इंटरव्यू में मोदी के जवाबों के बाद उठे सवाल और बयान, चुनावी नौटंकी का बने सामान

न्यूज़18 के साथ खास बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति, देश और चुनाव के विषयों पर बेबाक बातें कीं. मंगलवार दिन भर इन्हीं बातों पर प्रतिक्रियाओं का दौर चला. साथ ही, पहले चरण की वोटिंग के मद्देनज़र देश भर में चुनावी सरगर्मियां तेज़ रहीं.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: April 9, 2019, 10:08 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: April 9, 2019, 10:08 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़18 के एडिटर इन चीफ के साथ लंबी बातचीत की, तो मंगलवार को ज़्यादातर चुनावी बयानबाज़ी इसी इंटरव्यू के इर्द गिर्द रही. ज़ाहिर है कि बीजेपी और उसके सहयोगियों ने मोदी के बयानों का समर्थन किया लेकिन एक 'स्वामीजी' ने सवाल खड़ा कर दिया. मोदी के सुर में सुर मिलाते हुए योगी ने भी कहा कि 'हां आडवाणी जी सही कह रहे हैं' लेकिन कुछ ही देर में योगी की बातें अलग ही दिखने लगीं. कश्मीर से अब्दुल्ला और महबूबा ने शॉट मारे, तो कैच लपकने के लिए गंभीर ने चुस्ती दिखाई. उधर, शत्रु ने भीड़ को खामोश करवाने के बजाय नारे लगवाए और प्रियंका गांधी की रैली में इसलिए मारपीट हो गई क्योंकि भाजपाइयों को ज़िद थी कि वहां 'मोदी मोदी' के नारे क्यों नहीं लगेंगे.

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न्यूज़ 18 के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी के साथ खास इंटरव्यू में मोदी ने इतने कोट्स दिए कि मीडिया के साथ ही, पक्ष-विपक्ष, हर खेमा इसी के जोड़-बाकी से हैडलाइन्स बनाता रहा. कांग्रेस के मैनिफेस्टो में अफ्स्पा हटाने के मुद्दे पर मोदी ने इंटरव्यू में कहा कि यह सेना को फांसी पर चढ़ा देने जैसा होगा. तो, विपक्ष ने याद दिलाया कि बीजेपी जब विपक्ष में थी तब वही इसकी समीक्षा कर इसे हटाने की दलीलें देती थी. अलबत्ता मोदी ने कहा कि कश्मीर से धारा 370 और आर्टिकल 35ए खत्म किया जाना चाहिए. इस पर विपक्ष ने रस्मन विरोध ज़ाहिर किया लेकिन नौटंकी तो तब हुई जब बीजेपी के ही सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कह दिया कि 'तो रोक कौन रहा है? हटा दीजिए'.

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'कश्मीर की समस्या सिर्फ ढाई ज़िलों की है. कुछ सियासी कुनबे कश्मीर की जनता के दुश्मन हैं', कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर मोदी की चिलचिलाती टिप्पणियों के बाद वहां की सियासत तिलमिला उठी. फारुक अब्दुल्ला बोले कि 'हम इज़्ज़त से रहना चाहते हैं, बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नहीं करेंगे. याद रखें कि कश्मीर में फ्रांस जैसी क्रांति हो सकती है'. अब्दुल्ला का ये बयान आया तो मोदी के समर्थक चिल्ला उठे, 'चोर की दाढ़ी में तिनका'.

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अब्दुल्ला के अलावा, महबूबा मुफ्ती भी मैदान में कूदीं लेकिन अलग वजह से. अस्ल में, अब्दुल्ला और महबूबा के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग करने वाली एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हुई तो महबूबा ने इस पर तंज़ किया कि 'मोदी तो धारा 370 हटाने ही वाले हैं, तो कोर्ट का समय क्यों बर्बाद करना.' फिर महबूबा ने ट्वीट में एक शॉट और मारा कि 'न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालों, तुम्हारी दास्तां तक भी न होगी दास्तानों में.'



चुस्त फील्डर के तौर पर फौरन गौतम गंभीर मुस्तैद दिखे, जो पिछले ही दिनों भाजपा में शामिल हुए हैं. उन्होंने महबूबा को जवाब दिया कि 'भारत कोई धब्बा नहीं, जो आपकी तरह मिट जाएगा.' इसके बाद तो दोनों के बीच बात उस हद तक बढ़ी, जहां अबोला हो जाता है. वैसे इस वाद विवाद में ग़नीमत ये रही कि महबूबा ने जिस शेर का उल्लेख किया, उसे कहने वाले शायर को देशद्रोही नहीं बोला गया.

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'देशद्रोही' शब्द मंगलवार की चुनावी नौटंकी में खासा दिलचस्प बना रहा. कुछ ही रोज़ पहले भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के मठाधीश आडवाणी ने ब्लॉग में लिखा था कि जो हमारी विचारधारा में यकीन नहीं रखते, उन्हें देशद्रोही नहीं कहा जा सकता. मोदी ने भी अपने इंटरव्यू में इस बात को जायज़ ठहराया और कहा कि यही भाजपा का आदर्श है. लेकिन, मंगलवार को एक रैली में इस विषय का अलग ही रंग दिखाई दिया.

'उन्हें अली तो हमें बजरंगबली' का नारा देते हुए मेरठ में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'आडवाणी जी ने ठीक कहा, मोदी जी ने भी ठीक कहा..' लेकिन इसके कुछ ही देर बाद योगी ने 'हरा वायरस देश को डस रहा है', 'कांग्रेस इन देशद्रोहियों के साथ है' और 'राहुल अमेठी छोड़कर केरल भागे क्योंकि वहां चांद तारे वाले झंडे लहराते हैं' जैसे जुमले भी उछाले और बार बार कहा कि हमने सबका विकास किया, मज़हब नहीं देखा.

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हिंदू मुसलमान वाली बयानबाज़ी चुनावी दौर में थमने का नाम नहीं लेती. मोदी ने अपने इंटरव्यू में खुद भी मायावती पर आरोप लगाया कि उनकी नाव डूब रही है इसलिए वो मुसलमानों का सहारा तलाशने की जुगत में हैं. प्रधानमंत्री के इस बयान को ही शायद योगी ने विस्तार दिया था. अब पहले चरण की वोटिंग के लिए दो दिन से भी कम वक्त है तो चुनावी बयानबाज़ी 'संस्कारी' लोगों के लिए अमर्यादित और बाकी लोगों के लिए चटख होती जा रही है. मध्य प्रदेश के एक कांग्रेसी नेता ने मोदी और सूबे के एक्स सीएम के लिए 'नीच' और 'पागल' शब्द इस्तेमाल किए.

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इधर, मध्य प्रदेश के कुछ ही दिन पुराने सीएम कमलनाथ को मोदी ने अपने इंटरव्यू में 'भ्रष्टनाथ' कह दिया तो हंगामा मच गया. पहले मोदी ने दावा किया कि कमलनाथ के भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है और सरकारी तंत्र एक्शन ले रहा है. इसके बाद खुद 'तू डाल डाल मैं पात पात' का खेल चलता रहा. कमलनाथ ने दावा किया कि उनके पास सबूत हैं कि जिस आदमी पर कार्रवाई हुई है, वह बीजेपी से ताल्लुक रखता है और खुद को भाजपाई बताता है.

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उधर, बिहार में गया में एक चुनावी सभा में शत्रुघ्न सिन्हा नमूदार हुए और 'खामोश' करने के लिए मशहूर जनाब ने 'चौकीदार चोर है' के नारे भीड़ से लगवाकर यह साबित किया कि कांग्रेस का घोषणा पत्र, बीजेपी के संकल्प पत्र के मुकाबले बेहतर है. चुनाव अगर लोकतंत्र का पर्व है तो क्या लोकतंत्र का मतलब नारों का मंत्र है? यह सवाल तब खड़ा हुआ जब यूपी के बिजनौर में प्रियंका गांधी की रैली के दौरान उपद्रव हो गया. कांग्रेसी चिल्ला रहे थे, 'चौकीदार चोर है' तो वहां भाजपाई पहुंचे और 'मोदी मोदी' के नारे लगाने लगे. देखते ही देखते भिड़ंत हो गई और पुलिस को लोकतंत्र बचाना पड़ा.

प्रियंका गांधी के रोड शो के दौरान भिड़े कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ता

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पश्चिम बंगाल के रायगंज में चुनावी सभा में ममता फिर मोदी पर बरसीं. 'अगर हिटलर ज़िंदा होता तो मोदी को देखकर खुदकुशी कर लेता', ममता ने भाजपा के साथ रंजिश बरकरार रहने का सबूत फिर दिया तो वहीं कन्हैया बिहार की बेगूसराय सीट से बतौर प्रत्याशी नामांकन भरने पहुंचे. बरसात हो रही थी, ओले गिर रहे थे और उनके काफिले में 'लेकर रहेंगे आज़ादी' के नारे गरज रहे थे. कुल मिलाकर कश्मीर से बंगाल तक चुनावी नौटंकी में मंगलवार का दिन जुमलों, नारों और बयानों के नाम रहा.

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First published: April 9, 2019, 9:13 PM IST
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