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लोकपाल के पास नहीं अपना दफ्तर, हर महीने दिया जा रहा 50 लाख रुपये रेंट; कांग्रेस ने उठाए सवाल

News18Hindi
Updated: December 2, 2019, 1:56 PM IST
लोकपाल के पास नहीं अपना दफ्तर, हर महीने दिया जा रहा 50 लाख रुपये रेंट; कांग्रेस ने उठाए सवाल
लोकपाल पीसी घोष की फाइल फोटो

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक जवाब में सामने आया है कि 'लोकपाल (Lokpal) का अस्थायी दफ्तर अशोका होटल से चल रहा है, जिसका मासिक किराया 50 लाख रुपये है.'

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  • Last Updated: December 2, 2019, 1:56 PM IST
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नई दिल्ली. देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत के लिए सर्वोच्च संस्था द्वारा अपने ‘होटल कार्यालय’ के लिए हर महीने 50 लाख रुपये का किराया दिए जाने की खबर पर कांग्रेस (Congress) ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि यह 'लोकपाल है या जोकपाल'?

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'लोकपाल या जोकपाल? होटल कार्यालय की लागत 50 लाख रुपये महीना! यह होटल सात महीनों से संस्था का कार्यालय है.' विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि 31 अक्टूबर 2019 तक भ्रष्टाचार निरोधी निगरानीकर्ता को 1,116 शिकायतें मिलीं, लेकिन किसी में भी प्रारंभिक जांच तक शुरू नहीं हुई.

सुरजेवाला ने पूछा, 'क्या भाजपा (BJP) समर्थित लोकपाल आंदोलन यह सब देखने के लिए हुआ था.' सुरजेवाला ने एक मीडिया रिपोर्ट को भी टैग किया, जिसमें दावा किया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में एक स्थायी कार्यालय के अभाव में लोकपाल सरकारी स्वामित्व वाले होटल अशोका में अपने कार्यालय के लिए 50 लाख रुपये का मासिक किराया चुकाता है.

अब तक 3 करोड़ 85 लाख रुपये का भुगतान

बता दें अंग्रेजी अखबार Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में कोई स्थायी कार्यालय ना होने के चलते लोकपाल का दफ्तर सरकार के स्वामित्व वाले होटल अशोका में काम करता है, जिसके लिए 50 लाख रुपये का मासिक किराया दिया जाता है.

सूचना के अधिकार के तहत एक जवाब में खुलासा हुआ कि 'लोकपाल अस्थायी रूप से अशोका होटल से संचालित हो रहा है. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) द्वारा तय किराया लगभग 50 लाख रुपये है. 22 मार्च, 2019 से 31 अक्टूबर, 2019 तक 3 करोड़ 85 लाख रुपये का भुगतान किया गया है.'

इस वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीसी घोष को सरकार ने भारत का पहला लोकपाल नियुक्त किया था. उनके अलावा सरकार ने लोकपाल के कार्यालय में सभी नौ पदों के लिए चार न्यायिक और चार गैर-न्यायिक सदस्यों को भी नियुक्त किया. तब से लोकपाल का कार्यालय अशोका होटल में ही काम कर रहा है.क्या है लोकपाल?
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 23 मार्च को जस्टिस पिकानी चंद्र घोष को लोकपाल अध्यक्ष की शपथ दिलाई थी. इसके बाद जस्टिस घोष ने 27 मार्च को ही आठ सदस्यों को भी शपथ दिलवाई. लोकपाल के साथ अधिकतम आठ सदस्य होने चाहिए, इनमें से चार को न्यायिक सदस्य होना जरूरी है. जस्टिस घोष मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट से जज के तौर पर रिटायर हुए हैं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं.

लोकपाल किसी के भी खिलाफ आई शिकायत की जांच कर सकते हैं. लोकपाल के पास किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का अधिकार है, जो प्रधानमंत्री, या सरकार में मंत्री या संसद सदस्य, साथ ही समूह A, B, C और D के तहत सरकार के अधिकारी हैं.

भाषा इनपुट के साथ

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First published: December 2, 2019, 1:05 PM IST
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