Love Story: जब बॉलीवुड हीरोइन के प्रेम में पड़ गया एक ताकतवर मंत्री

मास्को दौरे में वीसी और विद्या सिन्हा के कमरे अगल-बगल थे. रात में शराब के नशे में वीसी बॉलीवुड हीरोइन के कमरे के दरवाजे पर जा पहुंचे

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: January 14, 2018, 3:31 PM IST
Love Story: जब बॉलीवुड हीरोइन के प्रेम में पड़ गया एक ताकतवर मंत्री
विद्याचरण शुक्ला ने एक दिन विद्या सिन्हा को फोन मिलाकर प्रणय निवेदन कर डाला (file photo/PTI)
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: January 14, 2018, 3:31 PM IST
आपातकाल के दिनों में ताकतवर सूचना और प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला एक प्रतिनिधिमंडल लेकर मास्को गए. इसमें बॉलीवुड की उस जमाने की चर्चित हीरोइन विद्या सिन्हा भी शामिल थीं. फिर तो मास्को में उन दोनों की नजदीकियों को लेकर भारत में तरह तरह की चर्चाएं फैलीं.

बात केवल यहीं तक नहीं थी. विद्याचरण शुक्ला ने एक दिन विद्या सिन्हा को फोन मिलाकर प्रणय निवेदन कर डाला. बातचीत में उन्होंने बॉलीवुड एक्ट्रैस से कहा, मैं भी विद्या और तू भी विद्या. जिस समय ये बातें हो रही थीं, तब शायद वहां कोई और भी था. ये बात बाहर भी फैली. इस मसाला लगाकर तमाम तरह की और बातें भी की जाने लगीं. वैसे इसके कुछ दिनों बाद ये खबर भी आई कि विद्या सिन्हा ने इसपर नाराजगी भी जाहिर की है.



दिल्ली के एक पत्रकार ने इस किस्से का बखान अलग तरीके से किया. उनका कहना है कि मास्को दौरे में वीसी और विद्या सिन्हा के कमरे अगल-बगल थे. रात में शराब के नशे में वीसी बॉलीवुड हीरोइन के कमरे के दरवाजे पर जा पहुंचे. उन्हें ये बात कहते सुना गया.

समाजवादी नेता का दावा
कई दशकों तक दिल्ली के सियासी गलियारों के अभिन्न अंग रहे और चंद्रशेखर और वीपी सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों के करीब रहे एक समाजवादी नेता ने मुझसे बात के दौरान विद्याचरण का नाम आते ही तपाक से उल्टा सवाल दागा, “क्या आपको मालूम है कि वीसी के फिल्मी हीरोइन विद्या सिन्हा के साथ क्या रिश्ते थे.” मैने उलटा सवाल जड़ा, “विद्या ने तो उनकी बात पर नाराजगी जाहिर की थी.” तो उन्होंने दावा किया कि ये सब कहने की बातें हैं. दोनों के नजदीकी रिश्ते थे. कई साल रहे. वीसी यूं भी काफी राजसी शौक रखते थे. बात खत्म हो गई लेकिन संकेतों में वो जो कहना चाहते थे, समझ में आ गया.



विद्या और संजीव कुमार का रोमांस
बॉलीवुड में जिन दिनों विद्या सिन्हा काम कर रही थीं. तब वह “रजनीगंधा” और “छोटी सी बात” जैसी फिल्मों से हिट हुईं थीं. उन्हीं दिनों उन्होंने संजीव कुमार के साथ कई फिल्में कीं. संजीव कुमार से उनके रोमांस के किस्से भी खूब चर्चित हुए. विद्या उस दौर की ऐसी हीरोइन भी थीं, जिन्होंने फिल्मों में आने से पहले ही कम उम्र में शादी रचा ली थी.

विद्या के पिता फिल्म निर्माता थे. मुंबई में ही उन्हें पड़ोसी घर में रहने वाले दक्षिण भारतीय अय्यर परिवार के बेटे से प्यार हो गया. प्यार कई साल परवान चढ़ा. 18 साल की उम्र में वह मिस बॉम्बे बनीं. फिर 20-21 साल में वेंकटेश्वर से शादी कर ली. कहा जाता है कि उनके पति उनके फिल्मों में काम करने के पक्ष में थे नहीं. बाद में पति बीमार रहने लगे. 1996 में पति की मौत के बाद वह एडॉप्ट की गई बेटी के साथ आस्ट्रेलिया चली गईं.



विद्या का प्यार, दूसरी शादी और तलाक
वहां उन्हें कुछ ही दिनों में आस्ट्रेलिया में रहने वाले एक भारतीय डॉक्टर नेताजी भीमराव सांलूका से प्यार हुआ. दोनों ने चटपट शादी भी कर डाली. हालांकि ये शादी ज्यादा टिक नहीं पाई. बाद में इसकी परिणति तलाक के रूप में हुई. विद्या को उस जमाने के बॉलीवुड के लोग बिंदास हीरोइनों के रूप में याद करते हैं. दिल्ली के एक पत्रकार ने बताया कि वह अक्सर दिल्ली आती थीं. उनके लिए होटलों में कमरा बुक कराया जाता था.

मध्य प्रदेश के जाने माने अखबार देशबंधु के मुख्य संपादक ललित सुरजन कहते हैं, “मुझको लगता नहीं कि वीसी और विद्या के अफेयर में कोई सच्चाई होगी. मैने भी सुना था कि वीसी ने फोन करके विद्या सिन्हा से ये बात की थी. लेकिन मैने जितना उन्हें रायपुर में देखा और उनके बारे में सुना, उससे मुझको उनके इस पक्ष की कोई जानकारी नहीं मिलती. छत्तीसगढ़ में उन्हें लेकर ऐसी कोई बात सुनी नहीं गई.”

 

किंगसाइज जिंदगी जीने में यकीन रखने वाले
वह बताते हैं, “मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ला के सभी बेटे लंबे, गोरे और सुदर्शन व्यक्तित्व वाले थे. विद्याचरण शुक्ल भी वैसे ही थे. वह काफी लोकप्रिय थे. कम उम्र में उन्होंने 1957 में पहली बार महासमुंद से लोकसभा का चुनाव जीता. जब वह लोकसभा पहुंचे तो सबसे कम उम्र के सांसद थे.” वह कहते हैं, “विद्याचरण किंगसाइज अंदाज में जिंदगी जीने में यकीन रखते थे. वो अंदाज हमेशा बना रहा.”

दिल्ली के घर में पाले हुए थे दो शेर
दिल्ली में आपातकाल के दिनों में विद्याचरण शुक्ल ताकतवर सूचना प्रसारण मंत्री थे. हालांकि उनके कुछ फैसलों ने उन्हें कुख्यात कर दिया. मृत्यु तक वह इमर्जेंसी की बदनामी के दाग नहीं धुला पाए. वह संजय गांधी की चौकड़ी के खास सदस्य माने जाते थे. इस चौकड़ी में कई सुंदर महिलाएं भी थीं. उन दिनों दिल्ली में उनका घर काफी गतिविधियों का केंद्र था. बंगले की शानोशौकत ऐसी कि राजा-महाराजा भी शरमा जाएं. अपने दिल्ली के घर में उन्होंने उन दिनों शेर के दो बच्चों को पालतू बनाकर रखा हुआ था. अपने खास अतिथियों से जब वह इन दोनों शेरों से रू-ब-रू कराते थे कि वो हैरत में पड़ जाते थे. बाद में इन शेरों को चिड़ियाघर भेज दिया गया.

कैल्विन कूपर के नाम से उनकी एक शिकार कराने वाली कंपनी थी. जो लोगों को शेरों और दूसरे जंगली जानवरों के शिकार पर ले जाया करती थी. हालांकि बाद में सरकार ने जब वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाई तो ये कंपनी बंद हो गई. दिल्ली के एक पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार ने अपने एक कॉलम में विद्याचरण को राजसी ठाठ से जुड़े विलासों का प्रेमी बताया. अंग्रेजी मैगजीन आउटलुक के कुछ साल पहले अपने अंक में उन्हें लेडीज मैन कहा. इस आर्टिकल में भी विद्याचरण और विद्या सिन्हा की नजदीकियों के बारे में इशारा किया गया. हालांकि रायपुर में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके एक सीनियर जर्नलिस्ट ने कहा, “उनकी रंगीनमिजाजी के चर्चे तो मैने भी काफी कुछ सुने हैं लेकिन इसके कोई तथ्य नहीं हैं. बस सब केवल सुनी हुई बातें हैं.”



विद्याचरण शुक्ल की तीन बेटियां हैं. एक बेटी का तो निधन हो गया. बाकी दो बेटियां अमेरिका में रह रही हैं. रायपुर में उनका आलीशान बंगला अब खाली रहता है. अपने राजनीतिक करियर में अगर वीसी शुक्ला को आपातकाल के ऐसे मंत्री के रूप में जाना जाता है, जो मीडिया को काबू में करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता था तो वह ऐसे नेता भी थे, जिन्होंने कभी एक सियासी दल के प्रति निष्ठा नहीं दिखाई. वह लगातार दल बदलते रहे या अपना दल बनाते रहे.

ललित सुरजन कहते हैं, “वीसी के बड़े भाई श्यामाचरण शुक्ल, जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे, को अगर उदार व्यवहार के लिए जाना जाता रहा तो विद्याचरण हमेशा रिवेंजफुल शख्सियत थे. हालांकि वह खासी दृढइच्छाशक्ति वाले नेता भी थे. जिस तरह नक्सलियों के हमले में घायल होने के बाद वह अस्पताल में लगातार जीवन के साथ संघर्ष करते रहे, वो अच्छे खासे लोगों के वश की बात नहीं है. हालांकि बाद में वह बच नहीं पाए.” सुरजन कहते हैं, “ आपातकाल के दिनों में जिस तरह वह मीडिया हाउसेज के साथ पेश आए, उसे लेकर उनके खिलाफ नाराजगी भी थी, इसलिए उनके चरित्र को लेकर भी तरह तरह की बातें फैलाई गई होंगी लेकिन इसकी पुष्टि कौन करेगा. रायपुर में तो लोगों ने कभी उन्हें उस तरह नहीं देखा, जो उनकी छवि दिल्ली में बनी हुई थी.”
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