Analysis: मोदी लहर में बीजेपी के नए नवेलों ने कांग्रेस के दिग्गजों को उनके गढ़ में ही धूल चटा दी

मोदी की सुनामी में बीजेपी ने जिसे टिकट दिया, वही जीत गया. इतना ही नहीं विपक्ष के कई दिग्गजों को राजनीति के नए नवेलों और कई जगह पर अनजान चेहरों ने शिकस्त दी है.

News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 4:28 PM IST
Analysis: मोदी लहर में बीजेपी के नए नवेलों ने कांग्रेस के दिग्गजों को उनके गढ़ में ही धूल चटा दी
लोकसभा चुनाव 2019 में ऐसे प्रत्याशियों की भरमार है जिन्होंने पीएम मोदी के नाम पर पहली बार में ही कांग्रेस के दिग्गजों को शिकस्त दी.
News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 4:28 PM IST
बिहार में नब्बे के दशक में लालू की लहर चली थी. बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ भी भांप नहीं पाते थे कि चुनावी नतीजे किस ओर जाने वाले हैं. लालू ऐलान करते, 'आप सब देखते रहो, बैलेट बॉक्स से जिन्न निकलेगा.' सारे आकलन को धता बताते हुए लालू यादव सरकार बना ले जाते. लालू का करिश्मा ऐसा था कि वह जिसे चुनाव में खड़ा कर दें वो चुनाव जीत जाए. उन्होंने ऐसा करके दिखाया भी.

1995 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव ने गया के बाराचट्टी विधानसभा से एक पत्थर तोड़ने वाली मजदूर महिला को टिकट दे दिया. मुसहर जाति से आने वाली भगवतिया देवी लालू यादव के नाम पर चुनाव जीत गई और विधायक बनी. 1996 के लोकसभा चुनाव में लालू यादव ने भगवतिया देवी को गया रिजर्व सीट से उतार दिया. इस बार वह सांसद बनकर दिल्ली पहुंच गईं. लालू राज में इस करिश्मे को उनके सामाजिक न्याय का उदाहरण बताकर आज तक पेश किया जाता है.



2019 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसे कई करिश्मे हुए हैं. मोदी की सुनामी में बीजेपी ने जिसे टिकट दिया, वही जीत गया. इतना ही नहीं विपक्ष के कई दिग्गजों को राजनीति के नए नवेलों और कई जगह पर अनजान चेहरों ने शिकस्त दी है. राजनीति के धुरंधर जिन्होंने अपने करियर में एक बार भी हार का मुंह नहीं देखा, वो राजनीति की नौजवान पीढ़ी के हाथों हार गए. मोदी के इस करिश्मे के सबसे बड़े शिकार ज्योतिरादित्य सिंधिया नजर आते हैं. गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव हार गए.

ज्यातिरादित्य सिंधिया राजघराने की पारंपरिक सीट पर बीजेपी के नए चेहरे से हार गए.


सिंधिया को राजघराने की पारंपरिक सीट पर मात 

गुना सीट सिंधिया राजघराने की पारंपरिक सीट है. यहां से या तो राजघराने का कोई सदस्य जीता है या घराने की मर्जी का कोई उम्मीदवार. पिता माधवराव सिंधिया के बाद इस सीट से लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद चुने जा रहे थे. इस बार उन्हें हार मिली और हराने वाला बीजेपी का कोई दिग्गज नेता नहीं था. जीत हासिल करने वाले केपी यादव कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के सांसद प्रतिनिधि हुआ करते थे. पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे केपी यादव ने राजघराने की विरासत ध्वस्त कर दी.

पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे केपी यादव ने सिंधिया राजघराने की विरासत ध्वस्त कर दी.

Loading...

यादव की सिंधिया के साथ सेल्फी वाली फोटो वायरल

जीत के बाद केपी यादव की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी. तस्वीर में ज्योतिरादित्य सिंधिया कार के अंदर बैठे थे और कार के बाहर से उन्हें फ्रेम में लेकर केपी यादव सेल्फी ले रहे थे. इस सेल्फी को सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिखा गया, 'जो शख्स कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सेल्फी लेने के लिए तरसता था, आज उसी ने सिंधिया को उनके गढ़ में हरा दिया.

नाराज होकर यादव ने ज्वाइन कर ली थी बीजेपी

केपी यादव की कहानी दिलचस्प है. वह 2018 के चुनाव में मुंगावली सीट से कांग्रेस का टिकट चाह रहे थे. ज्योतिरादित्य ने उन्हें भरोसा भी दिया था कि टिकट मिल जाएगा. केपी यादव चुनाव प्रचार में भी लग गए थे. आखिरी वक्त में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया. नाराज होकर उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली. वह 2018 का विधानसभा चुनाव तो नहीं जीत पाए. लेकिन, हार के बाद भी उन्हें बीजेपी ने सिंधिया के खिलाफ उतार दिया. अबकी बार मोदी लहर में उन्होंने सिंधिया की ही नैया डुबो दी.

कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को हराने वाले बीजेपी नेता राजनीतिक अनुभव में उनके आगे कहीं नहीं ठहरते.


खड़गे को बागी नेता उमेश जाधव ने दी शिकस्त

कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को हराने वाले बीजेपी नेता राजनीतिक अनुभव में उनके आगे कहीं नहीं ठहरते. खड़गे को कांग्रेस के बागी नेता उमेश जाधव ने ही हराया. जो नेता अपने पूरे राजनीतिक करियर में एक भी चुनाव न हारा हो उसे पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार ने हरा दिया. मल्लिकार्जुन खड़गे को कर्नाटक की गुलबर्गा सीट से हराने वाले बीजेपी के उमेश जाधव कुछ महीने पहले तक कांग्रेस में थे.

खड़गे को कर्नाटक की गुलबर्गा सीट से हराने वाले बीजेपी के उमेश जाधव कुछ महीने पहले तक कांग्रेस में थे.


जाधव ने 2013 में ही की है राजनीति में एंट्री

जाधव चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुए और मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस के गढ़ में ही हरा दिया. 1972 से कोई भी चुनाव नहीं हारने वाले खड़गे को हराने वाले उमेश जाधव ने 2013 में पॉलिटिकल एंट्री ली थी. वह चिंचोली विधानसभा सीट से 2013 में पहली बार विधायक चुने गए थे. 2018 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर दोबारा जीत हासिल की थी. 2019 में कांग्रेस विधायक से बीजेपी सांसद बन गए.

बेंगलुरू दक्षिण से बीजेपी के तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद को हरा दिया.


मोदी के नाम पर जीतने वालों की बीजेपी में भरमार

मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़कर जीत हासिल करने वाले ऐसे नेताओं की भरमार है. भोपाल लोकसभा सीट के परिणाम को चाहे जिस तरह से लिया जाए. दिग्विजय सिंह के राजनीतिक अनुभव के आगे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की क्या राजनीतिक बिसात? गुरदासपुर सीट से सनी देओल पहली बार चुनाव लड़े और कांग्रेस के सुनील जाखड़ को हरा दिया. बेंगलुरू दक्षिण से 28 साल के तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद को हरा दिया. सूर्या को जब बीजेपी टिकट देने का ऐलान हुआ तो खुद उन्हें विश्वास नहीं हुआ था. हालांकि, वह काफी तेजतर्रार और भाषण देने में निपुण प्रखर राष्ट्रवादी नेता माने जाते हैं.

ये भी पढ़ें:

लोकसभा चुनाव 2019: जो बीजेपी के 39 साल के इतिहास में कभी नहीं हुआ, मोदी-शाह ने कर दिखाया वो करिश्मा

ANALYSIS: यह मोदी का अपना वोट बैंक!

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...