लोकसभा चुनाव 2019: हेमामालिनी, कनिमोझी से लेकर चिदंबरम, ये है दूसरे चरण की VIP सीटों का हाल

दूसरे चरण की VVIP सीटों पर हेमामालिनी, कनिमोझी, कार्ती चिदंबरम, दयानिधि मारन, राज बब्बर और तारिक अनवर जैसे नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 5:00 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: हेमामालिनी, कनिमोझी से लेकर चिदंबरम, ये है दूसरे चरण की VIP सीटों का हाल
दूसरे चरण की VVIP सीटों पर हेमामालिनी, कनिमोझी, कार्ती चिदंबरम, दयानिधि मारन, राज बब्बर और तारिक अनवर जैसे नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है.
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 5:00 PM IST
कुछ ही घंटों में लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण के लिए 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 97 लोकसभा सीटों पर मतदान शुरू हो जाएगा. दूरसे चरण में करीब 22 सीटें ऐसी हैं जिन्हें नतीजों के मामले में काफी अहम् माना जा रहा है. इन सीटों पर हेमामालिनी, कनिमोझी, कार्ती चिदंबरम, दयानिधि मारन, राज बब्बर और तारिक अनवर जैसे नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है.

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दूसरे चरण में असम की 5, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 3, जम्मू कश्मीर की 2, कर्नाटक की 14, महाराष्ट्र की 10, मणिपुर की 1, ओडिशा की 5, पुड्डुचेरी की 1, तमिलनाडु की 39, त्रिपुरा की 1, उत्तर प्रदेश की 8 और पश्चिम बंगाल की 3 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है. जानिए इस चरण की कुछ महत्वपूर्ण सीटों के बारे में...

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1. तमिलनाडु:

कन्याकुमारी- यहां बीजेपी ने पॉन राधाकृष्णन को जबकि कांग्रेस ने मशहूर बिजनेसमैन एच वसंथाकुमार को टिकट दिया है. साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भी राधाकृष्णन ने वसंथा को एक लाख 28 हज़ार वोटों से शिकस्त दी थी. इस सीट की अहमियत इसी से जाहिर हो जाती है कि पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों ने यहां चुनावी सभा की थी. राज्य के बाकी हिस्सों से उलट यहां द्रविड़ नहीं बल्कि हिंदुओं में नाडर और ईसाई सबसे बड़ा वोट बैंक हैं.

तूतीकोरिन- यहां से पूर्व सीएम और डीएमके संस्थापक एम करूणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोझी मैदान में हैं. यहां कनिमोझी का मुकाबला बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष तमिलीसाई सौदेराजन से है. डीएमके चीफ स्टालिन और कनिमोझी के लिए ये मुकाबला काफी अहम् है. इस सीट पर भी हिंदू नाडर वोट बैंक अहम् माना जाता है. 2014 में AIADMK के जेयासिंह थियागराज ने डीएमके के पी जगन को यहां तीन लाख 66 हज़ार वोटों से ज्यादा से हाराया था.
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नीलगिरी(SC)- इस सीट पर डीएमके के ए राजा और AIADMK के एम थियागराजन के बीच कड़ा मुकाबला है. नीलगिरी पूर्व केंद्रीय टेलिकॉम मिनिस्टर और 2जी घोटाले में आरोपी रहे ए राजा की मजबूत सीट मानी जाती है. 2009 में भी राजा ने यहां से चुनाव जीता था. 2014 में AIADMK के सी गोपालकृष्णन ने ए राजा को यहां एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.

शिवगंगा- इस सीट पर पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ती चिदंबरम मैदान में है. कार्ती का मुकाबला बीजेपी के एच राजा से है. ये पी चिदंबरम की परंपरागत सीट है जहां से पहली बार कार्ती मैदान में है और उनकी लड़ाई बीजेपी के नेशनल सेक्रेटरी राजा से है. राजा और कार्ती दोनों ने ही 2014 का चुनाव लड़ा था जिसमें दोनों को ही बुरी हार का सामना करना पड़ा था. इस सीट पर 2014 में AIADMK के पीआर सेंथिलनाथन ने डीएमके के धुरईराजा शुभा को ढाई लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.

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चेन्नई सेंट्रल- यहां मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है. इस सीट से डीएमके के दयानिधि मारन, पीएमके के सैम पॉल और एसडीपीआई के देहलान बकावी मैदान में हैं. मारन पूर्व केंद्रीय टेलिकॉम मिनिस्टर हैं जबकि एनडीए के की पार्टनर पीएमके के कैंडिडेट पॉल जाने-माने बिजनेसमैन हैं. इस सीट पर मुस्लिम और ईसाई वोटर्स बड़ी संख्या में हैं जिसके चलते बकावी की उम्मीदवारी भी मजबूत मानी जा रही है. 2014 में AIADMK के एसआर विजयकुमार ने यहां मारन को 45 हज़ार वोटों से हराया था.

उत्तर प्रदेश:

मथुरा- बीजेपी के लिए जाट बाहुल मथुरा सीट नाक का सवाल है. बीजेपी ने एक बार फिर मौजूदा सांसद हेमा मालिनी पर दांव खेला है. उनका मुकाबला गठबंधन की तरफ से रालोद प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह मैदान में हैं. कांग्रेस ने इस सीट से महेश पाठक को टिकट दिया है. पिछले चुनाव में इस सीट से जयंत चौधरी को हार का सामना करना पड़ा थ. इस सीट पर भी मुख्य मुकाबला गठबंधन और बीजेपी के बीच ही है. 2014 में हेमा मालिनी ने आरएलडी के जयंत चौधरी को यहां तीन लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.

फतेहपुर सीकरी- फतेहपुर सीकरी ने पिछले दो लोकसभा चुनावों में ग्लैमर और हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों को नकार दिया है. ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर के सामने बड़ी चुनौती है. 2009 में लोकसभा सीट बनने के बाद से ही फतेहपुर सीकरी चर्चा में रही है. 2009 में राज बब्बर यहां ग्लैमर लेकर आए थे. वहीं 2014 में अमर सिंह, लेकिन दोनों को हार का समना करना पड़ा. इस बार बीजेपी ने जहां अपने मौजूदा सांसद बाबू लाल का टिकट काटकर राजकुमार चाहर को मैदान में उतारा है. वहीं गठबंधन ने बाहुबली नेता गुड्डू पंडित पर दांव लगाया है. राज बब्बर कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से एक बार फिर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यानी मुकाबला हाई वोल्टेज होने से साथ-साथ त्रिकोणीय दिख रहा है.

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आगरा(SC) - आगरा उत्तर प्रदेश में चर्चित लोकसभा सीटों में शामिल है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस संसदीय सीट पर लड़ाई रोचक होती जा रही है. बीजेपी ने इस बार आगरा के कद्दावर पार्टी नेता और SC-ST कमीशन के अध्यक्ष रमाशंकर कठेरिया को इटावा भेजकर राज्य सरकार में मंत्री एसपी सिंह बघेल को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने इस सीट से प्रीता हरित को मैदान में उतारा है. गठबंधन की ओर से इस सीट पर बीएसपी उम्मीदवार मनोज कुमार सोनी हैं. इस सीट पर भी बीजेपी और गठबंधन में कांटे की टक्कर है.

अलीगढ़- राजस्थान के राज्यपाल और यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह भी अलीगढ़ सीट पर अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं. यहां से सांसद सतीश गौतम, कभी कल्याण सिंह के बहुत खास माने जाते थे, लेकिन पिछले पांच वर्षों में सांसद और कल्याण सिंह के बेटे राजबीर के बीच विवाद बढ़ता गया है. साल 1991 के बाद बीजेपी ने यहां 6 बार लोकसभा चुनाव जीता है. हालांकि इस बार महागठबंधन के चलते यहां मुकाबला कड़ा है. इसकी वजहों में बीजेपी की आंतरिक कलह, लोकसभा सांसद और प्रत्याशी सतीश गौतम के खिलाफ ऐंटी-इन्कम्बैंसी, जातीय समीकरण और अल्पसंख्यकों का वोट महागठबंधन के पक्ष में जाना मानी जा रहीं हैं. साल 2014 में बीजेपी के सतीश गौतम ने बसपा के अरविन्द कुमार सिंह को यहां तीन लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.
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अमरोहा- मुस्लिम बहुल अमरोहा सीट पर जाट बिरादरी हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहते हैं. इस सीट पर बीजेपी ने एक बार फिर अपने मौजूदा सांसद कंवर सिंह तंवर पर भरोसा जताया है. वहीं गठबंधन की तरफ से बसपा के टिकट पर जेडीएस कुंवर दानिश अली मैदान में हैं. कांग्रेस ने सचिन चौधरी को मैदान में खड़ा किया है. वैसे तो चुनावी मैदान में 15 कैंडिडेट हैं, लेकिन बीजेपी के मौजूदा सांसद कंवर सिंह तंवर, बीएसपी के कुंवर दानिश अली और कांग्रेस के युवा चेहरे सचिन चौधरी के बीच ही मुकाबला है. इनमें दानिश मुस्लिम, कंवर सिंह तंवर गुर्जर और सचिन चौधरी जाट समाज से हैं. 2014 में बीजेपी के कंवर सिंह तंवर ने सपा की हुमेरा अख्तर को यहां डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.

बिहार:

कटिहार- कटिहार लोकसभा सीट पिछले 22 सालों से इलाके के दो दिग्गज नेताओं तारिक अनवर और निखिल चौधरी के बीच मुकाबले की गवाह रही है. 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद यहां बीजेपी नाकाम रही थी और एनसीपी के टिकर पर तारिक अनवर ने जीत दर्ज की थी. तारिक अनवर इस बार कांग्रेस से उम्मीदवार हैं और बीजेपी के निखिल चौधरी की बजाय इस बार उनका मुकाबला जदयू के दुलालचंद गोस्वामी से है. 2014 में एनसीपी में रहे तारिक अनवर ने बीजेपी के निखिल चौधरी को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.

असम:

सिलचर- असम में बांग्लादेश सीमा से लगे कछार जिले की सिलचर संसदीय सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव अभियान की शुरुआत की थी और वह यहां दो रैलियां कर चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी यहां दौरा कर चुके हैं और प्रियंका गांधी ने यूपी से बाहर अपने पहले रोड शो के लिए सिलचर को ही चुना था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे संतोष मोहन देव ने इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगाई थी. हालांकि यह असम की पहली सीट है, जहां बीजेपी साल 1991 में ही जीत दर्ज कर चुकी है.
बीजेपी नेता कबींद्र पुरकायस्थ साल 1991, 1998 और 2009 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं, वह अटल सरकार में मंत्री भी थे. इलाके में अल्पसंख्यकों की खासी आबादी होने की वजह से बदरुद्दीन अजमल वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की भी कुछ इलाकों में मजबूत पकड़ है. साल 2014 में संतोष मोहन देव की बेटी सुष्मिता देव ने कांग्रेस के टिकट पर यहां जीत दर्ज की थी. इस बार भी कांग्रेस ने सुष्मिता देव जबकि बीजेपी ने नए चेहरे राजदीप राय बंगाली को टिकट दिया है.

जम्मू कश्मीर:

श्रीनगर- इस सीट पर नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीपल्स कांफ्रेस के इरफ़ान अंसारी, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के आगा मोहसिन और बीजेपी के खालिद जहांगीर के बीच मुकाबला है. 2014 में लोकसभा चुनाव में, पीडीपी के तारिक हमीद कारा ने अब्दुल्ला को उनके गढ़ से हराकर अपनी अपनी जीत दर्ज की थी. लेकिन पीडीपी के खिलाफ चल रही नाराज़गी के कारण उन्होंने लोकसभा से इस्तीफे दिया था. बाद में फारूख अब्दुल्ला को 2017 के उपचुनाव में जीत हासिल हुई थी. अब्‍दुल्‍ला ने आर्टिकल 35A और धारा 370 को यहां मुद्दा बनाया हुआ है.

ऊधमपुर- इस सीट पर बीजेपी के जीतेंद्र सिंह, कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह, डोगरा स्वाभिमान संघ के चौधरी लाल सिंह और पैंथर्स पार्टी के हर्षदेव सिंह के बीच मुकाबला है. यहां मुख्य मुकाबला जितेन्द्र सिंह और विक्रमादित्य सिंह के बीच माना जा रहा है. हालांकि लाल सिंह जम्मू के पूर्व सांसद हैं और नतीजों में अहम् भूमिका निभा सकते हैं. इस सीट पर नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है.

ओडिशा:

अस्का- इस सीट पर बीजेडी की प्रमिला बिसोई, बीजेपी की अनीता शुभदर्शिनी और कांग्रेस-सीपीआई गठबंधन से रामकृष्ण पांडा उम्मीदवार हैं. बता दें कि ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक अपना पहला लोकसभा चुनाव साल 1998 में इसी सीट से जीते थे और लाडूकिशोर स्वाइन की मौत के बाद प्रमिला को टिकट देना उन्हीं का फैसला है. इस सीट पर 20% से ज्यादा दलित आबादी है.

कंधमाल- इस सीट पर बीजेडी के अच्युत समंथा, बीजेपी के एमए खारबेला और कांग्रेस के मनोज आचार्य के बीच मुकाबला है. साल 2008 में यहां हिंदू-ईसाइयों के बीच कम्युनल राइट्स हुए थे. सिटिंग एमपी प्रत्युष राजेश्वरी के इनकार के बाद राज्यसभा सांसद अच्युत को यहां से उम्मीदवार बनाया गया है. इस सीट पर 50% सेज्यादा वोट आदिवासी हैं.

छत्तीसगढ़:

राजनांदगांव- इस सीट पर बीजेपी के संतोष पांडे और कांग्रेस के भोलाराम साहू के बीच मुकाबला है. बीजेपी प्रत्याशी संतोष पांडे आरएसएस के से जुड़े रहे हैं और बिरेन्द्र नगर से भी चुनाव लड़ चुके हैं. भोलाराम खुज्जी विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं. राजनांदगांव पूर्व सीएम रमन सिंह की विधानसभा सीट है और वो खुद संतोष का प्रचार कर रहे हैं. 2014 में इस सीट पर बीजेपी के अभिषेक सिंह ने कांग्रेस के कमलेश्वर वर्मा को ढाई लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.

महाराष्ट्र:

अमरावती- इस सीट पर शिवसेना के आनंदराव अदसुल और युवा स्वाभिमान पक्ष के नवनीत कौर राणा के बीच मुकाबला है. नवनीत तेलगु फिल्मों में एक्टर रहे हैं और उन्हें एनसीपी, कांग्रेस और रिपब्लिक पार्टी ऑफ़ इंडिया का समर्थन हासिल है. अदसुल तीन बार से बुलढाना जबकि 2 बार अमरावती से भी सांसद रह चुके हैं. इस सीट पर दलित और मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक है.
पश्चिम बंगाल:

दार्जिलिंग- इस सीट पर टीएमसी के अमर सिंह राय, बीजेपी के राजू सिंह बिष्ट, कांग्रेस के शंकर मालाकार और सीपीएम के समन पाठक के बीच मुकाबला है. अमर राय और राजू बिष्ट के बीच यहां सीधा मुकाबला माना जा रहा है. ये सीट गोरखा जनमुक्ति मोर्चा(GJM) के हिंसक आंदोलनों के लिए भी जानी जाती है. गोरखालैंड की मांग के आंदोलन के केंद्र में ये सीट भी रही है. बीजेपी ने इस सीट पर GJM के समर्थन से साल 2009 और 2014 में जीत हासिल की थी.

रायगंज- इस सीट पर सीपीएम के मोहम्मद सलीम, कांग्रेस की दीपा दासमुंशी, बीजेपी की देबोश्री चौधरी और टीएमसी के कनैया लाल अग्रवाल के बीच मुकाबला है. रायगंज उन 2 सीटों में से है जहां साल 2014 में लेफ्ट को जीत हासिल हुई थी. इस सीट पर सीपीएम के पोलित ब्यूरो मेंबर सलीम काफी मजबूत माने जाते हैं. हालांकि 2014 में कांग्रेस दीपा दासमुंशी ने सलीम को कड़ी टक्कर दी थी और सलीम की जीत का अंतर सिर्फ 1,634 वोट था.

कर्नाटक:

तुमकुरु- इस सीट पर बीजेपी के जीएस बसवाराज और जेडीएस के एचडी देवगौड़ा के बीच मुकाबला है. इस सीट पर सबसे बड़ा मुद्दा पानी की समस्या है. बासवराज का आरोप है कि एचडी देवेगौड़ा ने पीडब्ल्यूडी मंत्री एचडी रेवन्ना को विशेष निर्देश दिया है कि वह इस क्षेत्र के लिए पानी नहीं छोड़ें जिसका ज्यादा हिस्सा हासन की तरफ मोड़ दिया गया है जिसे देवेगौड़ा अपना असली घर मानते हैं. इस सीट की लड़ाई दिलचस्प है क्योंकि देवेगौड़ा वोक्कालिगा समुदाय से हैं और बासवराज लिंगायत हैं. बासवराज 1984 से अब तक आठवीं बार चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. उन्होंने चुनाव में तीन बार कांग्रेस के टिकट पर और एक बार 2009 में बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की थी. वह 2014 में बासवराज कांग्रेस के एम गौड़ा से चुनाव हार गए थे. इस बार जेडीएस विकास का वादा कर वोट मांग रहा है.

बेंगलुरु साउथ- बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद को मैदान में उतारा है. 65 साल के बीके हरिप्रसाद कर्नाटक से राज्यसभा सांसद हैं. इस लोकसभा सीट से उनके खिलाफ बीजेपी ने 28 साल के तेजस्वी सूर्या को खड़ा किया है. बेंगलुरु दक्षिण सीट पर अब तक कुल 16 बार चुनाव हुए हैं. जिसमें 6 बार कांग्रेस को यहां जीत मिली है. तीन बार जनता पार्टी के उम्मीदवार ने विजयी हासिल की और साल 1991 से लगातार 7 बार बीजेपी इस सीट से जीतती आ रही है. इसमें से 6 बार बीजेपी के अनंत कुमार यहां से विजयी हुए हैं.
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