दिल्ली के अस्पताल में मलयालम नहीं बोलने के आदेश पर नर्सों में नाराजगी, लिखित में माफी मांगने को कहा

मलयाली नर्सों की दिल्ली कार्यसमिति के प्रतिनिधि सी.के. फामीर. (ANI/6 June, 2021)

मलयाली नर्सों की दिल्ली कार्यसमिति के प्रतिनिधि सी.के. फामीर. (ANI/6 June, 2021)

Delhi Hospital Malyalam Language: गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक ने शनिवार को एक परिपत्र जारी कर अपने नर्सिंग कर्मचारियों को काम के दौरान मलयालम भाषा में बात नहीं करने को कहा था

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नई दिल्ली. दिल्ली के सरकारी गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ने नर्सिंग कर्मचारियों को मलयालम भाषा में बात न करने के लिए कहने वाले आदेश को आलोचना के बाद रविवार को वापस ले लिया, लेकिन दिल्ली मलयाली नर्स संघ ने लिखित में माफी मांगने के साथ ही इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है. उन्होंने रविवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, 'यह हमारे लिए बेहद हैरान करने वाला है. हम यह महसूस करते हैं कि यह आदेश हमारी भाषायी आजादी पर खतरा है. संबंधित लोगों से हम माफीनामे की मांग करते हैं क्योंकि उन्होंने पूरे राज्य को प्रताड़ित करने का काम किया है.'


मलयाली नर्सों की दिल्ली कार्यसमिति के प्रतिनिधि सी.के. फामीर ने अस्पताल प्रशासन की मंजूरी के बिना नोटिस जारी करने की निंदा की और कहा कि इस तरह के मामलों में 'गंभीर कार्रवाई' करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'अगर प्रशासन यह कहता है कि उन्हें इस नोटिस के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है. इसे कदाचार की तरह देखा जाना चाहिए और उस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जो कि पत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है, लेकिन फिर भी उसने आधिकारिक लेटरहेड के जरिए ऐसा किया.'


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विवाद बढ़ने के बाद मलयालम भाषा संबंधित आदेश को वापस लेते हुए चिकित्सा निदेशक डॉ. अनिल अग्रवाल ने एक नया आदेश जारी कर कहा, 'अस्पताल प्रशासन और दिल्ली सरकार की जानकारी या किसी भी निर्देश के बिना जी बी पंत अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक द्वारा जारी परिपत्र तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है.' डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी.


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क्या था मामला

उल्लेखनीय है कि अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक ने शनिवार को एक परिपत्र जारी कर अपने नर्सिंग कर्मचारियों को काम के दौरान मलयालम भाषा में बात नहीं करने को कहा था, क्योंकि 'अधिकतर मरीज और सहकर्मी इस भाषा को नहीं जानते हैं,' जिसके कारण बहुत असुविधा होती है. दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में से एक गोविंद बल्लभ पंत स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (जीआईपीएमईआर) द्वारा जारी परिपत्र में नर्सों से कहा गया था कि वे संवाद के लिए केवल हिंदी और अंग्रेजी का उपयोग करें, अन्यथा 'कड़ी कार्रवाई' का सामना करने के लिए तैयार रहें. जी बी पंत के नर्सिंग स्टाफ संगठन के एक अधिकारी ने कहा कि अस्पताल में करीब 850 नर्स काम कर रही हैं जिनमें से तकरीबन 400 मलयाली हैं.





संगठन के अध्यक्ष लीलाधर रामचंदानी ने दावा किया कि अस्पताल में मलयालम भाषा का इस्तेमाल करने के संबंध में एक मरीज द्वारा स्वास्थ्य विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजी शिकायत के आधार पर परिपत्र जारी किया गया, हालांकि 'संगठन परिपत्र में इस्तेमाल शब्दों पर आपत्ति व्यक्त करता है.' इस परिपत्र की चिकित्सा समुदाय, नेताओं और जनता ने आलोचना की थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जहां भाषायी भेदभाव खत्म करने का आह्वान किया, वहीं पार्टी के नेता शशि थरूर ने कहा कि यह आदेश 'अस्वीकार्य, अशिष्ट, अपमानजनक और भारतीय नागरिकों के मौलिक मानवाधिकारों का हनन है.' (इनपुट भाषा से भी)

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