ईस्ट दिल्ली: कांग्रेस के लवली और AAP की आतिशी के सामने बीजेपी का कौन?

इस सीट पर कांग्रेस ने अरविंद सिंह लवली और आप ने आतिशी मर्लेना को टिकट दिया है. बीजेपी की तरफ से कैंडिडेट की घोषणा अभी नहीं हुई है.

News18Hindi
Updated: April 22, 2019, 1:06 PM IST
ईस्ट दिल्ली: कांग्रेस के लवली और AAP की आतिशी के सामने बीजेपी का कौन?
इस सीट पर कांग्रेस ने अरविंद सिंह लवली और आप ने आतिशी मर्लेना को टिकट दिया है. बीजेपी की तरफ से कैंडिडेट की घोषणा अभी नहीं हुई है.
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Updated: April 22, 2019, 1:06 PM IST
कांग्रेस ने भी दिल्ली की 6 लोकसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. ईस्ट दिल्ली के लिए कांग्रेस ने बीजेपी से वापस लौटे दिल्ली के कद्दावर नेता अरविंदर सिंह लवली पर भरोसा दिखाया है. इस सीट पर आम आदमी पार्टी की तरफ से पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली आतिशी मर्लेना को टिकट दिया है. वहीं बीजेपी ने अभी इस सीट पर कैंडिडेट का ऐलान नहीं किया है, लेकिन 2014 में यहां से बीजेपी के महेश गिरी ने जीत दर्ज की थी.

ये भी पढ़ें: कांग्रेस ने दिल्ली में घोषित किए छह उम्मीदवार, मनोज तिवारी के खिलाफ शीला दीक्षित को टिकट

क्या है इस सीट का इतिहास?
1967 से लेकर 2014 तक 1997 के उपचुनाव समेत कुल 14 लोकसभा चुनाव में यहां 6 बार बीजेपी और 6 बार ही कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर और एंटी इनकंबेंसी के प्रभाव के चलते जनता ने दो बार के सांसद और मुख्‍यमंत्री के बेटे संदीप दीक्षित को हार का मुं‍ह दिखा दिया था. जबकि बीजेपी के महेश गिरि के सिर जीत का सेहरा बांध दिया था. महेश गिरि ने 572202 (47.83%) वोटों के साथ आम आदमी पार्टी के राजमोहन गांधी को 190463 वोटों से हराया था. राजमोहन गांधी को कुल 381739 (31.91%) वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के संदीप दीक्षित 203240(16.99%) वोटों के साथ तीसरे पायदान पर रहे. बता दें कि महेश गिरि अविवाहित हैं और पेशे से सामाजिक कार्यकर्ता हैं.

बड़े नेताओं की सीट रही है ईस्ट दिल्ली
साल 1966 में गठित पूर्वी दिल्ली सीट पर 1967 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था और पहले ही चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस की हार हुई थी. पहला चुनाव भारतीय जनसंघ के हरदयाल देवगन ने कांग्रेस के बी मोहन के विरुद्ध जीता था. उसके बाद 1971 में कांग्रेस के एचकेएच भगत ने भारतीय जनसंघ के हरदयाल देवगन को हराया. हालांकि इंदिरा विरोधी लहर में साल 1977 में यहां से बीएलडी के किशोर लाल ने एचकेएच भगत को पटखनी दे दी. 1980 में पांसा पलटते हुए एचकेएच भगत ने किशोर लाल (इस बार जेएनपी से) को हरा दिया. साल 1984 के आम चुनाव में भी जेएनपी और कांग्रेस ने पुराने चेहरों पर फिर से दांव लगाया. जिसमें कांग्रेस को कामयाबी मिली. 1989 को यहां से एचकेएच भगत ने तीसरी बार जीत करते हुए निर्दलीय चांद राम को शिकस्त दी.

साल 1991 में बीजेपी के बीएल शर्मा ने एचकेएल भगत को हराकर कांग्रेस से ये सीट छीन ली. 1996 में बीएल शर्मा ने कांग्रेस के दीपचंद बंधु का हराते हुए अपनी जीत बरकरार रखी. 1997 के उपचुनावों में बीजेपी के लाल बिहारी ने कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार वालिया को हराया. साल 1998 में लाल बिहारी ने कांग्रेस उम्मीदवार शीला दीक्ष‍ित को हार का मुंह देखने को मजबूर कर दिया. 1999 में हुए चुनाव में लाल बिहारी तिवारी को लगातार तीसरी बार कामयाबी मिली. उन्होंने कांग्रेस के एचएल कपूर को हराया था. साल 2004 में कांग्रेस के संदीप दीक्षित ने तीन बार के विजयी सांसद लाल बिहारी तिवारी को हरा दिया. साल 2009 में भी संदीप दीक्षित ने ही बीजेपी के चेतन चौहान को यहां शिकस्त दी थी.
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क्या कहता है सीट का हिसाब-किताब?
2008 के संसदीय और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के तहत पूर्वी दिल्ली के 10 विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन 2008 में किया गया था. 17,07,725 लोगों की आबादी वाला ये संसदीय क्षेत्र दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है. यमुना नदी से घिरा, पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र दिल्ली के शाहदरा, गांधी बाग, प्रीत विहार और सीलमपुर को कवर करता है. इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 10 विधानसभा आती हैं. जिनमें जंगपुरा, पड़पड़गंज, कृष्णा नगर, ओखला, लक्ष्मी नगर, गांधी नगर, त्र‍िलोकपुरी, विश्वास नगर, शाहदरा और कुंडली शामिल हैं.

पूर्वी दिल्ली सीट पर पंजाबी, ब्राह्मण, गुर्जर और ,एस.सी./एस.टी., मुसलमान वोटर बड़ी संख्या में मौजूद हैं. आम आदमी पार्टी से पहले तक कांग्रेस-बीजेपी इसी के संतुलन के आधार पर टिकट बंटवारा करती थी लेकिन अब विकास, स्कूलों की दशा और सड़कें जैसे मुद्दे भी अहम् हैं. इस सीट की 10 विधानसभा सीटों में से 5 सीटों पर पंजाबी और ब्राह्मण समाज के वोटरों का कब्जा है तो लगभग 3 सीटों पर गुर्जर समुदाय के वोटर बहुसंख्यक हैं.

पूर्वी दिल्ली की लगभग सभी सीटों पर एस.सी./एस.टी. के वोटर बंटे हुए हैं. इन सीटों पर आप ने बिहार से आकार दिल्ली में बसे वोटर्स को लुभाने का काम किया है. बता दें कि कांग्रेस कैंडिडेट अरविंद सिंह लवली शीला सरकार में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री के अलावा दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद सम्भाल चुके हैं. हालांकि साल 2017 में दिल्ली एमसीडी चुनाव से ठीक पहले लवली बीजेपी में शामिल हो गए थे. हालांकि वे वहां सिर्फ 9 महीने ही टिक पाए और राहुल गांधी की मौजूदगी में फरवरी 2018 में एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हो गए.

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