कृषि कानून में संशोधन करेगी महाराष्ट्र सरकार : बालासाहेब थोराट

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि सरकार अपने कृषि कानून में संशोधन करेगी.

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि सरकार अपने कृषि कानून में संशोधन करेगी.

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट (Maharashtra Revenue Minister Balasaheb Thorat) ने बुधवार को कहा कि किसानों और कृषि उत्पाद विपणन समितियों (एपीएमसी) की सुरक्षा के लिए सरकार अपने कृषि कानून में संशोधन करेगी. इस संबंंध में एक मसौदा विधानसभा के मानसून सत्र में भी लाया जाएगा. उन्‍होंने बताया कि हम व्यापारियों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने का प्रावधान भी शामिल करेंगे, जो केंद्रीय कानूनों में नहीं था.

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मुंबई: महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट (Maharashtra Revenue Minister Balasaheb Thorat) ने बुधवार को कहा कि किसानों और कृषि उत्पाद विपणन समितियों (एपीएमसी) की सुरक्षा के लिए सरकार अपने कृषि कानून में संशोधन करेगी क्योंकि तीन केंद्रीय कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मसौदा कानून को पांच जुलाई से शुरू हो रहे महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा.

उन्‍होंने कहा कि हम राज्य कृषि कानून में संशोधन करना चाहते हैं क्योंकि हमें लगता है कि केंद्र सरकार के कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं. प्रस्तावित संशोधन कृषि उत्पाद विपणन समितियों (एपीएमसी) की सुरक्षा, किसानों की शिकायतों का निवारण और फसल व्यापार के दौरान किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.

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उन्‍होंने बताया कि हम व्यापारियों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने का प्रावधान भी शामिल करेंगे, जो केंद्रीय कानूनों में नहीं था. उन्‍होंने कहा कि इस बारे में चर्चा की जा रही है. वो पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी चीफ शरद पवार के निवास पर मीडिया को संबोधित कर रहे थे. उन्‍होंने कहा कि इस बारे में सहकारिता मंत्री बालासाहेब पाटिल, कृषि मंत्री दादा भूसे और कृषि व सहकारिता राज्‍य मंत्री विश्‍वजीत कदम के साथ, मसौदा कानून पर चर्चा करने के लिए वे सभी शरद पवार से मिले.
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थोराट ने कहा, "हमने सहकारी बैंकिंग पर केंद्र के नए कानून पर भी चर्चा की, जो हमें लगता है कि सहकारी क्षेत्र को नुकसान पहुंचाएगा."




गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों को रद्द करने और फसलों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर कानूनी गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान और किसान संगठन के लोग दिल्‍ली के बार्डर इलाकों में नवंबर 2020 से डटे हुए हैं. इस गतिरोध को दूर करने के लिए कई दौर की बातचीत केंद्र और किसान संगठनों के बीच हो चुकी है, लेकिन इसका हल नहीं हो पाया है.

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