महाराष्‍ट्र पुलिस के एडीजी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना मामले में याचिका दायर

याचिकाकर्ता का कहना है की यह मामला देश की सुरक्षा से संबंधित है इसके बावजूद महाराष्ट्र पुलिस ने इसकी जानकारी और गिरफ्तार लोगों की पहचान सार्वजनिक की है.

News18Hindi
Updated: September 4, 2018, 1:46 PM IST
महाराष्‍ट्र पुलिस के एडीजी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना मामले में याचिका दायर
महाराष्‍ट्र पुलिस के एडीजी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना मामले में याचिका दायर
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Updated: September 4, 2018, 1:46 PM IST
महाराष्‍ट्र पुलिस के एडीजी परमबीर सिंह और प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में शामिल दूसरे अधिकारियों के खिलाफ बॉम्‍बे हाईकोर्ट  में मंगलवार को एक जनहित याचिका दायर की गई है. इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए यह प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की गई थी. याचिकाकर्ता का कहना है की यह मामला देश की सुरक्षा से संबंधित है इसके बावजूद महाराष्ट्र पुलिस ने इसकी जानकारी और गिरफ्तार लोगों की पहचान सार्वजनिक की है. मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर निर्धारित की गई है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें हाल ही में वामपंथी विचारकों के घरों पर मारे गए छापे के दौरान 'संदिग्ध साक्ष्य' मिले हैं जो सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए माओवादियों के षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं. सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस और पी वरवर राव को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के लिए मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार वामपंथी विचारकों का  का प्रतिबंधित भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध है.

महाराष्ट्र पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) परमबीर सिंह ने कहा, "गिरफ्तार किए गए सभी लोग कबीर कला मंच से जुड़े हुए थे. पुलिस ने रोना विल्सन और सुरेंद्र गडलिंग के बीच हुए सुरक्षित संचार को बरामद किया. पुणे पुलिस सुरक्षित संचार के पासवर्ड को तोड़ने में सक्षम थी, जिसमें माओवादियों द्वारा सरकार को गिराने की साजिश का खुलास हुआ. गिरफ्तार एक्टिविस्टों के बीच हुए एक पत्र के आदान-प्रदान में एक और राजीव गांधी जैसी घटना की योजना का जिक्र किया गया था." उन्होंने कहा कि उन्हें सीपीआई माओवादियों के हजारों मेल, पत्र और अन्य दस्तावेज मिले हैं.

मुंबई में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान परमबीर सिंह ने  गिरफ्तार एक्टिविस्टों द्वारा आदान-प्रदान किए गए पत्रों को दिखाया और कहा कि अबतक एकत्र किए गए दस्तावेज स्पष्ट रुप से गिरफ्तार वामपंथी विचारकों का माओवादी संगठनों के साथ लिंक स्थापित करते हैं.

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