Army Day: 'उसने लौटने का अपना वादा निभाया, लेकिन इस बार तिरंगे में लिपटकर आया'

पत्नी तृप्ति के साथ मेजर शशिधर नायर
पत्नी तृप्ति के साथ मेजर शशिधर नायर

शशि की कश्मीर में पोस्टिंग तृप्ति के लिए हमेशा से चिंता का कारण रही. जब भी उनकी बात होती शशि जल्द वापस आने का वादा करते. उन्होंने अपनी पत्नी से किया यह वादा निभाया, लेकिन...

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2019, 2:01 PM IST
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श्रेया धौंडियाल
बीते रविवार को पुणे स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद मेजर शशिधर नायर के अंतिम दर्शन के लिए दोस्तों, रिश्तेदारों और अजनबियों की कतार लगी थी. पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा पर गश्त के दौरान आईईडी की चपेट में आने से 33 वर्षीय ये जवान शहीद हो गया.

मेजर नायर का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान उनकी पत्नी तृप्ति अपने व्हीलचेयर पर गुमसुम बैठी रहीं. मेजर नायर दस दिन पहले ही एक महीने की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे.

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तृप्ति और शशि की प्रेम कहानी इतनी स्पेशल है कि पूरा आर्मी सर्कल इस बारे में जानता है. दोनों की पुणे में म्यूचुअल फ्रेंड्स के जरिए मुलाकात हुई थी. तब तृप्ति 26 और शशि 27 साल के थे. दोनों को पहली नजर में ही प्यार हो गया और छह महीने में ही दोनों ने सगाई कर ली. लेकिन तभी एक ऐसी घटना हुई जो न सिर्फ इन दोनों के प्यार के लिए परीक्षा की घड़ी थी, बल्कि मेजर शशि के चरित्र को परखने वाली थी.



सगाई के 8 महीने बाद तृप्ति को मल्टिपल आर्टिरियोसेलेरोसिस होने की बात सामने आई. इस बीमारी की वजह से तृप्ति के शरीर की हलचल धीरे-धीरे कम होने लगी और वह व्हीलचेयर पर आ गईं. कुछ दोस्तों ने मेजर नायर से कहा कि वह सगाई तोड़ दें, लेकिन उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया. उन्होंने वादा किया था जिसे उन्हें पूरा करना था. 2012 में दोनों की शादी हो गई.


हालांकि, इसके बाद भी रास्ता आसान नहीं था. शादी के बाद तृप्ति को एक और अटैक आया, जिससे उनके कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह पैरालाइज हो गया. वह चल नहीं पाती थीं लेकिन इस जोड़े ने कभी कोई पार्टी मिस नहीं की. पहले गांधीनगर और फिर पुणे से सीएमई में मेजर नायर अपनी पत्नी को व्हीलचेयर पर लेकर आते अक्सर दिखते थे. जरूरत पड़ने पर वह उन्हें गोद में उठाकर भी चलते थे. आर्मी एक परिवार की तरह काम करता है और तृप्ति जल्द ही इस परिवार का हिस्सा बन गईं. पहले जो लोग तरस खाते थे अब उनकी नजरें इस जोड़े को प्यार और सम्मान के साथ देखने लगीं.

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शशि की कश्मीर में पोस्टिंग तृप्ति के लिए हमेशा से चिंता का कारण रही. जब भी उनकी बात होती शशि जल्द वापस आने का वादा करते, आखिर उन दोनों को आने वाले कल के बारे में भी सोचना था. इस साल मार्च में वह लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर प्रमोट होने वाले थे और सितंबर में वह स्टाफ कॉलेज की परीक्षा में शामिल होने वाले थे. अक्टूबर में 2/1 GR यूनिट के साथ शशि और तृप्ति बिनागुरी में शिफ्ट होने वाले थे.

पुणे में करीब एक महीने की छुट्टी बिताने के बाद मेजर नायर ने 2 जनवरी को तृप्ति को अलविदा कहा था. उन्होंने जल्द लौटने का वादा किया था. उन्होंने अपना वादा पूरा किया लेकिन वैसे नहीं जैसे तृप्ति ने सोचा था.

वह तिरंगे में लिपटे हुए लौटे. उन्होंने अपनी पत्नी से किया वादा निभाया. उन्होंने अपनी मातृभूमि से किया वादा निभाया.

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