लाइव टीवी

ग्रेनेड हमले में दोनों हाथ गंवा चुकीं मालविका अब दिव्यांगों को दिला रहीं उनका हक

News18Hindi
Updated: March 17, 2020, 6:19 PM IST
ग्रेनेड हमले में दोनों हाथ गंवा चुकीं मालविका अब दिव्यांगों को दिला रहीं उनका हक
ग्रेनेड हमले में अपने दोनों हाथ गंवा चुकीं मालविका अय्यर (फाइल फोटो)

मालविका अय्यर को रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति सम्मान से नवाजा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 17, 2020, 6:19 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. महज 13 साल की उम्र में एक ग्रेनेड विस्फोट में अपना दोनों हाथ खो चुकीं मालविका अय्यर को रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति सम्मान से नवाजा. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर अकांउट पर मालविका अय्यर की प्रेरणा दायक कहानी शेयर की गई है.

मालविका आज एक इंटरनेशनल मोटिवेशनल स्पीकर, डिसेबल्ड लोगों के हक के लिए लड़ने वाली एक्टिविस्ट, सोशल वर्क में पीएचडी के साथ फैशल मॉडल के तौर पर जानी जाती हैं. मालविका बताती हैं कि जब वह 13 साल की थीं तब बीकानेर बम ब्लास्ट में उन्होंने अपना दोनों हाथ खो दिया था. इस घटना में हाथ के साथ ही उनके दोनों पैर भी बुरी तरह से जख्मी हो गए थे. उन्होंने बताया कि उस समय मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. उस वक्त शिक्षा ने मुझे मेरा आत्मविश्वास वापस दिलाने में मदद की. मालविका ने बताया कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा एक प्राइवेट कोचिंग सेंटर से पढ़ाई कर दी. उन्होंने परीक्षा में एक राइटर की मदद ली और 3 महीने की तैयारी में ही 97 प्रतिशत अंक हालिस किए. मालविका ने बताया कि उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कभी भी खुद पर दया नहीं की.



मालविका ने बताया, जब बम ने मेरे दोनों हाथो को खराब कर दिया तो डॉक्टरों ने मेरी जान बचाने की पूरी कोशिश की. मेरे इलाज के दौरान कुछ सर्जिकल गलतियां भी हुईं. उन्होंने बताया कि सर्जिकल गलतियों का मतलब यह है कि उनके हाथ की नुकीली हड्डी मांस से ढंकी न होकर उभरी हुई रह गई. उन्होंने कहा कि इससे दिक्कत ये है कि इस पर हल्की सी भी चोट लगती है तो बहुत तेज दर्द होता है. हालांकि डॉक्टरों की यही गलती उनके लिए काम की साबित हो गई. अब यही हड्डी उनके लिए उंगली का काम करती है. उन्होंने बताया कि इसी हड्डी की मदद से उन्होंने अपनी पीएचडी की थीसिस टाइप की.

इसे भी पढ़ें :- Women's Day 2020: महिलाओं को ऑटो कंपनियां दे रहीं कई तरह की छूट और शानदार ऑफर

मालविका ने कहा कि इस हड्डी की मदद से वह आराम से टाइप कर पाती हैं. उन्होंने कहा कि मेरा हर कदम चुनौतियों से भरा था. मैं दिव्यांगों के साथ भेदभाव दूर करने के लिए काम कर रही हूं, साथ ही मैं दिव्यांगों को सार्वजनिक स्थलों पर सुगम प्रवेश दिलाने के लिए काम कर रही हूं. उन्होंने कहा मुझे मेरे स्कूल, मेरे वर्क प्लेस और मेरे समाज ने अपनाया है. यदि किसी को समाज पूरी तरह से अपनाता हैहै तो वो व्यक्ति जीवन में सब कुछ हासिल कर सकता है. उन्होंने कहा मै ऐसे भारत का सपना देखती हूं, जिसमें मतभेदों के बावजूद हम एक-दूसरे को अपना सकें. उन्होंने कहा कि स्वीकार्यता ही वो पुरस्कार है जो हम खुद को दे सकते हैं. उन्होंने कहा #SheInspiresUs अभियान के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करती हूं. ताकि हम उन महिलाओं की सफलता की कहानियां जान सकें, जो हमें प्रेरित करती हैं.

इसके अलावा नारायण सेवा संस्थान की डायरेक्टर वंदना अग्रवाल ने कहा, “इस नए भारत में, 1.18 करोड़ विशेष रूप से दिव्यांग महिलाओं के लिए शिक्षा और कौशल विकास की ओर ध्यान देना जरूरी है. हमारा मुख्य उद्देश्य महिलाओं में कुपोषण को खत्म करना और समाज में अधिक अवसर और समाधान लाना होना चाहिए. इसके लिए मूल आवश्यकताएं हैं जैसे  महिलाओं के प्रति उचित साक्षरता, पहुंच और भेदभाव नहीं. इन प्रयासों से देश में महिलाओं का उत्थान ज्यादा तेजी से होगा. ”

इसे भी पढ़ें :- बर्थडे पर अनाथों को खाना खिलाती थीं मां, अब बेटी भरती हैं बेघरों का पेट- PM मोदी के अकाउंट पर शेयर की स्टोरी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 8, 2020, 12:34 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading