दो डिब्बे पानी के लिए रोज जान पर खेलता है ये 10 साल का बच्चा, पैसेंजर ट्रेन से करनी पड़ती है 14 KM की यात्रा

सिद्धार्थ धागे रोज दोपहर में औरंगाबाद-हैदराबाद पैसेंजर में अपने दो डिब्बे लेकर सवार होता है.

सिद्धार्थ धागे रोज दोपहर में औरंगाबाद-हैदराबाद पैसेंजर में अपने दो डिब्बे लेकर सवार होता है.

मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी लेने के लिए इधर से उधर भटक रहे तमाम महिलाओं- बच्चों में सिद्धार्थ की कहानी सबसे दिल को छू लेने वाली है. वह रोजाना दो डिब्बे लेकर दोपहर में अपने घर से निकलता है. वहां से पैदल मुकुंदवाडी रेलवे स्टेशन पहुंचता है. लेकिन किसी भी दिन शाम 5:30 बजे से पहले वापस नहीं आ पाता.

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  • Last Updated: June 18, 2019, 12:35 PM IST
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महाराष्ट्र के औरंगाबाद से 10 साल के एक बच्चे की दिल बैठा देने वाली कहानी सामने आई है. वह अपने घर के कामों के लिए 14 किलोमीटर ट्रेन की यात्रा कर के दो डिब्बा पानी लेने जाता है. इस 10 साल के बच्चे का नाम सिद्धार्थ धागे है. फिलहाल यह कक्षा दो का छात्र है और औरंगाबाद के मुकुंदवाडी क्षेत्र में रहता है. इस क्षेत्र में पानी की किल्लत है. गर्मी बढ़ने के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी पानी की भारी किल्लत शुरू हो गई है. इस वजह से उसे पीने योग्य पानी लेने के लिए 14 किलोमीटर दूर जाना होता है. सिद्धार्थ के साथ 12 साल की आयशा और नौ साल की साक्षी भी पानी लेने के लिए रोजाना औरंगाबाद-हैदराबाद पैसेंजर पकड़ती हैं.



मराठवाड़ा 7000 गांवों में है पानी की किल्लत

द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर अनुसार मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी किल्लत को इन तीन बच्चों की कहानी बयां करती है. इस क्षेत्र में करीब 7000 गांव पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं. इस क्षेत्र में रोजाना लाखों महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर जाकर पानी ला रहे हैं.



सिद्धार्थ की कहानी दिल बैठा देने वाली है
मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी लेने के लिए इधर से उधर भटक रहे तमाम महिलाओं- बच्चों में सिद्धार्थ की कहानी सबसे ज्यादा दिल को छू लेने वाली है. वह रोजाना दो डिब्बे लेकर दोपहर में अपने घर से निकलता है. वहां से पैदल मुकुंदवाडी रेलवे स्टेशन पहुंचता है. लेकिन किसी भी दिन शाम 5:30 बजे से पहले वापस नहीं आ पाता. क्योंकि वह औरंगाबाद-हैदराबाद पैसेंजर से यात्रा करता है. यह ट्रेन आमतौर पर साढ़े तीन से चार घंटे देरी से आती है.





कई बार सिद्धार्थ अपने पानी के डिब्बे लेकर ट्रेन में बैठने में धक्का-मुक्की का शिकार हो जाता है और वो रोने लगता है.




इसलिए सिद्धार्थ उसी तरह की तैयारी से आता है. लेकिन सिद्धार्थ बताता है कि कई बार ट्रेन समय पर आ जाती है तो भागमभाग मच जाती है. कई बार सिद्धार्थ इस भागमभाग में चोटिल भी हो चुका है.



40 मिनट में पानी भरकर ट्रेन में होना होता है सवार

सिद्धार्थ बताता है कि उसके ट्रेन से उतरने और पानी भरकर वापस ट्रेन में सवार होने के बीच आमतौर पर 40 मिनट का समय मिलता है. लेकिन यह नाकाफी है. क्योंकि पानी भरने के लिए लंबी कतार लगी होती है. पानी भरने के लिए स्टेशन से कुछ दूर जाना होता है. इसके बाद दोनों पानी के डिब्बे भरकर एक-एक कर स्टेशन पर लाकर रखना होता है. ट्रेन के आने पर दोनों ‌डिब्बों के समेत ट्रेन में सवार होना होता है. कई बार भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है. ऐसे में सिद्धार्थ कई बार हारकर रोने लगता है. क्योंकि इसके बाद जल्दी कोई ट्रेन नहीं है जो उसे घर तक पहुंचा दे.



यहां दिनभर में एक बार आता है टैंकर

महज सिद्धार्थ के क्षेत्र में ही नहीं कई शहरी निकायों में भी पानी को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. निर्मला देवी नगर के बारे में यह जानकारी मिलती है कि वहां 300 घर हैं. जबकि इनके यहां नगर निगम का पानी का टैंकर दिन भर में मात्र एक बार आता है. ऐसे में सभी को एक ही बार में अपने-अपने घरों के लिए जरूरी पानी एकत्रित कर लेना होता है.



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