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लोकसभा चुनाव 2019; मतदान और जागरूकता

भारतीय निर्वाचन आयोग ने मतदान के प्रति जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए न केवल ट्विटर से हाथ मिलाया, बल्कि कई जागरुकता कार्यक्रम भी बनाये. ऐसे अभियानों को लाखों लोगों ने देखा और मतदान प्रतिशत में हुई बढोतरी में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया.

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    2019 के लोकसभा चुनाव अभी-अभी संपन्न हुए हैं और भारत के नागरिक चुनाव परिणाम की घोषणा का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं. लोकतंत्र के संदर्भ में लोकसभा चुनाव का आयोजन एक बड़ी सफलता है. लोकतंत्र के आयामों में से एक और बेहद अहम बिंदु मतदाता मतदान प्रतिशत है. आखिर देश में नई सरकार तय करने में इसकी अहम भूमिका होती है.

    542 निर्वाचन क्षेत्रों में हाल ही में संपन्‍न लोकसभा चुनाव में मतदाता उपस्थिति 67.11 प्रतिशत रही. इस तथ्य के बावजूद कि वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र का मतदान निरस्त कर दिया गया था,  हमने पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार हुए मतदान में 1.16 प्रतिशत की वृद्धि देखी. यह आंकड़े पुन: मतदान के बाद हुए संशोधन के बाद के हैं. वर्ष 2014  में सभी 543 लोकसभा सीटों के लिए अंतिम मतदाता प्रतिशत 66.44 था, जो हालिया चुनाव के मतदाता मतदान प्रतिशत की तुलना में कम है.

    इसलिए महत्वपूर्ण है मतदान

    एक नागरिक के तौर पर आपको लोकतंत्र के इस सबसे बड़े उत्सव में भाग लेने की आवश्यकता क्‍यों है, इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश के भीतर कई मतदाता जागरुकता मंच शुरू किये. भारतीय निर्वाचन आयोग ने ट्विटर के साथ भी हाथ मिलाया और मतदान के प्रति जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी के लिए संदर्भित एक जागरुकता कार्यक्रम बनाया. एसवीईईपी का उद्देश्य विभिन्न तरीकों और मीडिया के उपयोग के जरिये नागरिकों के बीच मतदान को लेकर जागरुकता बढ़ाना है।

    भारतीय निर्वाचन आयोग ने #DeshKaMahaTyohar (#देशकामहात्‍योहार) को भी बढ़ावा दिया ताकि लोगों को लोकतंत्र के वास्तविक त्योहार का अहसास हो सके और वह इस महा त्‍योहार में उत्‍साहपूर्वक भाग लें. इसके अलावा, कई अन्य तरीकों जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों/सेलिब्रिटी द्वारा मतदान करने का आग्रह, विभिन्‍न अभियान, आकर्षित करने वाले विज्ञापन आदि ने लोगों के बीच मतदान की भावना को बनाए रखने और बढ़ाने का प्रयास किया और नागरिकों को अपने मतदान अधिकार का प्रयोग अवश्‍य करने के प्रति जागरूक किया.

    राइट टू वोट

    इस महा त्‍योहार में विभिन्न ब्रांड भी सामाजिक रूप से जिम्मेदार बने और उन्‍होंने मतदान के महत्व को बताने के लिए विभिन्‍न प्रकार के अभियान बनाए. केएफसी, स्विगी और मूवी टिकट प्लेटफॉर्म ‘बुक माय शो’ जैसे ब्रांड नए मतदाता और युवा शक्ति को ‘राइट टू वोट’/ ‘मत देने का अधिकार’ की याद दिलाने के लिए प्रभावी अभियानों को लेकर आगे आए. सभी अभियानों को समान रूप से नागरिकों को एक ही संदेश देने के लिए लक्षित किया गया था, अर्थात, अपना वोट डालने के लिए. ‘एक दिन की छुटटी’ जैसे अभियानों को लाखों लोगों ने देखा और इन्‍होंने मतदान प्रतिशत में हुई बढोतरी में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया.

    इसके अलावा, अधिकांश जागरुकता अभियान छोटे ऑडियो वीडियो, जीआईएफएस/GIFs, माइक्रोसाइट्स आदि के रूप में डिजिटल रूप में मतदाताओं पर सकारात्‍मक प्रभाव डाला. डिजिटल जागरुकता फैलाने के लिये एक शानदार मंच प्रदान करता है और यह प्रभावी संचार का एक साधन भी है. अधिक विस्‍तार करने के लिये सबसे अधिक संख्‍या मे दर्शकों तक पहुंच होने के कारण फेसबुक और यूट्यूब पर अनेक अभियानों की बाढ़ आ गई.

    उद्घोषणा / डिस्क्लेमर

    ‘बटन दबाओ देश बनाओ’ आरपी-संजीव गोयनका समूह द्वारा प्रस्तुत नेटवर्क 18 की एक पहल है, जिसका उद्देश्य हाल ही में संपन्न (मतदान चरणों) आम चुनाव 2019 में प्रत्येक भारतीय को मतदान करने आग्रह करना है. सोशल मीडिया पर हैशटैग #ButtonDabaoDeshBanao का प्रयोग करके बातचीत को जानें.

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