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महाराष्ट्र: सड़क के अभाव में गर्भवती आदिवासी महिला को अस्थायी स्ट्रेचर पर ले जाया गया, प्रसव के दौरान जुड़वां शिशुओं की मौत

महाराष्ट्र: सड़क के अभाव में गर्भवती आदिवासी महिला को अस्थायी स्ट्रेचर पर ले जाया गया, प्रसव के दौरान जुड़वां शिशुओं की मौत

सोमवार को समयपूर्व प्रसव पीड़ा होने के वजह से प्रसूता को बांस के स्ट्रेचर पर 3 किमी दूर मुख्य सड़क पर लाया गया.  (फोटो-न्यूज़18)

सोमवार को समयपूर्व प्रसव पीड़ा होने के वजह से प्रसूता को बांस के स्ट्रेचर पर 3 किमी दूर मुख्य सड़क पर लाया गया. (फोटो-न्यूज़18)

महाराष्ट्र में पालघर जिले के एक गांव में सड़क के अभाव में 26 वर्षीय एक गर्भवती महिला को अस्थायी स्ट्रेचर की मदद से चिकित्सा केंद्र ले जाया गया लेकिन देर से पहुंचने के कारण उसके नवजात जुड़वें शिशुओं की मौत हो गई.

हाइलाइट्स

पालघर जिले के एक गांव में सड़क के अभाव में 26 वर्षीय एक गर्भवती महिला को अस्थायी स्ट्रेचर की मदद से चिकित्सा केंद्र ले जाया गया.
देर से पहुंचने के कारण उसके नवजात जुड़वें शिशुओं की मौत हो गई.
भारी बारिश के बीच अस्थायी स्ट्रेचर से प्रसव पीड़िता को तीन किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाया गया.
जिलाधिकारी गोविंद बोडके ने संबंधित अधिकारियों को सड़क का निर्माण शुरू करने का निर्देश दिया

पालघर. महाराष्ट्र में पालघर जिले के एक गांव में सड़क के अभाव में 26 वर्षीय एक गर्भवती महिला को अस्थायी स्ट्रेचर की मदद से चिकित्सा केंद्र ले जाया गया लेकिन देर से पहुंचने के कारण उसके नवजात जुड़वें शिशुओं की मौत हो गई. एक डॉक्टर ने बताया कि मोखाडा तालुका के मार्कतवादी गांव में सात माह की गर्भवती महिला को सोमवार को समयपूर्व प्रसव पीड़ा होने लगी और उसे भारी बारिश के बीच अस्थायी स्ट्रेचर से तीन किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाया गया.

चिकित्सा केंद्र की डॉक्टर पुष्पा माथुरे के अनुसार बाद में उसे एंबुलेंस से खोडाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया और उसने जुड़वें बच्चे को जन्म दिया जिनकी जन्म के समय ही मौत हो गई. उन्होंने कहा कि यदि उपयुक्त सड़क होती तो महिला को जल्दी इलाज मिल जाता और शिशु बच सकते थे। उन्होंने कहा कि महिला का स्वास्थ्य स्थिर है.

सुदूर गांवों से मरीजों को बांस में कपड़ा बांधकर बनाये गये अस्थायी स्ट्रेचर की मदद से मुख्य मार्ग तक लाया जाता है क्योंकि उपयुक्त सड़कें नहीं होने के कारण एंबलेंस का वहां तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता है. डॉक्टर ने कहा, ‘‘आम तौर पर, जब महिलाएं गर्भावस्था के आठवें या नौंवे महीने में होती हैं, तब हम उन्हें प्रसव के लिए सुदूर गांवों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले आते हैं.’’

मरीजों को मुख्य मार्ग तक लाने में कठिनाई के मद्देनजर जिलाधिकारी गोविंद बोडके ने पिछले हफ्ते इलाके का दौरा किया था और संबंधित अधिकारियों को सड़क का निर्माण शुरू करने का निर्देश दिया था.

Tags: Maharashtra News, Palghar

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