए बिना लोगों की सेवा करने से खुद को नहीं रोक पाए. प्रधान मानते हैं कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन अपनों का दर्द साझा करने से ज्यादा ज़रूरी और कुछ नहीं.

तभी तो पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दिल्ली की राजनीति को किनारे छोड़ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं. हर सुबह एक नए गांव की ओर निकल पड़ते हैं ताकि राहत का जायजा ले सकें. यहां वह राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे अधिकारियों के साथ पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ी कंपनियों से सीएसआर योजनाओं के अंतर्गत तेज़ी से राहत कार्यों को बढ़ाने की नसीहत दे रहे हैं. कई बार धर्मेंद्र प्रधान खुद राहत एवं बचाव कार्यों की योजनाओं को निजी रूप से निगरानी करते हुए दिखाई दे जाते हैं. पिछले 10 दिनों से खुद ही लोगों से मिलकर हौसला बढ़ाते हैं. अफसरों को खाने-पीने की चीज़ों और दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के दिशानिर्देश देते हैं.

13 मई को केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव के नेतृत्व में एक टीम ने ओडिशा के दौर भी किया. राज्य सरकार के ज्ञापन देने से पहले आपदा प्रबंधन टीम भेजना वाकई धर्मेंद्र प्रधान की पहल का नतीजा था. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से आर पार की लड़ाई लड़ रहे धर्मेंद्र प्रधान राहत कार्यों के लिए उनसे कंधे से कंधा मिलाकर चलने से गुरेज नहीं कर रहे हैं. तभी तो जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई सर्वेक्षण किया तो धर्मेंद्र प्रधान और नवीन बाबू साथ-साथ ही नज़र आए.

धर्मेंद्र प्रधान जानते हैं कि ओडिशा में बीजेपी की जड़ें मज़बूत हो रही हैं और नवीन बाबू की विरासत संभालना बीजेडी के लिए आसान नहीं होगा. ऐसे में प्रधान लोगों के बीच ऐसी पैठ बनाने में लगे हैं जो ओडिशा में उन्हें मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर सके.

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First published: May 13, 2019, 3:48 PM IST
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