पढ़िए भारत के उस नेता की कहानी, जिसने बिना एक सीट जीते बनवा दिए तीन प्रधानमंत्री

राजीव गांधी की मौत के बाद हत्या का आरोप डीएमके नेता करुणानिधि पर लगा. ये आरोप किसी और नहीं बल्कि केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए अर्जुन सिंह ने लगाया. इसका नतीजा ये निकला कि डीएमके को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली.

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Updated: June 3, 2019, 1:20 PM IST
पढ़िए भारत के उस नेता की कहानी, जिसने बिना एक सीट जीते बनवा दिए तीन प्रधानमंत्री
राजीव गांधी की मौत के बाद हत्या का आरोप डीएमके नेता करुणानिधि पर लगा. ये आरोप किसी और नहीं बल्कि केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए अर्जुन सिंह ने लगाया. इसका नतीजा ये निकला कि डीएमके को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली.
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Updated: June 3, 2019, 1:20 PM IST
दक्षिण भारत की राजनीति के केंद्र एम करुणानिधि की आज (तीन जून) 95वीं जयंती है. उनके जन्म की ये पहली तारीख है जब वह इस दुनिया में नहीं हैं. जबकि लोकसभा चुनाव 2019 में उनकी पार्टी द्रविण मुनेत्र कणगम (DMK) ने जबर्दस्त जीत दर्ज की है. तमिलनाडु की कुल 38 सीटों पर चुनाव हुए थे, इनमें 23 पर डीएमके ने जीत दर्ज की. इस जीत को उनके बेटे एमके स्टालिन ने अपने पिता को समर्पित किया.

एम करुणानिधि के समर्थक उन्हें प्यार और सम्मान से कलाइग्नर पुकारते थे. उन्हें कलाइग्नर का खिताब थूकु मेदई नाटक के लिए एम आर राधा कुमार ने दिया था.कलाइग्नर राजनीति के इतने माहिर खिलाड़ी थे कि बिना एक सीट जीते भी देश का पीएम चुनने में अहम भूमिका अदा करते थे. यह बात 1989-1991 की है. तब हुए लोकसभा चुनाव में एम करुणानिधि की पार्टी डीएमके को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी. लेकिन इसके बावजूद करुणानिधि ने ना केवल केंद्र में सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि पीएम बनाने और उन्हें बदलने में खास भूमिका में रहे.

चेन्नई के वरिष्ठ पत्रकार आर नूर उल्लाह ने न्यूज18 हिन्दी को बताया कि करुणानिधि पूरे समय सियासत के एक बड़े गेमचेंजर रहे. 1989 में उनके हाथ में लोकसभा की एक भी सीट नहीं थी. लेकिन इसके बाद भी चौधरी देवीलाल के साथ मिलकर वीपी सिंह को पीएम बनवाने में अहम रोल निभाया.

इस वजह से हुई थी कलाइग्नर की करारी हार

नूर उल्लाह बताते हैं कि बात 1991 की है. राजीव गांधी की मौत के बाद हत्या का आरोप डीएमके नेता करुणानिधि पर लगा. ये आरोप किसी और नहीं बल्कि केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए अर्जुन सिंह ने लगाया. इसका नतीजा ये निकला कि डीएमके को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली.



दोबारा पीएम बनवाने में निभाई अहम भूमिका
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इसके बाद ऐसा माना जाने लगा कि अब डीएमके की राजनीति का सूर्य अस्त हो गया. लेकिन कलाइग्नर और पारखी हो गए. अचानक सियासत ने फिर पलटा खाया और 1996 में डीएमके 17 सीट और उसके सहयोगी दल तमिल मनीला कांग्रेस को लोकसभा में 20 सीट मिलीं. आखिरकार करुणानिधि की सिफारिश पर एचडी देवेगौड़ा को पीएम बनाया गया.

इंद्र कुमार गुजराल को बनवाया पीएम
नूर उल्लाह का कहना है कि कांग्रेस ने एचडी देवेगौड़ा सरकार से समर्थन वापस ले लिया. जिसके बाद देवेगौड़ा की सरकार गिर गई. लेकिन इस बीच करुणानिधि कांग्रेस के अंदर अपने संबंधों को खासा मजबूत कर चुके थे. कांग्रेस के कई दिग्गजों से उनके अच्छे संबंध थे. यही वजह थी कि देवेगौड़ा के पीएम पद से हटने के बाद करुणानिधि आईके गुजराल को पीएम बनवाने में कामयाब रहे थे.

मंगलसूत्र पहनाने से बचने के लिए छोड़ दिया प्रेमिका को
चेन्नई के वरिष्ठ पत्रकार आर नूर उल्लाह बताते हैं कि करुणानिधि को परंपरागत रीति रिवाज़ से शादी करना मंजूर नहीं था. इसी के चलते उन्होंने अपनी प्रेमिका से शादी नहीं की थी.



उन्होंने बताया कि, बात 1944 की है करुणानिधि की प्रेमिका के घरवालों ने परंपरागत तरीके से शादी करने की बात कही थी. लेकिन उनके सिद्धांत इसकी इजाज़त नहीं दे रहे थे. वो मंत्रोच्चारण और मंगलसूत्र वगैरह के खिलाफ थे. इसलिए उनकी शादी उनकी प्रेमिका से नहीं हो सकी.

हालांकि उनकी प्रेमिका ने भी इसके बाद कहीं और शादी नहीं की. नूर उल्लाह का कहना है कि इसी तरह के कुछ सामाजिक रीति रिवाज के चलते ही करुणानिधि की एक अलग छवि समाज में उभरकर सामने आई थी.

नूर उल्लाह का कहना है कि वैसे तो करुणानिधि की तीन पत्नियां थीं. उनकी पहली पत्‍नी थीं 'पदमावती' जो अब नहीं रहीं. करुणानिधि की दूसरी पत्नी दयालु अम्‍मल और तीसरी पत्‍नी राजथी अम्‍मल हैं.

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First published: June 3, 2019, 12:14 PM IST
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