क्या 'आग से खेलना' साबित हुआ बीजेपी का संकल्प पत्र? चुनावी नौटंकी में दिखे ऐसे सीन

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: April 8, 2019, 8:16 PM IST

चुनावी सरगर्मियों में सबसे बड़ी सुर्खी रही भाजपा का संकल्प यानी घोषणा पत्र. कश्मीर से बंगाल तक विपक्ष ने इन ऐलानों पर बीजेपी पर धावा बोला. इसके अलावा देश के हर कोने में चुनावी हलचल बनी रही.

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लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण के मतदान से सिर्फ तीन पहले भाजपा के संकल्प पत्र जारी करने से सोमवार की चुनावी नौटंकी शुरू हुई. कांग्रेस ने इसे 'झांसा पत्र' करार दिया तो बाकियों ने इसे झूठ का पुलिंदा और कोरी बकवास कहा. उधर, इस घोषणा पत्र के बाद यूपी का मौसम ऐसा बिगड़ा कि 'भाई-बहन' को अपना दौरा रद्द करना पड़ा. कश्मीर से बंगाल तक चुनावी माहौल गर्म रहा और चुनाव आयोग के कान पर जूं रेंगी, नींद टूटी और सिरदर्द भी बढ़ा.

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भाजपा ने खुद को 'मर्द' साबित करते हुए दलील दी कि 'मर्द अपनी ज़ुबान पर कायम रहता है' इसलिए राम मंदिर पर 'हमारा अब भी वही रुख है, जो सालों पहले से है.' 'बनवाएंगे, ज़रूर बनवाएंगे लेकिन संवैधानिक दायरे में रहते हुए जो हो सकता है, वही करके.' हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहकहा लगाकर कहा 'कहीं पुराना घोषणापत्र ही तो दोबारा नहीं पढ़ दिया?'

पिछले दिनों कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में देशद्रोह संबंधी कानून में बदलाव की बात कही थी तो माना जा रहा था कि कांग्रेस ने अपने हाथों को भाजपा को हमलावर होने का हथियार दे दिया. अब 'राम मंदिर' को दोहराकर भाजपा ने हथियार थमाया. यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन किस हथियार का इस्तेमाल किस कुशलता से कर पाता है.

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महबूबा ने पहले ही चेताया था कि 'आग से मत खेलना', लेकिन भाजपा ने यही तय किया कि 'चुनाव नहीं आसां बस इतना समझ लीजै, इक आग का दर्या है और डूब के जाना है'. भाजपा ने आर्टिकल 370 और 35ए को हटाने का वादा भी किया तो कश्मीर में सियासी भूकंप आना तय था. महबूबा मुफ्ती हों या फारुक अब्दुल्ला, अपने अपने तेवरों के साथ सबने भाजपा को घेरना शुरू कर दिया. फिर दूसरे मुद्दे पर सोशल मीडिया ने चुटकियां लीं 'भइया, जल्दी अपनी रेहड़ी, गुमठी या ठेला डाल लो, क्योंकि सरकार दोबारा बन गई तो छोटे मोटे दुकानदारों को पेंशन मिलेगी और रोजगार तो मिल ही जाएगा.'

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कन्हैया ने कहा कि पिछले चुनाव में इतने उछाल दिए कि इस बार जुमले बचे ही नहीं इसलिए घोषणा पत्र की जगह संकल्प पत्र जारी किया. भाजपा के इन तमाम वादों पर प्रतिक्रियाएं अभी और आएंगी. इस मायाजाल के बीच उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश गरजे. पिछले 24 घंटों में यूपी के कुछ हिस्सों में हुई बरसात के बाद मायावती और अखिलेश को उम्मीदों पर ओले गिरते दिखे तो दोनों बोले कि 'मुसलमानों! अपना वोट बांट मत देना. हमें ही देना वरना पछताओगे...' अस्ल में, सहारनपुर में दो मुस्लिम प्रत्याशियों की वजह से 'महागठबंधन' को लग रहा है कि कहीं भाजपा को बैठे ठाले फायदा न हो जाए.

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उत्तर प्रदेश से सटे बिहार में बड़े दिनों बाद लालू प्रसाद सुनाई दिए और वो भी ट्विटर के ज़रिये! मोदी और नीतीश दोनों पर बमबारी करते हुए ट्वीट किया कि 'ई लोगन के दिन भर कौनो काम नइखे। आपन 5 साल के हिसाब नइखे देत, बाकी दोसरा के हिसाब मांगता!' लालू उवाच अस्ल में पतिधर्म था क्योंकि सुबह राबड़ी देवी ने ट्वीट किया था 'समूचे ब्रह्मांड में अगर कोई सबसे झूठा आदमी है तो वह है नरेंद्र मोदी'. शायद दोनों को दो बातें पता नहीं थीं कि ट्विटर पर 'ट्रोलिंग' कैसे होती है और ट्विटर पर भाजपा ब्रिगेड कितनी सक्रिय रहती है! 'इनके ट्वीट लिख कौन रहा है?' और 'चारा खाने वाले किसे चोर कह रहे हैं?' जैसे सवालों से लालू और राबड़ी दिन भर ट्रोल होते रहे.



बिहार की सीमा से लगे पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का खून खौल रहा था लेकिन संकल्प पत्र नहीं बल्कि भाजपा के एनआरसी को लेकर रवैये से. 'विकास हम देते हैं, भाजपा सिर्फ गाली देती है', 'हम इन्हें बंगाल में घुसने नहीं देंगे' जैसे तीखे हमले करते हुए ममता ने फिर मोदी और मोदी सरकार को कोसा. ममता ने कहा कि वो हमसे डरते हैं लेकिन चर्चा ये है कि ममता इतनी डरी हुई क्यों दिख रही हैं?

बात उत्तर प्रदेश की उस हॉट सीट की, जहां से राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी हैं. स्मृति ने कहा कि 'रॉबर्ट वाड्रा जहां भी चुनाव प्रचार करने जा रहे हैं, वहां के लोग अपनी ज़मीनें बचा लें'. अमेठी में वाकई लड़ाई ज़मीन बचाने की ही है और सही मायनों में इस चुनाव में कौन सी पार्टी ज़मीन बचा पाएगी, यही देखना दिलचस्प होगा. वैसे, सोमवार को उत्तर प्रदेश में राहुल और प्रियंका गांधी की जनसभा का कार्यक्रम था जो खराब मौसम की भेंट चढ़ गया.



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चुनावी नौटंकी का एक अलग दृश्य मध्य प्रदेश में दिखाई दिया जब खुद को 'बीजेपी का आदमी' कहने वाले अश्विनी शर्मा के घर इनकम टैक्स के छापे पड़े और बेतहाशा दौलत बरामद हुई. चुनाव आयोग की नींद खुली तो कहा कि 'हमें तो ऐसे किसी एक्शन का पता ही नहीं था'. सीएम कमलनाथ के माथे पर चिंता की लकीरें दिखीं लेकिन इन लकीरों को छुपाकर वो बीजेपी के संकल्प पत्र को कोसने सामने आए. वहीं, महाराष्ट्र में शरद पवार ने भी मोदी की सख़्त आलोचना की और राजकुमार के फिल्मी डायलॉग की शैली में कहा कि 'अगर खुद के परिवार में संकट हो तो दूसरों पर उंगली नहीं उठाना चाहिए'.

चुनाव आयोग की सिरदर्दी सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दी जब ताकीद की कि इस बार 1 नहीं बल्कि 5 वीवीपीएटी और ईवीएम का औचक मिलान होगा और इसकी वजह से नतीजों में ज़्यादा देर भी नहीं होना चाहिए. उधर, फारुक अब्दुल्ला और महबूबा के बयानों को लेकर ईसी के कान खड़े हुए और वो ये समझने में लग गया कि इस पर क्या रिएक्शन होना चाहिए. 'आगे आगे ​देखिए होता है क्या' क्योंकि पहले चरण के मतदान में तीन दिन से भी कम का समय बचा है और ऐसे में चुनावी नौटंकी अपने चरम पर है.

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First published: April 8, 2019, 7:59 PM IST
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