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मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट: कांग्रेस और सीपीएम में है कड़ी टक्कर

पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि ये वो उन सीटों में से एक है जहां आज भी वामपंथ की पकड़ बनी हुई है

पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि ये वो उन सीटों में से एक है जहां आज भी वामपंथ की पकड़ बनी हुई है

पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि ये वो उन सीटों में से एक है जहां आज भी वामपंथ की पकड़ बनी हुई है

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    पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि ये वो उन सीटों में से एक है जहां आज भी वामपंथ की पकड़ बनी हुई है. मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा- भगवानगोला, रानीनगर, मुर्शिदाबाद, हरिहरपारा, डोमकाल, जालांगी और करीमपुर सीटें आती हैं.

    इस सीट के इतिहास की बात करें तो यहां पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुए कांग्रेस के मुहम्मद खुदा बख्श ने जीत हासिल की थी. इसके बाद 1957 में हुए चुनाव में भी मुहम्मद खुदा बख्श ने जीत का परचम लहराया. हालांकि 1962 में चुनावी माहौल बदला और इंडिपेंडेंट डेमोक्रेटिक पार्टी (इंडिया) के उम्मीदवार सईद बदरूद्दुजा ने 1962 और 1967 के लोकसभा चुनावों में लगातार दो बार जीत दर्ज की. उनके बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के अबू तालेब चौधरी ने 1971 में चुनाव जीता और 1977 में जनता पार्टी के काजिम अली मीर्जी इस सीट से सांसद चुने गए.

    1980 से इस सीट पर लाल सलाम का दबदबा शुरू हुआ. सीपीएम के सैयद मसूदल हुसैन ने 1980 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की. इसके बाद वो इस सीट से लगातार पांच बार सांसद रहे. उन्होंने 1980, 1984, 1989, 1991 और 1996 में जीत दर्ज की. उनके बाद भी सीपीएम का विजय रथ नहीं रुका और मोइनुल हसन ने 1998 और 1999 में हुए चुनाव में जीत दर्ज की. हालांकि 2004 के आम चुनाव में कांग्रेस की इस सीट पर वापसी हुई और अब्दुल मन्नान हुसैन ने जीत हासिल की. वो दो बार इस सीट से सांसद रहे. 2014 के लोकसभा चुनाव में सीपीएम के बदरुद्दोजा खान और कांग्रेस के अब्दुल मन्नान हुसैन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी और सीपीएम के बदरुद्दोज़ा खान ने एक बार फिर पार्टी की इस सीट पर वापसी कराई.

    आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने 34 सीटें जीतीं थी. जब कि बीजेपी और सीपीएम को दो-दो सीटें मिली थी. वहीं चार सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी.

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