मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक, दायर की जा सकती है पुनर्विचार याचिका

महाराष्ट्र की कैबिनेट बैठक में मराठा आरक्षण पर बात हुई.

महाराष्ट्र की कैबिनेट बैठक में मराठा आरक्षण पर बात हुई.

मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र सरकार अड़ी हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने जब आरक्षण के खिलाफ फैसला दे दिया, तो अब सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करने का मन बना चुकी है. इतना ही नहीं इस मामले में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी हस्तक्षेप की मांग करने की अपील राज्य सरकार करेगी.

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मुंबई. मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में सियासी भूचाल जारी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब महाराष्ट्र सरकार इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका डालने का मन बना रही है. इसे लेकर आज महाराष्ट्र कैबिनेट सब कमेटी की बैठक हुई.  बैठक के बाद मंत्री अशोक चौहान ने कहा है कि मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के ऑर्डर के खिलाफ एक रिव्यू पिटीशन दाखिल की जा सकती है. इसे लेकर महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में विचार किया गया है. बैठक में ये भी तय हुआ है कि मराठा आरक्षण को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विश्लेषण करने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, जो 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. बैठक में मंत्री अशोक चौहान, एकनाथ शिंदे, दिलीप वासले पाटिल, मुख्य सचिव सीताराम कुंते, एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभकोणी भी शामिल रहे. बैठक में ये भी तय किया गया है कि मामले में हस्तक्षेप के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी अर्जी लिखी जाएगी.

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 6 मई को दिए गए अपने एक फैसले में महाराष्ट्र में मराठा कोटा (Maratha Reservation) रद्द किया था और कहा कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% से अधिक नहीं हो सकती. अदालत ने ये भी कहा कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत पर तय करने के 1992 के मंडल फैसले को वृहद पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया. साथ ही अदालत ने सरकारी नौकरियों और दाखिले में मराठा समुदाय को आरक्षण देने संबंधी महाराष्ट्र के कानून को खारिज करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था. जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता में जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और एस जस्टिस रवींद्र भट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मामले पर फैसला सुनाया.

कोर्ट ने कहा- 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती आरक्षण सीमा
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक मराठा समुदाय शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े नहीं हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने साथ ही ये भी स्पष्ट किया था कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती. महाराष्ट्र ने आरक्षण की ये लक्ष्मण रेखा लांघ दी थी.

संविधान पीठ ने मामले में सुनवाई 15 मार्च को शुरू की थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने जून 2019 में कानून को बरकरार रखते हुए कहा था कि 16 फीसदी आरक्षण उचित नहीं है और रोजगार में आरक्षण 12 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए और नामांकन में यह 13 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. हाईकोर्ट ने राज्य में शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मराठाओं के लिए आरक्षण के फैसले को बरकरार रखा था.

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