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अर्थव्यवस्था में नुकसान के बावजूद खेती-किसानी की सुनहरी तस्वीर दिखा रहा महाराष्ट्र का इकोनॉर्मिक सर्वे

कहा जा रहा है कि कृषि क्षेत्र को लॉकडाउन से मिली छूट के कारण यह सेक्टर फायदे में रहा. (सांकेतिक तस्वीर)

कहा जा रहा है कि कृषि क्षेत्र को लॉकडाउन से मिली छूट के कारण यह सेक्टर फायदे में रहा. (सांकेतिक तस्वीर)

Maharashtra Economic Survey: जानकार बताते हैं कि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूनिट्स के बंद होने ने कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) के बढ़ने में मदद की है. क्योंकि इस दौरान पानी और बिजली की उपलब्धता बढ़ गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 6, 2021, 11:27 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) कृषि कारोबार के लिए अच्छी खबर है. 2020-21 में कृषि और इससे जुड़े दूसरे सेक्टर्स में 11.7 फीसदी दर से वृद्धी हो सकती है. इसका कारण इस साल हुए बेहतर मानसून (Monsoon) को बताया जा रहा है. यह जानकारी शुक्रवार को पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे 2021 (Economic Survey 2021) में कही गई है. राज्य में इस साल मानसून सामान्य  का 113.4 प्रतिशत पर था. बीते साल लॉकडाउन (Lockdown) और कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण कई कारोबार प्रभावित हुए थे.

सर्वे के अनुसार, अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में 2020-21 के दौरान 8 फीसदी नकारात्मक वृद्धी देखी जा सकती है. कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण हुए नुकसान के बाद उद्योगों और सेवाओं का 19 लाख 62 हजार 539 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है. हलांकि, इस बार तमाम उद्योगों के बीच कृषि ही ऐसा अकेला क्षेत्र है, जो महामारी से सबसे कम प्रभावित हुआ है.

कहा जा रहा है कि कृषि क्षेत्र को लॉकडाउन से मिली छूट के कारण यह सेक्टर फायदे में रहा. वहीं, सरकार की तरफ से किए गए दूसरे उपाय, जैसे- खेती में लगने वाली चीजों का ट्रांसपोर्ट और वितरण, उपज की बिक्री और ट्रांसपोर्ट, लाइंसेंस की ऑनलाइन सुविधा, राज्य सरकारों के बीच समन्वय और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के चलते कृषि क्षेत्र को काफी फायदा पहुंचा है.



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दूसरे उद्योगों का बंद होना खेती के लिए फायदेमंद
जानकार बताते हैं कि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूनिट्स के बंद होने ने खेती के बढ़ने में मदद की है. क्योंकि इस दौरान पानी और बिजली की उपलब्धता बढ़ गई थी. वहीं, ग्रामीण इलाकों में मजदूरों के रिवर्स माइग्रेशन के चलते काम करने वाले भी आसानी से मिल गए.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राज्य वर्किंग कमेटी के सदस्य और कृषि विशेषज्ञ राजन शीरसागर के हवाले बताया 'खेती की उपज की मार्केटिंग आसान और असरदार तरीके से हुई. दूसरे सेकटर्स के लिए ट्रांसपोर्टेशन और मोबिलाइजेशन मुश्किल था, जबकि कृषि क्षेत्र के लिए कोई पाबंदिया नहीं थी. इसके चलते क्षेत्र को बढ़ने में काफी मदद मिली.' उन्होंने कहा 'यह सब प्राकृतिक है, सरकार को अपनी पीठ नहीं थपथपानी चाहिए.'

सर्वे के अनुसार, कृषि क्षेत्र में विकास के चलते फसल के क्षेत्र का भी 16.2 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. जबकि, लाइवस्टॉक, फॉरेस्ट्री और लॉगिन्ग, फिशरीज और एक्वाकल्चर सेक्टर्स क्रमश: 4.4, 5.7 और 2.6 फीसदी की दर से बढ़ सकते हैं.
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