VIDEO: इन चुनावों में मोदी ने फिर दिखाया कोई नहीं आसपास

1950 में गुजरात के वडनगर में मोदी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था. किसी ने नहीं सोचा था कि एक चाय बेचने वाला कभी देश का पीएम बनेगा.

News18Hindi
Updated: May 23, 2019, 3:20 PM IST
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नरेंद्र मोदी ने फिर साबित कर दिया कि वो पिछले कुछ दशकों में भारत के सबसे ताकतवर नेता हैं. ऐसे नेता, जिसे देश की जनता खासा पसंद करती है. जनता का उनके प्रति जबरदस्त विश्वास है.  इसमें भी कोई शक नहीं कि देश का कोई भी नेता उनके कद के आसपास नहीं.

उन्होंने चुनाव में जो मुद्दे उठाए, जो बातें रखीं और विकास का जो रोडमैप दिखाया, उस पर जनता ने पुख्ता तौर पर मुहर लगा दी है. पिछले पांच सालों में उन्होंने ये साबित किया है कि वो मजबूत प्रधानमंत्री रहे, देश की सुरक्षा के साथ उन्होंने कई ऐसी नीतियां बनाईं, जिसका लाभ आमलोगों तक पहुंचा. देश की जनता पर उनका भरोसा बढ़ा. यही नहीं दुनिया में ये भारत की इमेज पूरी तरह बदल गई.



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पांच साल पहले नरेंद्र मोदी ने प्रचंड बहुमत के बीजेपी की अगुवाई में एनडीए को जीत दिलाई थी. अब 2019 के चुनावों में उन्होंने अपना जादू दोहराया है. ऐसा लगता है कि देश की जनता को ना केवल उनकी सरकार का कामकाज पसंद आया बल्कि ये भरोसा भी पैदा हुआ कि उन्होंने वर्ष 2022 तक देश के विकास के लिए जो रोडमैप तैयार किया है, उसे वो बखूबी पूरा करके दिखाएंगे. साथ ही इस देश को नई ऊंचाइंयां भी देंगे.

1950 में गुजरात के वडनगर में मोदी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था. किसी ने नहीं सोचा था कि एक चाय बेचने वाला कभी देश का पीएम बनेगा. मोदी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया. बचपन से उनका संघ की ओर खासा झुकाव था. 17 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली. फिर कई बरसों तक संघ के प्रचारक के रूप में काम किया.

80 के दशक में मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए. उन्होंने 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा में अहम भूमिका अदा की थी. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें कई राज्यों का प्रभारी बनाया. हर जगह अपनी मेहनत और बढिया काम से वो पार्टी का भरोसा जीतते गए.

2001 में जब गुजरात में बीजेपी ने केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाकर नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी, तब ये जिंदगी का घुमाव था, जिसने आने वाले सालों में उन्हें देश की शीर्ष सत्ता तक पहुंचा दिया. वो राज्य की सत्ता में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति पर मजबूती से उभरते गए. हालांकि इस दौरान उन पर आरोप भी लगे.
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राज्य विधानसभा चुनावों में उनकी डेढ़ दशकों से ज्यादा समय जीत ने उन्हें पार्टी का ऐसा चेहरा बना दिया, जिसके बल पर वो 2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे बड़ी चुनौती पेश कर सकती थी. फिर पूरे देश ने देखा कि किस तरह 2014 के चुनावों में उनकी लहर चली. किस तरह इस लहर के सामने सत्ताधारी कांग्रेस और सहयोगी दल उखड़ गए.

अब पांच साल तक केंद्र में सत्ता संभालने के बाद जब वो वर्ष 2019 के चुनाव में कूदे तो फिर मिली भारी भरकम जीत ने साबित कर दिया कि उनकी सरकार के कामकाज और नीतियों को देश ने पसंद किया है. सबसे बड़ी ये भी है कि बीजेपी ने इस बार पुराने गढ़ बरकरार रखते हुए नए गढ़ भी बनाए हैं. बंगाल जैसे राज्य में भी जमीन को मजूबत कर ली है.​

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