135 रुपये किलो हुई चने की दाल, ग्राहक परेशान, व्यापारी खुद हैरान

135 रुपये किलो हुई चने की दाल, ग्राहक परेशान, व्यापारी खुद हैरान
यापारी देवेंद्र मंडलोई कहते हैं कि अरहर पीछे रह गई, चना आगे भाग गया। जीवन में पहली बार ये रिकॉर्ड बना। 25 साल से धंधा कर रहा हूं, पहली बार ऐसा हुआ है।

यापारी देवेंद्र मंडलोई कहते हैं कि अरहर पीछे रह गई, चना आगे भाग गया। जीवन में पहली बार ये रिकॉर्ड बना। 25 साल से धंधा कर रहा हूं, पहली बार ऐसा हुआ है।

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भोपाल। पकवान का मौसम लेकिन दीपावली के पहले चने की दाल ने महंगाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फुटकर बाजार में चने की दाल 130-135 रुपये किलो तक बिक रही है। दो दिन के अंदर ही दाम में 25 रुपये किलो का इजाफा हुआ है। एमपी की मंडियों में चने के दाम 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल पार करने की वजह से दाल के दाम में उछाल आया है। पहली बार चना और तुअर दाल के दाम बराबरी पर हैं।

मौसम त्योहारों का है। त्योहार का मजा पकवान से ही होता है लेकिन चना जोर पकड़ रहा है। बेसन के बिना पकवान की बात कैसे होगी। भोपाल की गृहिणी नीलम कोहली मार्केट गई तो थीं दो किलो बेसन लेने लेकिन एक किलो ही लेकर वापस घर आ गईं। नीलम कहती हैं कि ये पहली बार हुआ है कि चने की दाल इतनी महंगी है। कोई पूछता नहीं था चने की दाल को। बेसन हर कोई खाता है लेकिन लोग अब बेसन लेना बंद कर रहे हैं। गेहूं-चने का आटा बनाते थे, मगर अब नहीं। दीपावली पर अगर ये रेट रहेगा तो कम में काम चलाएंगे।

ग्राहक की जेब गरम होगी तो रसोई का जायका बिगड़ेगा ही। मगर दुकानदार का कहना है कि वो तो कम मुनाफे में चने की दाल बेच रहे हैं। थोक में ही चने की दाल 130 रुपये किलो तक मिल रही है।



दुकानदार अशोक अग्रवाल कहते हैं कि चने की दाल इतनी महंगी है कि होलसेल भी 130 का है। हम भी इतना ही बेच रहे हैं। सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए। होलसेल बाजार में स्टॉकिस्टों का माल रिलीज कराना चाहिए।



चने की दाल के आसमान छूते दाम की वजह जानने के लिए ये संवाददाता पहुंचा चने की पैदावार के लिए मशहूर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में। करेली मंडी में देसी चना दस हजारी हो गया है। शहर में अगर ग्राहक बढ़े दाम से दुखी हैं तो गांव का किसान मिठाई बांट रहा है। व्यापारियों की मानें तो दाम बढ़ने की वजह कम आवक है।  बताते हैं कि चने की फसल की कमी की वजह से चने के दाम आसमान छू रहे हैं।

किसान प्रकाश पटेल कहते हैं कि हम सोचकर आए थे कि हमारा चना दस हजार में बिक जाए और ऐसा हुआ तो खुशी में मिठाई बांटी। व्यापारी देवेंद्र मंडलोई कहते हैं कि अरहर पीछे रह गई, चना आगे भाग गया। जीवन में पहली बार ये रिकॉर्ड बना। 25 साल से धंधा कर रहा हूं, पहली बार ऐसा हुआ है। पिछले सालों में पांच से छह हजार तक ही रहा। अब चने के उत्पादन की कमी से ये हाल हुए हैं। विदेश से भी चने के आयात में देरी हो रही है, ये भी एक वजह है।

अभी तक तुअर की दाल के दाम आसमान छूते थे लेकिन अब तो चने की दाल के दाम में भी आग लग गई है। अब तक जो एक किलो दाल खरीदता था तो उसे आधा किलो से काम चलाना पड़ेगा। पर बगैर बेसन के काम भी तो नहीं चलता। क्योंकि बेसन की जरूरत तो दीपावली के कई पकवानों में होती है।
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