News18-Ipsos Exit Poll : फिर चला मोदी का मैजिक, NDA कर रही है जोरदार बहुमत के साथ वापसी

Loksabha election 2019, Exit Polls Result- CNN News18-Ipsos के एग्जिट पोल के हिसाब से नरेंद्र मोदी धमाकेदार सत्ता में वापसी कर रहे हैं. मोदी की इस धमाकेदार जीत भारतीय राजनीति में नए युग की शुरुआत का संकेत है.

News18India
Updated: May 20, 2019, 12:06 PM IST
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आलोचकों को खामोश करते हुए और विपक्षियों को सकते में डालते हुए नरेंद्र मोदी धमाके के साथ सत्ता में वापसी कर रहे हैं. CNN News18-Ipsos एग्जिट पोल के मुताबिक उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए 2019 के लोकसभा चुनाव में 336 सीटें जीत सकती है.

मोदी की इस धमाकेदार जीत में अकेले बीजेपी का आधी सीटें जीतना भारतीय राजनीति के नए युग की शुरुआत का संकेत है. ऐसा युग, जिसमें राष्ट्रवाद ने जाति और क्षेत्रवाद के सारे समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है. इसके अलावा यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस से अलग किसी और पार्टी के नेतृत्व में बना राजनीतिक गठबंधन पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रहा है. कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ रहे यूपीए को महज 82 सीटों पर सिमटना पड़ सकता है.



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और झारखंड में क्लीन स्वीप करता दिखाई दे रहा है.

इसके साथ ही, महाराष्ट्र और कर्नाटक में एनडीए के नंबर और सुधरते नजर आ रहे हैं. उत्तर प्रदेश में, जहां एसपी-बीएसपी के साथ जोरदार मुकाबला देखा जा रहा था, वहां बीजेपी को कुछ सीटों का नुकसान होता दिख रहा है. लेकिन सर्वे के अनुसार, उसे ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अच्छा-खासा फायदा हो रहा है.

एनडीए ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए इस चुनाव में उतरने का फैसला किया था. खुद मोदी भी अपनी योजनाओं को बरकरार रखने और उन्हें आगे बढ़ाने के नाम पर वोट मांग रहे थे. बीजेपी इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है. सर्वे के मुताबिक बीजेपी को 276 सीटें मिल रही हैं. ये 2014 से महज छह सीटें कम है. उसके बाद कांग्रेस है. कांग्रेस के ही आसपास बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके नजर आ रहे हैं.

एग्जिट पोल ऐसी राजनीतिक तस्वीर सामने ला रहा है, जो हर विशेषज्ञ को सकते में डालने वाली है. बीजेपी/एनडीए महज हिंदीभाषी राज्यों में अपना अब तक का श्रेष्ठतम प्रदर्शन ही नहीं कर रही, बल्कि वो नए राज्यों में भी अपने पैर पसार रही है, जैसे – उत्तर-पूर्वी राज्यों में शानदार प्रदर्शन के साथ बंगाल और ओडिशा.

अगर एग्जिट पोल की भविष्यवाणी सही होती है, तो ये नतीजे पीएम के हाथों को और मजबूत करेंगे. बगैर बाहरी समर्थन के वो अपनी सरकार चुन सकते हैं. तीखेपन के साथ लड़े गए इस चुनाव में हर कोई इंतजार कर रहा था कि सरकार किस तरह की बनेगी. यहां तक कि एनडीए से बाहर की पार्टियां भी मान रही थीं कि भले ही मोदी आगे हों, लेकिन उन्हें बहुमत के लिए कुछ नई पार्टियों की जरूरत पड़ेगी. उसकी वजह दी जा रही थी कि एनडीए ने 2014 में अपना शिखर छू लिया है. ऐसे में वो वहां से नीचे ही आएगी. लेकिन ऐसा लग रहा है कि मोदी ने उन सब धारणाओं को खारिज कर दिया है.
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कांग्रेस के लिए बढ़ती दिख रही हैं मुश्किलें

News18-Ipsos पोल ये संकेत भी दे रहा है कि कांग्रेस के लिए भविष्य अंधकारमय है. अपने वर्तमान नंबर यानी 44 को बेहतर करने में भी संघर्ष करना पड़ रहा है. पिछली बार उसे 44 सीटें मिली थीं, जो इतिहास में कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन था. इस बार वो नंबर 46 पर जाता दिख रहा है. कांग्रेस की जीत पंजाब और केरल में सिमटती दिख रही है. केरल में भी राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने के बावजूद सीटें कम हो रही हैं. दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश से कांग्रेस का लड़ना एक तरह से एनडीए को फायदा पहुंचाने वाला साबित होता दिखाई दे रहा है. लग रहा है कि कांग्रेस के लड़ने से विपक्षी वोट बंट गए.

मजबूत मोदी का मतलब है कि वे तमाम मामलों पर अपनी नीतियों को एनडीए-2 में आगे बढ़ा सकते हैं, जिन्हें पहले कार्यकाल में पूरा नहीं किया जा सकता. इसमें जीएसटी शामिल है. एक जुलाई को जीएसटी लागू हुए दो साल पूरे हो जाएंगे. उम्मीद की जा रही है कि मोदी सरकार की वापसी के बाद इसके सरलीकरण की ओर कुछ और कदम उठाए जाएंगे. बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में जीएसटी के सरलीकरण की बात की है.

मजबूत मोदी सरकार कर सकती है बैंकिंग सेक्टर में सुधार

इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर में सुधारों की तरफ और ध्यान दिए जाने की उम्मीद रहेगी. इसमें सुधार की जरूरत को लेकर काफी बातें होती रही हैं. खासतौर पर, वित्तीय अपराधों में घिरे और देश छोड़कर भागे विजय माल्या और नीरव मोदी जैसों के विवादों के सामने आने पर इनकी जरूरत शिद्दत से महसूस हुई है. उम्मीद की जा रही है कि मोदी सरकार आने पर छोटे और मंझोले व्यापारियों को आसान कर्ज मिलने का मामला भी आगे बढ़ेगा.

प्रधानमंत्री ने चुनाव कैंपेन में पाकिस्तान को लेकर भी अपने मजबूत रुख को लगातार दिखाया है. उम्मीद की जा रही है कि सीमापार आतंक के मामले में कुछ और सख्त कदम नजर आएंगे.

Ipsos एग्जिट पोल दुनिया के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय पोलस्टर Ipsos ने लोकसभा चुनावों के सातों चरण में किया. Ipsos की चुनाव नतीजों की घोषणा करने के मामले में मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है. उसने दुनिया के तमाम चुनावों में बिल्कुल सही भविष्यवाणी की है.

सबसे विस्तार के साथ किया गया एग्जिट पोल

भारतीय चुनाव इतिहास में News18-Ipsos का सर्वे अपने आप में सबसे विस्तार से किए गए एग्जिट पोल हैं. 199 संसदीय क्षेत्रों के एक लाख, 21,542 मतदाताओं के बीच सर्वे किया गया. इन लोकसभा क्षेत्रों में भी 796 विधानसभा क्षेत्र चुने गए. उसके बाद 4776 पोलिंग स्टेशन चुने गए, जहां इंटरव्यू किए गए. हर पोलिंग स्टेशन पर करीब 25 वोटर्स को रैंडम ढंग से उस पोलिंग स्टेशन के इलाके और वोटर टर्नआउट के आधार पर चुना गया.

यह सर्वे सभी सात चरणों की पोलिंग के दौरान किया गया. पोलिंग शुरू होने के साथ इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की गई और पूरे दिन पोलिंग बंद होने तक जारी रही. ऐसा करने की वजह मतदाताओं को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने की रही. ऐसे लोगों को जोड़ने की रही, जो अलग-अलग समय पर वोटिंग के लिए आ रहे थे. हर पोलिंग बूथ को इंटरव्यू करने वाले तीन लोगों ने एक घंटे कवर किया. उसके बाद वे अगले पोलिंग बूथ की तरफ गए. सभी इंटरव्यू कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (सीएपीआई) डिवाइस के इस्तेमाल से किया गया.

पक्षपात से बचने के लिए सभी पार्टियों के नाम और चुनाव चिह्न एक स्क्रीन पर दिखाए गए. जब वोटर से सवाल पूछे गए, तो एक तरह से पोलिंग बूथ जैसा माहौल बनाया गया. यहां वोटर को आंकड़े दिए गए, जिसमें उन्हें उस पार्टी के नाम पर निशान लगाने को कहा गया, जिसे उन्होंने वोट दिया. सवालों को राज्य के लिहाज से भारतीय भाषाओं मे ट्रांसलेट किया गया. तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन आंकड़ों का विश्लेषण किया गया.
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