मलयालम कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का निधन

अक्कितम अच्युतन नंबूदरी की सबसे मशहूर काव्य पुस्तक 'इरुपदाम नूतनदीदे इतिहसम' है, जो पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.
अक्कितम अच्युतन नंबूदरी की सबसे मशहूर काव्य पुस्तक 'इरुपदाम नूतनदीदे इतिहसम' है, जो पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.

अक्कितम (Akkitham Achuthan Namboothiri) युगद्रष्ट कवि थे. वह साहित्य अकादमी पुरस्कार, मूर्ति देवी पुरस्कार, कबीर सम्मान, वल्लतोल सम्मान समेत कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं. उनकी कविता, नाटक, उपन्यास और अनुवाद में उनकी 40 से अधिक किताबें छप चुकी हैं. उनकी रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2020, 10:40 AM IST
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कोच्चि. जाने-माने मलयालम कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता (Jnanpith Award) अक्कितम अच्युतन नंबूदरी (Akkitham Achuthan Namboothiri) का निधन हो गया है. वो 94 साल के थे. उन्होंने गुरुवार को केरल के त्रिशूर में अंतिम सांसें लीं. अक्कितम अच्युतन नम्बूदिरी को साल 2019 का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया था. आज शाम को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

अक्कितम युगद्रष्ट कवि थे. वह साहित्य अकादमी पुरस्कार, मूर्ति देवी पुरस्कार, कबीर सम्मान, वल्लतोल सम्मान समेत कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं. उनकी कविता, नाटक, उपन्यास और अनुवाद में उनकी 40 से अधिक किताबें छप चुकी हैं. उनकी रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है.

अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का जन्म 8 मार्च 1926 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था. बचपन से ही उनकी रुचि साहित्य और कला की ओर थी. कविता के अलावा अक्कितम ने नाटक और उपन्यास भी लिखें.





अक्कितम अच्युतन नंबूदरी की सबसे मशहूर काव्य पुस्तक 'इरुपदाम नूतनदीदे इतिहसम' है, जो पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. उनकी कुछ मशहूर पुस्तकें “खंड काव्य”, “कथा काव्य”, “चरित्र काव्य” और गीत हैं. उनकी कुछ विख्यात रचनाओं में “वीरवाडम”, “बालदर्शनम्”, “निमिषा क्षेतराम”, “अमृता खटिका”, “अक्चितम कवितातक्का”, “महाकाव्य ऑफ ट्वेंटीथ सेंचुरी” और “एंटीक्लेमम” शामिल हैं. आपको बता दें कि उन्हें 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1972 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1988 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है.
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