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लोकसभा चुनाव 2019: ...तो इसलिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में फोकस कर रही है बीजेपी

लोकसभा चुनाव 2019: ...तो इसलिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में फोकस कर रही है बीजेपी

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीजेपी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश को हमेशा से अपनी सियासत के केंद्र में रखा है. योगी की वजह से अब गोरखपुर भी पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

    पीएम नरेंद्र मोदी किसान सम्मान निधि योजना के तहत 6000 रुपये सहायता देने की औपचारिक शुरुआत आज 24 फरवरी को गोरखपुर में करेंगे. पीएम-किसान पोर्टल पर अपलोड किए गए पात्र किसानों को पहली किस्त जारी की जाएगी. सवाल यह है कि पीएम ने किसानों से जुड़ी अपनी सबसे पहत्वपूर्ण योजना को लॉंच करने के लिए पूर्वी यूपी को ही क्यों चुना? सियासी जानकारों का कहना है कि देश की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है और यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है.

    इसी फॉर्मूले से 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी अब 2019 का चुनाव जीतने के लिए पूर्वांचल पर फोकस कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसीलिए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने अपने किसान सम्मेलन और रैली के लिए गोरखपुर को चुना. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन का कहना है कि, 'बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में 51 फीसदी वोट पाने का लक्ष्य रखा है. इसमें किसान मोर्चा की भूमिका अहम होगी.' (ये भी पढ़ें: क्या मुस्लिम बीजेपी को वोट नहीं देते, आंकड़ों में देखिए सच क्या है?)

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    राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया के मुताबिक 'पूर्वांचल में सपा, बसपा और कांग्रेस का कभी अच्छा जनाधार हुआ करता था. अब इसी क्षेत्र में प्रियंका गांधी सक्रिय हैं. अनुप्रिया पटेल और ओम प्रकाश राजभर की नाराजगी भी बीजेपी को पूर्वांचल में परेशान कर रही है, क्योंकि इन दोनों नेताओं का प्रभाव पूर्वी यूपी के जिलों में ही है. गोरखपुर और फूलपुर का उप चुनाव हारने के बाद बीजेपी इस क्षेत्र को लेकर पहले से ज्यादा अलर्ट हो गई है."

    हालांकि,  राजनीति के कुछ जानकारों का कहना है कि बीजेपी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश को हमेशा से अपनी सियासत के केंद्र में रखा है, क्योंकि यहां अयोध्या है और बनारस है. योगी की वजह से अब गोरखपुर भी पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है. इसीलिए नरेंद्र मोदी ने यूपी फतह करने के लिए पूर्वांचल की धरती को अपना चुनाव क्षेत्र बनाया. उन्होंने पूर्वांचल में भी वाराणसी को चुना, जो भारत के सबसे पुराने शहरों और महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है. अयोध्या की वजह से इस क्षेत्र में संघ और हिंदूवादी संगठनों की जबरदस्त दिलचस्पी है.

    गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार टीपी शाही कहते हैं “पूर्वांचल में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की औपचारिक शुरुआत करने के पीछे राजनीतिक मायने भी हैं. यह पीएम मोदी की सबसे अहम योजनाओं में से एक है. जिसके जरिए पार्टी 12 करोड़ किसानों को साधने की कोशिश कर रही है. पूर्वांचल से ही 1 मई 2016 को मोदी ने उज्जवला योजना की शुरुआत की थी. चुनावों में इससे बीजेपी को काफी फायदा मिला.”

    पूर्वांचल वो क्षेत्र है जहां पर उसके सामने सपा-बसपा गठबंधन होने के बाद सबसे अधिक चुनौती है. इसी रणक्षेत्र में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को भी उतार दिया है. यह क्षेत्र सपा और बसपा का गढ़ रह चुका है. मुलायम सिंह यादव पूर्वांचल के आजमगढ़ से सांसद हैं. बसपा प्रमुख मायावती इस क्षेत्र की अकबरपुर सीट से सांसद रह चुकी हैं.

    शाही कहते हैं, “यह क्षेत्र बीजेपी के दो दिग्गजों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ़ है. इस क्षेत्र में 21 जिले और लोकसभा की 26 सीटें हैं. साल 2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने इसकी 23 सीटों पर कब्जा जमाया था. अपना दल को 2 और सपा को एक सीट मिली थी. पूर्वांचल में 2009 के आम चुनाव में बीजेपी ने 9 लोकसभा क्षेत्रों में कब्जा जमाया था. ऐसे में इस किले को बीजेपी किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होने देना चाहती.”

    वह कहते हैं, 'पूर्वांचल में ज्यादातर लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं. गन्ना किसान भी बड़ी संख्या में हैं. इसलिए किसान सम्मेलन और रैली के जरिए उन्हें रिझाने की कोशिश है. विकास में पिछड़े रहे पूर्वांचल की वाराणसी सीट से पीएम मोदी खुद सांसद हैं. पूर्वांचल के दूसरे बड़े केंद्र गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ सीएम हैं. गोरखपुर में किसान रैली का संदेश बिहार के गोपालगंज, सीवान और चंपारण में भी जाएगा.'

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    पूर्वांचल में कौन-कौन लोकसभा सीट
    गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, बांसगांव, फैजाबाद, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, डुमरियागंज, महराजगंज, आंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, सलेमपुर, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़.

    किसानों पर क्यों फोकस?
    पीएम मोदी लगातार किसानों  पर फोकस कर रहे हैं. चाहे गन्ना किसानों से मिलना हो या नमो ऐप के जरिए देश भर के किसानों से संपर्क करना हो. वो एमएसपी में वृद्धि के बाद कृषि प्रधान पंजाब के मलोट (मुक्तसर) में किसान कल्याण रैली कर चुके हैं. सवाल ये है कि शहरी पार्टी मानी जाने वाली बीजेपी का फोकस खेती-किसानी पर क्यों बढ़ गया है?

    डीयू में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं “ग्रामीण क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ कमजोर हो रही है. क्योंकि किसान नाराज हैं. जिन योजनाओं की घोषणा हुई वो जमीन पर नहीं उतरीं. यूपी के स्थानीय निकाय चुनाव में भी यह ट्रेंड दिखा था. जब तक किसानों को फायदा नहीं मिलेगा वो आपके साथ क्यों जुड़ेंगे?”

    साल 2014 में सरकार बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने किसानों के मसलों को सबसे ऊपर रखा था, लेकिन अब खेती-किसानी से जुड़े सवालों पर खुद मोदी सरकार घेरी जा रही है. किसान गांवों में रहते हैं और सबसे ज्यादा वोट करते हैं. इन्हें कोई भी राजनीतिक दल इग्नोर नहीं कर सकता. ऐसे में सरकार इन्हें रिझाने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. गोरखपुर के फर्टिलाइजर मैदान में होने वाले किसान सम्मेलन में पार्टी यह बताने की कोशिश करेगी कि वो किसानों की सच्ची हितैषी है. (ये भी पढ़ें: खेती से बंपर मुनाफा चाहिए तो इन 'कृषि क्रांतिकारी' किसानों से लें टिप्स!)

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    हालांकि, किसान हितैषी होने के इन दावों के बीच सरकार के खिलाफ 2018 में ही पांच बड़े किसान आंदोलन हो चुके हैं. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के चुनाव में भी इसका असर देखने को मिला. ऐसे में बीजेपी किसानों को रिझाने की कोशिश में जुट गई है. बीजेपी के रणनीतिकारों की कोशिश है कि किसी भी तरह से पार्टी का चेहरा एंटी फार्मर न बनने पाए.

    बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त का दावा है “वर्तमान में सबसे बड़ी किसान हितैषी सरकार है. गोरखपुर में होने वाले किसान सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को बताया जाएगा कि खेती-किसानी को लेकर मोदी सरकार ने क्या-क्या कार्य किए हैं. सम्मेलन के बाद कार्यकर्ता उसे जनता को बताएंगे.”

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    Tags: Ayodhya, BJP, Gorakhpur news, Narendra modi, Varanasi news, Yogi adityanath

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