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महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद: कन्नड़ संगठनों की येडियुरप्पा से उद्धव सरकार के खिलाफ एक्शन की मांग

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री सावदी के कर्नाटक में मुंबई के विलय की मांग करने वाले बयान पर भी किसी बीजेपी नेता ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी. (तस्वीर सीएम येदियुरप्पा की फेसबुक वॉल से साभार)
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री सावदी के कर्नाटक में मुंबई के विलय की मांग करने वाले बयान पर भी किसी बीजेपी नेता ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी. (तस्वीर सीएम येदियुरप्पा की फेसबुक वॉल से साभार)

Maharashtra-Karnataka Boundary dispute: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने कर्नाटक (Karnataka) के साथ सीमा विवाद पर कई ट्वीट और बुकलेट जारी कर कर्नाटक को कड़ा संदेश देने की कोशिश की, लेकिन कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं (BJP leaders) के शामिल ना होने से उन्हें निराशा हाथ लगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 31, 2021, 5:39 AM IST
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नई दिल्ली. कर्नाटक (Karnataka) के कुछ क्षेत्रों को महाराष्ट्र (Maharashtra) में शामिल करने की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की मांग के जवाब में कन्नड़ संगठनों और नेताओं ने मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) से तुरंत एक मंत्री को सीमा विवाद की जिम्मेदारी सौंपने की मांग की है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में महाराष्ट्र के खिलाफ मानहानि का मामला भी दायर करने की मांग की है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कर्नाटक को निशाना बनाकर कई ट्वीट किए और कर्नाटक के साथ कथित सीमा विवाद पर एक बुकलेट भी जारी की. शिवसेना (Shivsena) के मुखपत्र सामना ने अपने शुक्रवार के संस्करण में कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा और उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी के उस बयान पर तंज कसा, जिसमें कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने कर्नाटक में मुंबई के विलय की मांग की थी.

कर्नाटक में मुंबई के विलय की मांग करने वाले मंत्री को "पागल" बताते हुए सामना ने लिखा कि पड़ोसी राज्य के उपमुख्यमंत्री को सीमाई इलाकों का इतिहास पता होना चाहिए और विभिन्न इलाकों के एकीकरण के बारे में पता हो, तभी किसी संवेदनशील मुद्दे पर बयान जारी करना चाहिए. कर्नाटक के व्यापक हितों के खिलाफ महाराष्ट्र के कथित अभियान पर टिप्पणी करते हुए कन्नड संगठनों की एक्शन कमिटी के चेयरमैन अशोक चंद्रगी ने कहा, "महाराष्ट्र के लोग जिस तरह से सीमा विवाद पर बयान जारी कर रहे हैं, राज्य सरकार को शीर्ष कोर्ट में मानहानि का मामला दायर करना चाहिए, क्योंकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है." चंद्रगी ने कहा कि राज्य सरकार को वरिष्ठ वकीलों से इस मामले में विचार कर कोर्ट में केस दायर करना चाहिए.

चंद्रगी ने इसके साथ मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा को भी एक पत्र लिखा है और इस मामले को देखने के लिए गृहमंत्री बासवराज बोम्मई को प्रभार देने की मांग की है. चंद्रगी ने कहा कि बोम्मई को इस मामले की पूरी जानकारी है. इस मामले में वकील रवींद्र टोटीगर सहित कई विशेषज्ञों ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि उन्हें दिल्ली में अपनी लीगल टीम को तैयार करना चाहिए और कोर्ट में सीमा विवाद पर पूरी तैयारी के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए. इन लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए जैसा कि महाराष्ट्र सरकार पहले ही इस केस को लड़ने के लिए कई कदम उठा रही है.



शिवसेना के सूत्रों के हवाले से द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सीमा विवाद पर बुधवार को बुकलेट रिलीज कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं के शामिल ना होने को लेकर नाराज हैं. खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की गैरहाजिरी मुख्यमंत्री को नागवार गुजरी है. सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे की कोशिश कार्यक्रम में सभी पार्टियों के नेताओं को शामिल कर सीमा विवाद पर कर्नाटक को एक कड़ा संदेश देने की थी कि सभी पार्टियां और नेता बेलगावी को महाराष्ट्र में शामिल करने के पक्ष में हैं. हालांकि उद्धव ठाकरे और शिवसेना को अपने प्रयासों में निराशा हाथ लगी और कोई भी बीजेपी नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ.

यही नहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री सावदी के कर्नाटक में मुंबई के विलय की मांग करने वाले बयान पर भी किसी बीजेपी नेता ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी. हालांकि कई सारे शिवसेना नेताओं ने सावदी पर पलटवार करते हुए कर्नाटक के कई इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करने की शिवसेना की मांग को दोहराया.
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