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दो बार सीएम रहे अशोक चव्हाण पर कांग्रेस के प्रदर्शन का दारोमदार लेकिन 'आदर्श' नहीं रहे हालात

News18Hindi
Updated: October 10, 2019, 4:08 PM IST
दो बार सीएम रहे अशोक चव्हाण पर कांग्रेस के प्रदर्शन का दारोमदार लेकिन 'आदर्श' नहीं रहे हालात
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद अशोक चव्हाण ने भारी मतों से चुनाव जीता था

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद अशोक चव्हाण ने भारी मतों से चुनाव जीता था

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  • Last Updated: October 10, 2019, 4:08 PM IST
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महाराष्ट्र की राजनीति के रसूखदार परिवार से विरासत में मिली सियासत को अशोक चव्हाण सम्हाल रहे हैं. अशोक चव्हाण उस राजनीतिक वंश से ताल्लुक रखते हैं जिसका महाराष्ट्र की सियासत पर गहरा असर रहा है. उनके पिता शंकर राव चव्हाण न सिर्फ महाराष्ट्र के 2 बार मुख्यमंत्री रहे बल्कि केंद्र में कांग्रेस सरकार में कई दफे मंत्री भी रहे. महाराष्ट्र के सियासी इतिहास में पहली दफे ऐसा हुआ है कि पिता-पुत्र ने मुख्यमंत्री पद संभाला.

दो बार कम समय के लिए सीएम रहे

1987 में पहली बार संसद पहुंचने वाले अशोक चव्हाण भी दो बार लोकसभा सांसद, दो बार मुख्यमंत्री और तीन बार विधायक रह चुके हैं. अशोक चव्हाण 8 दिसंबर 2008 से 9 नवंबर 2010 तक मुख्यमंत्री रहे. लेकिन आदर्श हाउसिंग सोसाइटी में घोटाले के आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. उससे पहले वो महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार में उद्योग, खनन और दूसरे विभाग संभाल चुके हैं.

मोदी लहर के बावजूद जीता लोकसभा चुनाव

नांदेड़ की सीट को अशोक चव्हाण का गढ़ माना जाता है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद अशोक चव्हाण ने भारी मतों से चुनाव जीता था. लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अशोक चव्हाण मोदी लहर में चुनाव हार गए.

महासचिव के रूप में शुरू हुआ करियर

अशोक चव्हाण ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में राजनीतिक करियर की शुरुआत की. साल 1987 में वो नांदेड़ लोकसभा सीट से पहली बार सांसद का चुनाव जीते. साल 1992 में वो विधान परिषद के सदस्य बने. साल 1993 में वो महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बने. साल 1995 से 1999 तक वो महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव रहे. साल 2003 में विलासराव देशमुख सरकार में मंत्री बने.
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विलासराव देशमुख की जगह बने सीएम

साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. इसके बाद साल 2009 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीतने के बाद चव्हाण फिर से मुख्यमंत्री बने. खास बात ये है कि उस वक्त केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के कद्दावर नेता सुशील कुमार शिंदे भी सीएम पद की रेस में थे. इसके बावजूद कांग्रेस आलाकमान की पहली पसंद बने अशोक चव्हाण की सियासी हैसियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. हालांकि सहयोगी एनसीपी लगातार गैर-मराठा नेतृत्व का दबाव बढ़ा रहा था.

आदर्श हाउसिंग घोटाले में गंवाई कुर्सी

लेकिन अशोक चव्हाण के हाथ में सत्ता ज्यादा दिन ठहर नहीं सकी. भ्रष्टाचार के आरोपों से उनकी सरकार बुरी तरह घिरी. आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में आरोप लगने के बाद इस्तीफे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस तरह महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर चव्हाण का सफर खत्म हुआ और उनकी जगह पृथ्वीराज चव्हाण महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने.

लेकिन अशोक चव्हाण की राजनीति का अंत नहीं हुआ. साल 2014 में मोदी लहर, सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद अशोक चव्हाण ने नांदेड़ लोकसभा सीट से भारी मतों से चुनाव जीता. लेकिन साल 2019 में वो नांदेड़ की सीट से बीजेपी के उम्मीदवार प्रतापराव पाटिल चिखलिकर से हार गए. वो कांग्रेस के उन 9 मुख्यमंत्रियों में से हैं जो इस बार लोकसभा का चुनाव हारे.

महाराष्ट्र प्रदेश काग्रेस के अध्यक्ष बने

साइंस में ग्रेजुएट अशोक चव्हाण ने एमबीए किया है. अशोक चव्हाण की प्रबंधन की क्वालिटी को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें साल 2015 में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी सौंपी थी. अशोक चव्हाण महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे.

महाराष्ट्र की राजनीति में अशोक चव्हाण कांग्रेस के स्तंभों में से एक हैं. तभी इस बार विधानसभा चुनाव में अशोक चव्हाण पर कांग्रेस आलाकमान ने बड़ी जिम्मेदारी फिर से सौंपी है. अशोक चव्हाण को पार्टी ने भोकर सीट से उम्मीदवार बनाया है. अशोक चव्हाण की पत्नी अमिता अशोकराव चव्हाण यहां से विधायक हैं. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में अमिता चव्हाण भारी मतों से जीती थीं. उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार डॉ माधवराव भुजंगराव को हराया था. अमिता चव्हाण को 100781 वोट मिले थे.

भोकर सीट दरअसल नांदेड़ जिले और लोकसभा क्षेत्र में आती है.नांदेड़ लोकसभा सीट से ही जीतकर अशोक चव्हाण के पिता शंकर राव चव्हाण संसद तक पहुंचे थे.  भोकर सीट पर कांग्रेस 8 बार चुनाव जीती है जबकि एनसीपी एक बार और निर्दलीय 2 बार जीते हैं. बीजेपी इस सीट पर कभी चुनाव नहीं जीत सकी है.

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First published: October 10, 2019, 4:08 PM IST
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