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नक्सलवाद की वजह से विस्थापित आदिवासियों को 14 साल बाद भी पुनर्वास का इंतजार

भाषा
Updated: December 15, 2019, 2:50 PM IST
नक्सलवाद की वजह से विस्थापित आदिवासियों को 14 साल बाद भी पुनर्वास का इंतजार
छत्तीसगढ़ से विस्थापित आदिवासियों पुनर्वास का इंतजार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से 13 दिसंबर 2005 से पहले वाम उग्रवाद की वजह से विस्थापित हुए आदिवासी परिवारों की संख्या का पता लगाने के लिए एक सर्वे करने को कहा था.

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नई दिल्ली. नक्सलवाद की वजह से छत्तीसगढ़ से विस्थापित लगभग 5 हजार आदिवासियों की पहचान और पुनर्वास की केंद्र सरकार की कोशिश सर्वे में ही अटकी पड़ी है. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Scheduled Tribes Commission) और केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्रालय (Union Ministry of Tribal Affairs) ने जुलाई में छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से 13 दिसंबर 2005 से पहले वाम उग्रवाद की वजह से विस्थापित हुए आदिवासी परिवारों की संख्या का पता लगाने के लिए एक सर्वे करने को कहा था.

जिससे कि उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हो सके. राज्यों को इस सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए सरकार ने तीन महीने का समय दिया था.

कई के पास नहीं है मतदाता परिचय पत्र
अदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि माओवादी हिंसा की वजह से भागे लगभग 30 हजार लोग ओडि़शा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के जंगलों में 248 बस्तियों में रह रहे हैं. ये आदिवासी पीने के पानी और बिजली जैसी सुविधाओं के न मिलने से बहुत ही दयनीय स्थिति में रह रहे हैं. उन्हें कम मजदूरी मिलती है और इनमें से अधिकतर के पास मतदाता परिचय पत्र नहीं हैं जिससे वे अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकते.

चुनाव के कारण नहीं हो पाया सर्वे
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी अक्टूबर में इन सरकारों को छत्तीसगढ़ से विस्थापित हुए आदिवासियों की संख्या का पता लगाने को कहा था. अधिकारियों ने कहा कि तीनों राज्यों ने अभी सर्वेक्षण का काम शुरू नहीं किया है. छत्तीसगढ़ सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि सर्वेक्षण में इसलिए देरी हो गई क्योंकि प्रशासन स्थानीय निकाय चुनावों में व्यस्त था.

उन्होंने कहा, 'छत्तीसगढ़ में वे (विस्थापित आदिवासी) जिन क्षेत्रों में रहते थे, उनमें से ज्यदातर इलाके पहुंच से दूर हैं. पड़ोसी राज्य, जहां वे वर्तमान में रहते हैं, वे सर्वेक्षण करने की बेहतर स्थिति में हैं.'ये भी पढ़ेंं : अमित शाह ने दिए नागरिकता कानून में बदलाव के संकेत 

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First published: December 15, 2019, 2:50 PM IST
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