'मुस्लिम लीग वायरस से संक्रमित' कांग्रेस के 'हाथ में झाड़ू' आने तक की पूरी चुनावी नौटंकी

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: April 5, 2019, 8:06 PM IST

उत्तर भारत में शुक्रवार को भाजपा गरजी भी और बरसी भी. केजरीवाल के साथ गठजोड़ के ऐलान के सिवाय, कांग्रेस के खेमे की तरफ से शांति बनी रही. दिल्ली से महाराष्ट्र और बंगाल से तमिलनाडु तक दिन भर चुनावी नौटंकी इस तरह चली.

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'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है', इस कहावत का सियासत में मतलब है कि 'हर दुश्मन मौके पर दोस्त होता है'. देश की राजधानी में शुक्रवार को सियासी उठापटक के दौरान केजरीवाल ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया! इस गठबंधन से एक राज्य दूर यानी बिहार में महागठबंधन में नीतीश कुमार की वापसी की खबर आई. इन दोनों के बीच उत्तर प्रदेश में, प्रधानमंत्री मोदी सिंहगर्जना के साथ नमूदार हुए और फिर वही हमला किया कि विपक्ष सेना के शौर्य की कद्र नहीं करता. राहुल गांधी, बंगाल की दीदी और यूपी के योगी की धमक के साथ शुक्रवार को राबड़ी देवी के सुर भी सुनाई दिए.

दिल्ली से बात शुरू करें तो दिल्ली 'संगमनगरी' बनती दिखी. दो धुर विरोधी धाराओं ने गलबहियां की. भाजपा इसे स्वच्छता अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि भी कह सकती है कि 'कांग्रेस के हाथ में आप की झाड़ू' आ ही रही है. दो राज्यों में साथ होने की खबर तो आई लेकिन अभी पंजाब और सीटों के बंटवारे पर चर्चा जारी है. कांग्रेस को हमेशा खरी खोटी सुनाते रहे केजरीवाल ने यकीनन खुद को जनता के सवालों के लिए तैयार कर रखा होगा. ये तैयारी कितनी और कैसी रही? जल्द पता चल जाएगा.

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संसद का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुज़रता है, इसलिए दिल्ली से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में प्रधानमंत्री अपने चिर परिचित अंदाज़ में जलवाअफ़रोज़ हुए. 'आतंकी जानते हैं, मोदी पाताल में भी सज़ा देगा', 'मैं जो करता हूं देश के लिए करता हूं, किसी हिंदू या किसी मुसलमान के लिए कुछ नहीं'... 'मैं' से भरपूर ऐसे बयानों पर प्रधानमंत्री ने तालियां बजवाईं. लेकिन कुछ जुमले और शब्द उनकी ज़बान पर यहां भी चिपके रहे जैसे 'महामिलावटी लोग', 'सेना का अपमान', 'वो एयर स्ट्राइक का सबूत मांगते हैं' आदि.

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उधर, मोदी यूपी में आकर बरसें, इससे पहले माहौल बनाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने सुबह सुबह ही ट्वीट गर्जना की. 'कांग्रेस मुस्लिम लीग वायरस से संक्रमित है', 'हरे झंडे फिर लहर रहे हैं' जैसे जुमलों से उन्होंने मोदी की रैली के लिए मंच तैयार किया. शायद इन्हीं जुमलों को पढ़कर पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी ने कहा 'मोदी फिर सत्ता में आए तो संविधान ठुकरा देंगे और देश को एक व्यक्ति पर केंद्रित कर देंगे. ऐसा हुआ तो यह देश का अंतिम चुनाव हो सकता है.' 'चौकीदार' के दौर में ममता ने अपने बयान में 'चायवाला' को भी याद किया.
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मोदी और ममता के बयानों के बीच, अखिलेश यादव ने सपा का घोषणापत्र जारी कर दिया और बीजेपी पर आरोपों की बरसात कर दी. बीजेपी किसानों की मौत और बेरोज़गारी के आंकड़े छुपा रही है, बताने के लिए कोई काम नहीं है इसलिए इधर उधर की बातें कर रही है, वगैरह वगैरह. अखिलेश ने ये भी कहा कि 'हमारी सरकार बनी तो अमीर सवर्णों से टैक्स लिया जाएगा'. 'हमारी सरकार बनी तो' और 'अमीर सवर्णों से टैक्स' दोनों ही बातें शुक्रवार के शोर में ज़्यादा ईको पैदा नहीं कर पाईं.

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'पीएम नरेंद्र मोदी' की बायोपिक भले ही इस शुक्रवार को रिलीज़ नहीं हो सकी लेकिन चुनावी परदे पर मोदी की फिल्म रोज़ चल रही है. सहारनपुर से उड़कर देहरादून पहुंचे मोदी ने यहां कांग्रेस पार्टी पर लानत भेजी. देशद्रोह के कानून में बदलाव करने के कांग्रेस के ऐलान को खारिज करते हुए मोदी ने कहा कि यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. मोदी ने अगस्ता वेस्टलैंड केस में भी राहुल गांधी के परिवार को कठघरे में खड़ा किया. बाकायदा नाम लेकर आरोप लगाए. बोफोर्स, हेलिकॉप्टर, एयरपोर्ट सब कुछ कहा, बस राफेल का नाम नहीं लिया.

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दूसरी तरफ, बंगाल और यूपी के बीच बिहार में एक अलग ही कहानी चलती दिखी. बड़े दिनों बाद राबड़ी देवी सुनाई दीं, ये कहते हुए कि 'ऐ जी सुनिए, ऊ हमको फोन नहीं करते हैं...' अस्ल में, नीतीश कुमार ने न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में कहा था कि लालू प्रसाद जेल और रिम्स से फोन के ज़रिए सियासत कर रहे हैं.

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वहीं, प्रशांत किशोर ने अपने राजनीतिक करियर को बचाने के दौर में दावा किया कि उनके बस्ते में ऐसे राज़ हैं, जो खोल दिए तो लालू प्रसाद यादव पानी-पानी हो जाएंगे. ये बात उन्होंने लालू की जीवनी किताब रूप में आने से जुड़ी खबरों के बीच कही. नीतीश कुमार के खेमे ने कहा कि लालू की बायोग्राफी बेचने के लिए भी लालू परिवार को नीतीश की ज़रूरत पड़ रही है. अब इस बात में कितना दम हो सकता है? ये भी तो हो सकता है कि 'संजू' बनाने वाली हमारी फिल्म इंडस्ट्री में ही इस किताब की एडवांस बुकिंग हो चुकी हो!

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इधर, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े 600 नामचीन कलाकारों ने एक अपील जारी की. इस चिट्ठी में वोट डालने की अपील तो है लेकिन बीजेपी के खिलाफ. हालांकि बीजेपी इस पर कितना ध्यान देगी क्योंकि इनमें से कई कलाकारों को पहले ही खारिज करती रही है.

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महाराष्ट्र के पुणे से भी शुक्रवार को एक दिलचस्प खबर आई. यूथ से बातचीत करने के मकसद से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक कॉलेज में स्टूडेंट्स के सामने पहुंचे तो स्टूडेंट्स ने एक बम फोड़ दिया कि 'आप 72 हज़ार रुपये सालाना देंगे कैसे? माने ये रकम आएगी कहां से?' राहुल शायद सवाल के लिए तैयार थे इसलिए जवाब था 'हम माल्या, नीरव मोदी जैसों की जेब से माल निकालेंगे और गरीबों के अकाउंट में डाल देंगे'. राहुल का इस तरह रॉबिनहुड बनना शायद कुछ युवाओं को भाया नहीं तो वहां 'मोदी मोदी' के नारे शुरू हो गए.

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राहुल भी इतनी बार हार चुके हैं कि अब नर्वस नहीं होते. हाज़िर जवाबी का नमूना पेश करते हुए बोले कि 'मुझे मोदी जी से कोई दिक्कत नहीं है, नफरत तो वही मुझसे करते हैं.' बहरहाल, ये बातचीत हो गई लेकिन राहुल की परेशानी कांग्रेस के ही कुछ लोगों ने बढ़ा दी. खबर आई कि दबी ज़बान में कांग्रेस के कुछ नेता कह रहे हैं कि मैनिफेस्टो में देशद्रोह के कानून से जुड़ी बात शामिल करके कांग्रेस ने भाजपा को एक हथियार थमा दिया. और, भाजपा भी तैयार बैठी थी कि कांग्रेस पर हमला कांग्रेस के हथियार से ही करेंगे.

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इनके अलावा, ओडिशा में सीएम नवीन पटनायक ने बीजेपी की केंद्र सरकार पर किनारे से तूफान का नज़ारा करने और फिर मगरमच्छ के आंसू बहाने का इल्ज़ाम लगाया. योगी के बाद अब मुख्तार अब्बास नकवी ने भारतीय सेना को 'मोदी की सेना' कह दिया तो चुनाव आयोग के कान फिर खड़े हो गए. साथ ही, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल इसलिए खुश हो गए कि उन्होंने प्रधानमंत्री को जो आईना भेजा था, मोदी ने उसे रिसीव कर लिया. तमिलनाडु में कमल हासन के साथ योगेंद्र यादव जुड़ गए तो आडवाणी और जोशी जैसा सलूक बीजेपी करे, इससे पहले एमपी में सुमित्रा महाजन ने चुनाव न लड़ने का ऐलान खुद कर दिया.

इस पूरी चुनावी नौटंकी में एक दृश्य मध्य प्रदेश से भी आया कि दिग्विजय सिंह से कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि भोपाल सीट से तो चुनाव जीतना ही है, गृहनगर राजगढ़ से भी कांग्रेस को जिताने की ज़िम्मेदारी दिग्विजय की ही होगी. सिंह ने इस चुनौती को भी कबूल कर लिया तो दो सवाल चर्चा में रहे कि 'दिग्विजय सिंह का सीना कितने इंच का है?' या 'दिग्विजय ये सोचकर राहत महसूस कर रहे हैं कि पार्टी ने पूरा मध्य प्रदेश जिताने का चैलेंज नहीं दिया'.

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First published: April 5, 2019, 7:55 PM IST
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