120 साल पुराने मुरुगप्पा ग्रुप की कंपनी के बोर्ड में जगह पाने को अकेले लड़ रही हैं वल्ली अरुणाचलम

मुरुगप्पा ग्रुप के बोर्ड में शामिल किए जाने के लिए सालों से लड़ाई लड़ रही हैं वल्ली अरुणाचलम
मुरुगप्पा ग्रुप के बोर्ड में शामिल किए जाने के लिए सालों से लड़ाई लड़ रही हैं वल्ली अरुणाचलम

मुरुगप्पा ग्रुप (Murugappa Group) के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष (former executive chairman) स्वर्गीय एम.वी. मुरुगप्पन (MV Murugappan) की मौत के तीन साल बाद भी वल्ली, उनकी बहन, और उनकी मां को बोर्ड में शामिल नहीं किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 4:50 PM IST
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(पूर्णिमा मुरली और अद्रिजा बोस)

नई दिल्ली. वल्ली अरुणाचलम (Valli Arunachalam) को परवाह नहीं है अगर उन्हें 'महिलाओं जैसी नहीं' (unwomanly) कहा जाता है. वह अपने बड़े परिवार से आने वाले उन पुरुषों के खिलाफ अकेली लड़ाई (lone battle) लड़ रही है, जो भारत के सबसे पुराने व्यापारिक घरानों में से एक, 120 साल पुरानी मुरुगप्पा ग्रुप (Murugappa Group) की होल्डिंग कंपनी अंबाडी इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड (Ambadi Investments Ltd- AIL) का बोर्ड चलाते हैं. 59 साल की ये वैज्ञानिक (scientist) इसी के बोर्ड में एक पद चाहती है जिसके सदस्य उनके पिता भी थे.

समूह के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष (former executive chairman) स्वर्गीय एम.वी. मुरुगप्पन (MV Murugappan) की मौत के तीन साल बाद भी वल्ली, उनकी बहन, और उनकी मां को बोर्ड में शामिल नहीं किया गया है. पिछले हफ्ते मतदान (बोर्ड के) के दौरान मुरुगप्पा ग्रुप के संस्थापक (Murugappa Group founder) दीवान बहादुर एएम मुरुगप्पा चेट्टियार की पड़पोती (great-granddaughter), मुरुगप्पा ग्रुप के कार्यकारी चेयरमैन एम.एम. मुरुगप्पन की दूसरी चचेरी बहन और पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष ए वेल्लयन की चचेरी बहन को कंपनी संभालने वाले बोर्ड से बाहर रखने का फैसला किया गया था.



'मुझे समूह पर दया आती है'
वल्ली ने न्यूज18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "मुझे समूह पर दया आती है. यह चौंकाने वाली बात है कि इस समय जब महिलाएं कई क्षेत्रों में बाधाओं को पार कर जा रही हैं, दक्षिण भारतीय व्यापार के तथाकथित बड़े सितारे अपने स्वयं के परिवार में महिलाओं की इस तरह से अवहेलना करते हैं. उनके प्रमोटर, निजी हित से जुड़े कारणों से इस मूल्य से वंचित करते हैं कि परिवार की योग्य महिलाओं को बोर्ड में लाया जा सकता है."

सोमवार को आयोजित कंपनी की एजीएम में 91% बोर्ड ने वल्ली के खिलाफ मतदान किया.

'पितृसत्तात्मक प्रथा'
381अरब रुपये के मुरुगप्पा ग्रुप की वेबसाइट पर संस्थापकों और परिवार की एक फैमिली ट्री दी गई है- इसमें एक भी महिला नहीं है. वल्ली, जो इस परिवार की चौथी पीढ़ी से हैं, वे इस सदियों पुरानी प्रथा को बदलने के लिए कोई भी प्रयास करने से नहीं चूक रही हैं.

मुरुगप्पा समूह की पितृसत्तात्मक नीतियों का 2017 में तब परीक्षण हो गया, जब समूह के संस्थापक दीवान बहादुर ए एम मुरुगप्पा चेट्टियार के पोते एमवी मुरुगप्पन की मृत्यु हो गई, जिनका कोई पुरुष उत्तराधिकारी नहीं था. तब से तीन साल से वल्ली खुद को या अपनी बहन को बोर्ड में जगह दिलाने या कंपनी के "उचित मूल्य" पर अपनी हिस्सेदारी खरीदने के दावे के लिए लड़ रही हैं. वल्ली, उसकी बहन वेल्लाची मुरुगप्पन और उनकी मां एम.वी. वल्ली मुरुगप्पन, अंबाडी में सामूहिक रूप से 8.15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं. यह एक ऐसी हिस्सेदारी है जो उन्हें एमवी मुरुगप्पन से विरासत में मिली है.

'लड़ाई'
जिसके बाद अगली जनवरी में वल्ली ने उम्मीद की थी कि इस मुद्दे को सौहार्दपूर्वक हल कर लिया जाएगा. उन्होंने दो साल तक प्रयास किए. उन्होंने कहा, "हमने तटस्थ तीसरे पक्ष की मध्यस्थता सहित कई तरीकों की पेशकश की, जिसके जरिए इस मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से अदालत से बाहर और मीडिया की चकाचौंध से दूर सुलझाया जा सकता था. दुर्भाग्य से हमारे सभी प्रस्तावों को परिवार की ओर से तुरंत ही खारिज कर दिया गया."

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हमने मुरुगप्पा ग्रुप से भी सवाल किये हैं. अब तक उनकी ओर से किसी भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया गया है.
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