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KCR के गठबंधन में शामिल होने पर 'इंतजार करो' की नीति अपना रहीं ममता

फिलहाल ममता बनर्जी केसीआर की गठबंधन में बैक डोर एंट्री के बजाय विपक्ष की एकजुटता पर ध्यान दे रही हैं. (मीर सुहेल)

फिलहाल ममता बनर्जी केसीआर की गठबंधन में बैक डोर एंट्री के बजाय विपक्ष की एकजुटता पर ध्यान दे रही हैं. (मीर सुहेल)

गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस तीसरा मोर्चा के केंद्र की सत्ता में लाने की वकालत करने वाले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 15 दिन पहले माकपा और डीएमके नेताओंं से मुलाकात की थी.

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    पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने News18india से बातचीत के दौरान कहा कि अभी प्रधानमंत्री तय करना हमारी प्राथमिकता नहीं है. अभी हमारा पूरा ध्यान मोदी को हराना और विपक्ष की एकजुटता पर है. ममता बनर्जी का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस तीसरा मोर्चा की वकालत करने वाले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 15 दिन पहले माकपा और डीएमके नेताओंं से मुलाकात की थी.

    चुनाव बाद के फैसले मिलकर लेंगे 

    ममता बनर्जी के एक करीबी सूत्र ने बताया कि पार्टी नजर रखो और इंतजार करो की नीति पर चल रही है. पार्टी ने अभी अपने पत्ते छुपाकर रखने के साथ ही सभी विकल्प खुले रखे हैं. ममता बनर्जी ने News18india से बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार ने नोटबंदी और सांप्रदायिक हिंसा के जरिये देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है. हमारे पास कम से कम 10 अच्छे प्रत्याशी हैं, जिनकी जीत सुनिश्चित है. चुनाव बाद के फैसलों पर हम मिलकर फैसला लेंगे.

    फिलहाल विपक्ष की एकजुटता चाहती हैं ममता 

    तृणमूल सुप्रीमो बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान हर बार किसी एक नेता को 'देश के नेता' के तौर पर प्रचारित करती रही हैं. पूर्व में उन्होंने जेडीएस नेता व पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नाम पीएम पद के लिए प्रस्तावित किया था. वहीं, देवगौड़ा और पवार भी ममता को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन कर चुके हैं. ममता ने कहा कि वह फिलहाल विपक्ष की एकजुटता चाहती हैं. इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने कोलकाता में विपक्ष की एक रैली की थी. रैली में लगभग सभी विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए थे.

    कांग्रेस को नहीं भाया था ममता का फार्मूला 

    पश्चिम बंगाल की सीएम ने जोर दिया कि बिना वरिष्ठ नेताओं के विपक्ष की एकजुटता संभव नहीं है. उन्होंने अगस्त 2018 में विपक्षी दलों के एक संघ का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ चुनाव से विपक्ष की एकजुटता की पूरी कोशिश की थी. उन्होंने विपक्षी दलों के लिए चुनाव लड़ने का एक फार्मूला भी दिया था. उन्होंने कहा था कि जो दल जिस क्षेत्र में मजबूत है बाकी दल उसे वहां समर्थन दें, लेकिन यह फार्मूला कांग्रेस आलाकमान को नहीं भाया.

    गठबंधन में शामिल होने की जुगत में केसीआर 

    केसीआर ने 6 मई को केरल के सीएम पी. विजयन और 13 मई को डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन से मुलाकात कर फिर तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को हवा दे दी. वहीं, सियासी गलियारों में यह चर्चा भी आम थी कि केसीआर की तेलंगाना राष्ट्र समिति बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देगी. अब कांग्रेस सहयोगी डीएमके और हमेशा भाजपा के खिलाफ खड़ी रहने वाली माकपा के नेताओं से केसीआर की मुलाकात ने इस चर्चा को नया मोड़ दे दिया है. अब माना जा रहा है कि केसीआर पिछले दरवाजे से गठबंधन में शामिल होने की जुगत में हैं.

    पीएम पर 21 मई को फैसला करेंगे विपक्षी दल 

    सूत्रों का कहना है, इस समय यह सही सवाल नहीं है कि ममता केसीआर पर भरोसा करती हैं या नहीं? यह गैर-भाजपा सीटों को बढ़ाने पर ध्यान देने का समय है. इस समय पूरा ध्यान भाजपा को हराने पर होना चाहिए. केसीआर पिछले एक साल से केंद्र में गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस तीसरे मोर्चे की सरकार की वकालत कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों की सभी बैठकों से दूरी बनाकर रखी है. वहीं, चर्चा ये भी है कि अब वह किसी भी संभावित गठबंधन में पिछले दरवाजे से शामिल होने की जुगत में हैं. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री प्रत्याशी के मुद्दे पर सभी विपक्षी दल 21 मई को साथ बैठेंगे.

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