लोकसभा चुनाव: क्या दिल्ली की इकलौती आरक्षित सीट पर मुश्किल में है बीजेपी?

बीते पांच सालों में दलितों पर हुए अत्याचार की घटनाओं, एससी/एसटी एक्ट, 13 पॉइंट रोस्टर जैसे मुद्दों के चलते बीजेपी यहां अपने उम्मीदवार तय करने में समय ले रही है.

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Updated: April 22, 2019, 3:28 PM IST
लोकसभा चुनाव: क्या दिल्ली की इकलौती आरक्षित सीट पर मुश्किल में है बीजेपी?
राजेश लिलोठिया और गुग्गन सिंह (फ़ाइल फोटो)
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Updated: April 22, 2019, 3:28 PM IST
कांग्रेस ने दिल्ली की इकलौती आरक्षित (अनुसूचित जाति) सीट नॉर्थ-वेस्ट लोकसभा सीट से राजेश लिलोठिया को अपना उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी ने अभी इस सीट पर कैंडिडेट घोषित नहीं किया है, जबकि आप ने यहां से गुग्गन सिंह को उम्मीदवार बनाया है. पहले कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान का नाम चल रहा था, लेकिन राजेश ने बाजी मार ली.

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सीट का इतिहास
बता दें कि मतदाताओं की संख्या को आधार बनाया जाए तो ये दिल्ली की सबसे बड़ी लोकसभा सीट है. सभी पार्टियां ये सीट जीतकर दिल्ली के दलित वोटरों पर अपनी पहुंच प्रदर्शित करना चाहती हैं. ये सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2009 में यहां पहला लोकसभा चुनाव हुआ और कांग्रेस की कृष्णा तीरथ ने 56.8% वोट हासिल कर बीजेपी की मीरा कांवरिया को एक लाख 80 हज़ार से ज्यादा वोटों से हराया था.

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साल 2014 में आप की एंट्री ने कांग्रेस को सिरे से ख़त्म कर दिया. भले ही बीजेपी के उदित राज ने 46.4% वोटों के साथ जीत दर्ज की हो और आप की राखी बिड्लान को एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया हो लेकिन राखी को भी 38.5% वोट मिले थे. कांग्रेस के लिए ये चुनाव बुरे सपने जैसे था और कृष्णा तीरथ को सिर्फ 11.6% वोट हासिल हुए थे. इस संसदीय क्षेत्र में दिल्ली के विशाल आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र शामिल हैं, जैसे- सरस्वती विहार, रोहिणी, नरेला, मॉडल टाउन और मंगोलपुरी.

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नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली का हिसाब-किताब
साल 2015 में आप की आंधी के बाद से इस सीट पर सभी समीकरण बदले नज़र आ रहे हैं. इस सीट के अंतर्गत दस विधानसभा- नरेला, बादली, रिठाला, बवाना, मुंडका, किरारी, सुल्तानपुर माजरा, नांगलोई जाट, मंगोलपुरी और रोहिणी आती हैं. 10 विधानसभा में सिर्फ रोहिणी से बीजेपी विधायक है, बाकी नौ जगहों पर आम आदमी पार्टी के विधायक हैं. निगम के 47 वार्डों पर गौर करें तो 27 वार्ड पर भाजपा, 12 पर आप, पांच पर कांग्रेस जबकि एक पर बसपा और 2 निर्दलीय पार्षद हैं.

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नॉर्थ वेस्ट लोकसभा सीट पर सबसे अधिक 21 फीसदी दलित मतदाता और 20 फीसदी ओबीसी मतदाता हैं. रिजर्व सीट होने के नाते यहां से सिर्फ अनूसूचित जाति के कैंडिडेट ही मैदान में होते हैं ऐसे में दलित वोट बैंक अक्सर बंट जाता है. ऐसे में ओबीसी के अलावा 16 फीसदी जाट, 12 फीसदी ब्राह्मण, 10 फीसदी बनिया और आठ फीसदी मुस्लिम मतदाता काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

बीजेपी में कन्फ्यूजन!
बीते पांच सालों में दलितों पर हुए अत्याचार की घटनाओं, एससी/एसटी एक्ट, 13 पॉइंट रोस्टर जैसे मुद्दों के चलते बीजेपी यहां उम्मीदवारी के लिए समय ले रही है. उदित राज ने यहां अच्छा काम किया है.जनवरी, 2019 तक mplads.gov.in पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी सांसद उदित राज ने अभी तक अपने सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए 24.40 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. उन्हें सांसद निधि से अभी तक 26.61 करोड़ (ब्याज के साथ) मिले हैं.

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उधर कांग्रेस की तरफ से दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया मैदान में हैं. राजेश 2 बार विधायक रह चुके हैं इसके अलावा वे दिल्ली यूथ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और ऑल इंडिया एससी/एसटी रेलवे कर्मचारी असोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं. आप कैंडिडेट गुग्गन सिंह बवाना से बीजेपी के पूर्व विधायक हैं और साल 2017 में उन्हें संजय सिंह ने पार्टी जॉइन कराई है.

 
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