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अब महाराष्ट्र में फैली आरक्षण के आग, सड़क पर उतरे 5 लाख मराठा, ये हैं मांग

अब महाराष्ट्र में फैली आरक्षण के आग, सड़क पर उतरे 5 लाख मराठा, ये हैं मांग

ना कोई खबर, ना कोई सूचना और चुप-चाप महारष्ट्र में एक आंदोलन खड़ा हो गया है, और आंदोलन भी कोई छोटा-मोटा नहीं। करीब 4 से 5 लाख लोग इस महा-आंदोलन का हिस्सा हैं। ये आंदोलन है मराठाओं का और मांग है आरक्षण की।

  • News18India
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    नई दिलली। ना कोई खबर, ना कोई सूचना और चुपचाप महारष्ट्र में एक आंदोलन खड़ा हो गया है, और आंदोलन भी कोई छोटा-मोटा नहीं। करीब 4 से 5 लाख लोग इस महा-आंदोलन का हिस्सा हैं। ये आंदोलन है मराठाओं का और मांग है आरक्षण की।

    सबसे पहले ये आंदोलन मराठवाड़ा के औरंगाबाद में शुरू हुआ और अब इस आंदोलन की आग समूचे महाराष्ट्र में फैल रही है। करीब 4 से 5 लाख लोग इस आंदोलन का हिस्सा हैं। आंदोलनकारियों की पहली मांग है आर्थिक और समाजिक तौर पर पिछड़े मराठाओं को आरक्षण मिले। इनकी दूसरी मांग है एट्रॉसीटी कानून को रद्द किया जाए।

    मराठा समाज के लोगों का आरोप हैं की एट्रॉसिटी कानून का सबसे ज्यादा गलत इस्तेमाल मराठा लोगों के खिलाफ होता है। कानून का गलत इस्तेमाल कर उन्हें फंसा दिया जाता है। दलील ये भी जी जा रही है कि मराठा वोटरों के दम पर कई नेताओं ने अपनी हैसियत बनाई, सत्ता का सुख भोगा, कोरड़ों की संपत्ति बनाई, लेकिन मराठा समाज का एक बड़ा तबका आज भी पिछड़ा का पिछड़ा है। इसीलिए आंदोलनकारी इस बार अपनी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में हैं।

    बता दें कि महाराष्ट्र में कॉग्रेस-एनसीपी की पिछली सरकार ने मराठा समाज को चुनाव से ठीक पहले 16 फिसदी आरक्षण दिया था। लेकिन चराज्य में पहले से ही 49 फिसदी आरक्षण है। लिहाजा हाईकोर्ट ने मराठाओं को दिए गए इस आरक्षण को रद्द कर दिया। अब आरोप ये भी लग रहा है कि पर्दे के पीछे से कांग्रेस और एनसीपी इस आंदोलन को हवा दे रही है ताकि राज्य के 32 फिसदी मराठा वोट बैंक को लुभाया जा सके। इस आंदोलन पर महाराष्ट्र के ज्यादातर दिग्गज खामोश हैं लेकिन सीएम देवेंद्र फडणवीस खुलकर इस मामले में कांग्रेस और एनसीपी को घेर रहे हैं।

    जानें, कहां-कहां होगा आंदोलन?

    18 सितंबर :नांदेड़

    19 सितंबर : जालना

    23 सितंबर  :अहमदनगर

    25 सितंबर : पुणे

    27 सितंबर : सांगली में बड़े आंदोलन की तैयारी है।

    इस आंदोलन से महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान आ सकता है। दरअसल जितना बड़ा ये आंदोलन है महाराष्ट्र कि सियासत पर इसका उतना ही बड़ा असर होने वाला है। क्योंकि अब तक के इस सबसे बड़े मराठा आंदोलन के पीछे महाराष्ट्र का कोपर्डी बलात्कार कांड भी बड़ी वजह है।

    कोपर्डी कांड की पीड़ित मराठा थी जबकि अत्याचार करने वाले दलित। मराठा आंदोलन में अत्याचार करने वालों को फांसी देने की मांग भी जोर-शोर से उठ रही है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि दलित अत्याचार प्रतिबंध अर्थात एट्रोसिटी कानून को हटाया जाए। मराठवाड़ा में दलित और मराठा संघर्ष का पुराना इतिहास रहा है और एट्रोसिटी कानून को हटाने के मुद्दे पर एक बार फिर दलित और मराठा आमने सामने आ रहे हैं।

    यानी साफ है कि महाराष्ट्र में सियासी पार्टियों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी होने वाली है, क्योंकि एक तरफ 32 फीसदी वोट बैंक वाला मराठा समाज है तो दूसरी ओर करीब 11 फीसदी वोट बैंक वाला दलित समाज।

    Tags: Mumbai, महाराष्ट्र

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