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'MA इंग्लिश चायवाली'- इतना पढ़कर भी नहीं मिली नौकरी तो लड़की को खोलनी पड़ी चाय की दुकान

'MA इंग्लिश चायवाली'- इतना पढ़कर भी नहीं मिली नौकरी तो लड़की को खोलनी पड़ी चाय की दुकान

कोलकाता में युवती ने खोली चाय की दुकान. (Pic- News18)

कोलकाता में युवती ने खोली चाय की दुकान. (Pic- News18)

MA English Chaiwali: टुकटुकी दास ने News18 से कहा, 'मेरा मानना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता. इसलिए मैंने भी एमबीए चायवाला के जैसे ही अपनी खुद की चाय की दुकान खोलने का फैसला किया था. शुरुआत में इसके लिए जगह खोजने में दिक्‍कत हो रही थी, लेकिन बाद में मैं इसमें सफल रही. अब मैं चाय और स्‍नैक्‍स बेचती हूं. क्‍योंकि मैं एमए हूं इसलिए मैंने दुकान का यह नाम रखा है.' टुकटुकी दास इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता है.

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    कोलकाता. कोलकाता (Kolkata) की टुकटुकी दास (Tuktuki Das) के मां-बाप हमेशा उससे कहते थे कि वह जमकर पढ़ाई करेगी तो एक दिन आसमान छूएगी. वह उसे टीचर बनाना चाहते थे. इसके लिए उसने पूरी मेहनत से पढ़ाई भी की. परीक्षाओं में अच्‍छा प्रदर्शन किया और इंग्लिश में एमए (MA English) की डिग्री हासिल की. लेकिन इसके बाद भी उसे नौकरी नहीं मिल पाई. उसने कई परीक्षाएं दीं. सफल होने के लिए सबकुछ किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई. ऐसे में टुकटुकी ने चाय बेचनी शुरू की.

    टुकटुकी दास ने उत्‍तर 24 परगना के हावड़ा स्‍टेशन में एक चाय की दुकान खोली. उसने दुकान का नाम रखा ‘एमए इंग्लिश चायवाली’. टुकटुकी के पिता वैन ड्राइवर हैं. उसकी मां की ग्रोसरी की छोटी दुकान है. पहले वे दोनों टुकटुकी के इस निर्णय से खुश नहीं थे. इसके बावजूद टुकटुकी ने इस प्‍लान का पूरा करने की ठानी. वह ‘एमबीए चायवाला’ के बारे में इंटरनेट पर पढ़कर प्रेरित हुई थी.

    उसने News18 से कहा, ‘मेरा मानना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता. इसलिए मैंने भी एमबीए चायवाला के जैसे ही अपनी खुद की चाय की दुकान खोलने का फैसला किया था. शुरुआत में इसके लिए जगह खोजने में दिक्‍कत हो रही थी, लेकिन बाद में मैं इसमें सफल रही. अब मैं चाय और स्‍नैक्‍स बेचती हूं. क्‍योंकि मैं एमए हूं इसलिए मैंने दुकान का यह नाम रखा है.’

    टुकटुकी दास इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता है. उसका सपना है कि वह अपने बिजनेस को और बढ़ाए. उसके पिता प्रशांतो दास ने कहा, ‘शुरुआत में तो हम इस फैसले से खुश नहीं थे. हमने उसे इस आशा के साथ पढ़ा‍या लिखाया कि वह शिक्षिका बनेगी. लेकिन उसने चाय की दुकान खोल ली. फिर मैंने सोचा कि अगर आत्‍मनिर्भर बनने का उसका यह फैसला है तो यह अच्‍छा है.’

    जो लोग टुकटुकी की दुकान पर चाय पीने जाते हैं, वे दुकान के नाम के लिए प्रति आकर्षित होते हैं. स्टेशन पर कई यात्री उसके आत्मनिर्भरता के आदर्श वाक्य से सहमत होते हैं. उनका भी मानना है कि टुकटुकी की कहानी देश के अन्य योग्य युवाओं के लिए प्रेरणादायी हो सकती है जो अपने लिए नौकरी हासिल करने में सक्षम नहीं हैं.

    Tags: Kolkata, Tea

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