'लूडो' को कौशल नहीं किस्मत का खेल घोषित किया जाए, हाईकोर्ट में याचिका दायर

कभी बोर्ड पर चौकोर पांसे और रंग-बिरंगी गोटियों के साथ खेला जाने वाला लूडो मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

Petition Against Ludo Game: याचिका दायर करने से पहले मुले इस मामले को लेकर वीपी रोड पुलिस स्टेशन पहुंचे थे. यहां उनकी शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी. इसके बाद याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया.

  • Share this:
    मुंबई. लोकप्रिय बोर्ड गेम 'लूडो' (Ludo) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में एक याचिका दायर की गई है. इसमें याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस खेल को कौशल के खेल के बजाए किस्मत का खेल घोषित किया जाए. महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के केशव मुले ने याचिका में कहा है कि इस खेल में लोग दांव पर पैसे लगा रहे हैं. याचिका में मोबाइल ऐप से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. मामले पर सुनवाई 22 जून को होगी.

    कभी बोर्ड पर चौकोर पांसे और रंग-बिरंगी गोटियों के साथ खेला जाने वाला लूडो मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि लूडो सुप्रीम ऐप पर लोग इस पर पैसा लगा रहे हैं. गेम में लोग 5-5 रुपये का दांव लगाते हैं, जिसके बाद विजेता के खाते में 17 रुपये पहुंचते हैं. जबकि, तीन रुपये ऐप के हिस्से में जाते हैं. याचिकाकर्ता के वकील निखिल मेंगड़े ने कहा है कि लूडो के नाम पर जुआ सामाजिक बुराई का रूप ले रहा है.

    यह भी पढ़ें: Cowin के नाम पर वायरल हो रहे हैं फर्जी ऐप्स और लिंक्स के मैसेज, नहीं हुए सावधान तो बैंक अकाउंट तक हो सकता है खाली

    हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट से पहले यह याचिका मजिस्ट्रेट कोर्ट में पहुंची थी. वहां, इसे कौशल का खेल मानते हुए FIR दर्ज करने से मना कर दिया था. याचिकाकर्ता का कहना है कि इस खेल को पैसे लगाकर खेले जाने का तरीका गैंबलिंग प्रतिबंधक कानून की धारा 3,4 और 5 के तहत आता है. हाईकोर्ट में भी सवाल किया गया था कि इस याचिका पर तुरंत सुनवाई की जरूरत क्या है? इस पर वकील का कहना है कि यह एक सामाजिक बुराई का रूप ले रहा और युवा इसकी तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं. उन्होंने अदालत से मामले में तत्काल दखल दिए जाने की मांग की थी.

    क्या था मामला
    याचिका दायर करने से पहले मुले इस मामले को लेकर वीपी रोड पुलिस स्टेशन पहुंचे थे. यहां उनकी शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी. इसके बाद याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया. वहां, इसे कौशल का खेल करार दिया गया और FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दिया. अब याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से 12 फरवरी के आदेश को रद्द करने और पुलिस को कार्रवाई के आदेश देने की मांग की है.