अब शराब पीकर चलाई गाड़ी तो लगेगा इतने हजार का जुर्माना

केंद्र सरकार ने नये बिल में हर तरीके का जुर्माना बढ़ा दिया है.

मोटर व्हीकल कानून में संशोधन लाने के लिए सरकार लंबे समय से प्रयास कर रही है. अब दोबारा से सरकार ने प्रयास किया है. लोकसभा से पास होने के बाद अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

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वाहन चालकों की आदतों में अमूल-चूल बदलाव लाने की नीयत से मोटर व्हीकल संशोधन कानून को आज लोकसभा ने मंजूरी दे दी. वाहन चालकों के लिए तो इस कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं. वाहन बनाने वाली कंपनियों पर भी तय मानक से हल्का इंजन बनाने या सामान लगाने पर पांच सौ करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. भारत जैसे देश में हर साल डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गवां देते हैं. सरकार का दावा है कि वर्तमान कानून करीब 30 साल पुराना है और उसमें जुर्माने की रकम कम होने के कारण लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करने से नहीं हिचकते. सख्त कानून होने के बाद लोगों को वाहन चलाने की आदतों में बदलाव लाना होगा.

लंबी कवायद के बाद मिलेगी सफलता?
मोटर व्हीकल कानून में संशोधन लाने के लिए सरकार लंबे समय से प्रयास कर रही है. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी इस बिल को कानून की शक्ल देने का प्रयास किया था. लोकसभा से इसे पास कराने में सरकार को सफलता भी मिली थी, लेकिन राज्यसभा से ये पास नहीं हो सका था. अब दोबारा से सरकार ने प्रयास किया है. लोकसभा से पास होने के बाद अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

गडकरी को है ये उम्‍मीद
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक इस संशोधन के बाद भ्रष्टाचार में कमी आएगी. सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और तकनीक के प्रयोग से यातायात नियमों के पालन में मदद मिलेगी. हालांकि कांग्रेस का कहना था कि सरकार इस बिल के जरिए राज्य सरकारों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है और इस क्षेत्र को निजीकरण की तरफ धकेल रही है. जबकि सरकार की दलील है कि ये राज्य सरकारों के ऊपर होगा कि वो इस कानून को अपने यहां लागू करे या नहीं.

नाबालिग ने नियम का किया उल्‍लंघन तो..
यदि कोई नाबालिग यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो वाहन के मालिक की जिम्मेदारी तय होगी. बशर्ते वो ये साबित करे कि नाबालिग उसकी जानकारी के बिना वाहन चला रहा था या उसे इसकी जानकारी नहीं थी. ऐसे वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जाएगा और नाबालिग के खिलाफ जेजे एक्ट के तहत कारवाई होगी. इसमें वाहन मालिक के खिलाफ 25 हज़ार तक जुर्माने और सजा का भी प्रावधान होगा.

घायल के मददगारों का रखा जाएगा पूरा ध्‍यान
अक्सर लोग सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के मामलों में कानूनी पचड़ों में फंसने से घबराते हैं. इस बिल में ऐसे लोगों के बचाव का पूरा ध्यान रखा गया है. घायल लोगों की मदद करने वाले लोगों को किसी भी तरह की दीवानी या आपराधिक मामले से बचाव होगा. ये पूरी तरह से उन पर होगा कि वो अस्पताल या पुलिस में अपनी पहचान गुप्त रखें.

अब देना होगा इतना जुर्माना

>> इस बिल में वर्तमान कानून में कई संशोधन कर इसे कड़ा बनाने का प्रयास किया गया है. वाहन चलाने के लाइसेंस बनाने या वाहन का पंजीकरण करवाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा.

>> मार कर भाग जाने वाले मामलों में सरकार दो लाख रुपए या उससे अधिक का मुआवजा मृतक के परिजनों को देगी. अब तक मुआवजे की ये रकम महज 25 हजार है.

>> शराब पीकर वाहन चलाना दुर्घटना का बड़ा कारण है. नये बिल में शराब पीकर वाहन चलाने का जुर्माना दो हजार से बढ़ाकर 10 हजार किया गया है.

>> खतरनाक तरीके से वाहन चलाने का जुर्माना एक हजार से बढ़ाकर 5 हजार किया गया है.

>> बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर फिलहाल महज पांच सौ रुपए का जुर्माना लगता है. नये बिल में इसे 5 हजार किया जा रहा है.

>> तय गति सीमा से ज्यादा तेज रफ़्तार से वाहन चलाने पर अभी सिर्फ चार सौ रुपए का जुर्माना लगता है. नये बिल में से बढ़ाकर एक हज़ार से 2 हजार किया जा रहा है.

>> सीट बेल्ट ना पहनने पर अभी सिर्फ चार सौ रुपए का जुर्माना लगता है, जिसे बढ़ाकर एक हज़ार किया जा रहा है.

>> आजकल वाहन चलाते हुए मोबाइल के प्रयोग अक्सर देखा जा सकता है. ऐसे मामलों में जुर्माने की रकम एक हज़ार से बढ़ाकर 5 हजार किया जा रहा है.

>> दुर्घटनाओं के मामलों में सभी के लिए बीमा कवर देने के लिए एक मोटर वाहन दुर्घटना फंड का भी गठन किया जाएगा.

>> लोगों की एक बड़ी शिकायत होती है कि ठेकेदार, सलाहकार और सिविल एजेंसियां मिलकर ऐसी सड़कें बना देती हैं, जिनमें अधिक लाभ कमाने के लिए खराब सामग्री का इस्तेमाल कर दिया जाता है. ऐसे सभी ठेकेदार, सलाहकारों ने अगर की डिजाइन गलत बनाया या रखरखाव में कमी रही तो उनके खिलाफ भी कारवाई की जा सकेगी.

>> सड़क दुर्घटना के मामलों में ट्रिब्यूनल को छह महीने के भीतर मुआवज़े की याचिका का निस्तारण करना होगा.

>> थर्ड पार्टी बीमा के मामलों में भी अधिकतम सीमा को हटा दिया गया है. 2016 के बिल में मौत के मामले मे अधिकतम 10 लाख और गंभीर रूप से घायल होने पर 5 लाख की सीमा तय की गई थी.

>> लाइसेंस की समयावधि समाप्त होने पर एक साल बाद तक उसे दोबारा बनवाने की अनुमति होगी. फिल्हाल ये एक महीने की सीमा है.

>> बिना हेलमेट दोपहिया चलाने पर 1000 रुपए का जुर्माना और तीन महीने के लिए लाइसेंस ज़ब्त करने का प्रावधान है. फिलहाल ये जुर्माना सिर्फ सौ रुपए है.

>> किसी आपातकालीन गाड़ी (जैसे एंबुलेंस) को रास्ता नहीं देने पर पहली बार 10000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है.

>> ओवरलोडिंग के लिए 20000 न्यूनतम जुर्माने के साथ साथ 1000 रुपया प्रति टन अतिरिक्त पैसे का प्रावधान होगा.

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