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Lok Sabha Elections 2019: ठीक एक साल पहले यूं साथ दिखे थे विपक्षी दिग्गज, आज हुआ बुरा हाल

News18Hindi
Updated: May 23, 2019, 5:37 PM IST
Lok Sabha Elections 2019: ठीक एक साल पहले यूं साथ दिखे थे विपक्षी दिग्गज, आज हुआ बुरा हाल
राहुल गांधी (प्रतीकात्मक फोटो)

कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में ठीक एक साल पहले विपक्षी पार्टियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था और कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे. हालांकि अब इस समारोह की तस्वीर हार का एक प्रतीक बनकर रह गई है.

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ठीक एक साल पहले 23 मई 2018 के दिन कर्नाटक में कांग्रेस (Congress) और जेडीएस (JDS) ने मिलकर सरकार बनाई थी. सीएम एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी पार्टियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था और कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे. इन नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, बसपा सुप्रीमो मायावती, टीएमसी चीफ ममता बनर्जी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, एनसीपी चीफ शरद पवार, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, लेफ्ट की तरफ से सीताराम येचुरी और डी राजा, आरएलडी से अजीत सिंह और जयंत सिंह के आलावा वी नारायणसामी शामिल हुए थे. हालांकि आज के चुनावी नतीजों ने इन सभी नेताओं का बुरा हाल कर दिया है.

1. कांग्रेस:
बात कांग्रेस से शुरू करें तो 2014 में 44 लोकसभा सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस ने 2019 में भी बुरा प्रदर्शन किया है. फिलहाल कांग्रेस 51 सीटों पर आगे चल रही है लेकिन अध्यक्ष राहुल गांधी खुद पैतृक सीट अमेठी से हारते नज़र आ रहे हैं. खबर लिखे जाने तक 26 राउंड की गिनती के बाद बीजेपी कैंडिडेट स्मृति ईरानी 11 हज़ार से ज्यादा वोटों से आगे चल रही थीं.



फिलहाल मिल रही जानकारी के मुताबिक 348 सीटों पर NDA आगे चल रहा है जबकि 90 सीटों पर यूपीए. 104 सीटों पर अन्य दल आगे हैं. राजस्थान, एमपी और छतीसगढ़ जहां विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था बीजेपी क्लीन स्वीप की स्थिति में नज़र आ रही है. चुनावी नतीजों ने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि राहुल गांधी की 'प्यार की राजनीति' पर सवालिया निशान लगा दिया है.

2. बसपा:
भले ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने यूपी में 2014 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन सपा के साथ गठबंधन होने के बाद भी सिर्फ 13 सीटों पर बसपा कैंडिडेट का आगे चलना काफी निराशाजनक है. यूपी में महागठबंधन ने लाख दावे ठोके हों, लेकिन अब ये सिर्फ 20 सीटों पर सिमटता नज़र आ रहा है. इस नतीजे के बाद न सिर्फ मायावती के पीएम बनने के सपने पर पानी फिर गया है बल्कि यूपी के करीब 20% दलित वोटर्स अभी भी बसपा के साथ खड़े हैं इस पर भी सवाल खड़ा होना तय है.
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3. सपा:
ये चुनाव यूपी में यादव राजनीति के लिए चुनौती की तरह थे और नतीजे साफ़ करते हैं कि सपा ने 2014 से बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन बसपा से गठबंधन के बाद जो उम्मीद की जा रही थी वो उससे कोसों दूर रह गई है. 37 सीटों पर मैदान में उतरने वाली सपा सिर्फ 7 सीटों पर ही सिमटती नज़र आ रही है. मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और कन्नौज से भले ही डिंपल यादव जीत के करीब हों लेकिन बदायूं से धर्मेन्द्र यादव और फिरोजाबाद से अक्षय यादव की हार अब निर्णायक अंतर तक पहुंचती नज़र आ रही है.

4. आरजेडी:
बिहार विधानसभा चुनावों में बढ़िया प्रदर्शन से सबको चौंकाने वाले आरजेडी उपाध्यक्ष तेजस्वी यादव के लिए लोकसभा चुनाव 2019 बुरी खबर लेकर आया है. बिहार में महागठबंधन का प्रयोग मुंह के बल गिरा है और आरजेडी एक और कांग्रेस भी सिर्फ एक ही सीट पर आगे चल रही हैं. उधर एनडीए ने बढ़िया प्रदर्शन किया है. बीजेपी 17, जेडीयू 15 और एलजेपी 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. आरजेडी अपनी सभी बड़ी सीटें हार रही है.

5. आरएलडी:
यूपी के महागठबंधन में पार्टनर 3 सीटों से मैदान में उतरी राष्ट्रीय लोकदल की राजनीति पर लोकसभा चुनाव 2019 ने सवालिया निशान लगा दिया है. बागपत से जयंत चौधरी और मुज़फ्फरनगर से अजीत सिंह भी पीछे चल रहे हैं जबकि मथुरा सीट पर भी आरएलडी उम्मीदवार हारता नज़र आ रहा है. इस हार के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में आरएलडी की हैसियत पर सवाल खड़े होना तय हैं. ये भी साफ़ हो गया है कि जाट वोट बैंक अब आरएलडी का नहीं रहा.

6. एनसीपी:
साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भी एनसीपी ने 4 जबकि कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी. गठबंधन की कवायद में शामिल होने के बावजूद महाराष्ट्र में एनसीपी को कोई फायदा होता नज़र नहीं आ रहा है. एनसीपी इस बार भी 4 और कांग्रेस 1 सीट पर आगे चल रही है. कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे मिलिंद देवड़ा भी मुंबई साउथ सीट से हारते नज़र आ रहे हैं.

7. जेडीएस:
कर्नाटक में भी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को बड़ा झटका लगा है. सरकार में होने के बावजूद फ़िलहाल कांग्रेस सिर्फ 2 और जेडीएस 1 सीट पर आगे चल रही है. कर्नाटक में इसके बाद राज्य सरकार की स्थिति भी बिगड़ सकती है.

8. लेफ्ट:
लेफ्ट पार्टियों के लिए ये चुनाव काफी बुरा नतीजा लेकर आया है. पश्चिम बंगाल में लेफ्ट सभी सीटों पर हारती नज़र आ रही है जबकि केरल से भी कांग्रेस गठबंधन यूडीएफ ने उसका सफाया कर दिया है. केरल में भी लेफ्ट सिर्फ एक सीट पर आगे चल रही है.

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First published: May 23, 2019, 5:15 PM IST
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