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ममता ने कहा- केंद्र सरकार का रवैया असंवेदनशील, जल्द वापस ले नए कृषि कानून

गणतंत्र दिवस पर हिंसा के लिए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है. (फाइल फोटो)
गणतंत्र दिवस पर हिंसा के लिए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है. (फाइल फोटो)

ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने ट्वीट किया, 'दिल्ली की सड़कों पर हुई चिंताजनक और तकलीफदेह घटनाओं से बहुत दुखी हूं. इन हालात के लिए केन्द्र का असंवेदनशील रवैया और हमारे किसान भाई बहनों के प्रति उसकी उदासीनता जिम्मेदार है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 6:27 AM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा के लिए केन्द्र का 'असंवेदनशील रवैया' और किसानों के प्रति उदासीनता जिम्मेदार है और इस घटना से उन्हें बहुत सदमा पहुंचा है. बनर्जी ने केन्द्र से आग्रह किया कि वह किसानों के साथ बातचीत करे और नए तानाशाही कृषि कानूनों को वापस ले.

उन्होंने ट्वीट किया, 'दिल्ली की सड़कों पर हुई चिंताजनक और तकलीफदेह घटनाओं से बहुत दुखी हूं. इन हालात के लिए केन्द्र का असंवेदनशील रवैया और हमारे किसान भाई बहनों के प्रति उसकी उदासीनता जिम्मेदार है.'





ट्रैक्टर परेड का लक्ष्य कृषि कानूनों को वापस लेना
गणतंत्र दिवस पर आयोजित किसानों के ट्रैक्टर परेड का लक्ष्य कृषि कानूनों को वापस लेना और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग था. दिल्ली पुलिस ने राजपथ पर समारोह समाप्त होने के बाद तय रास्ते से ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति भी दी थी, लेकिन हजारों की संख्या में किसान समय से पहले विभिन्न सीमाओं पर लगे अवरोधकों को तोड़ते हुए दिल्ली में प्रवेश कर गए. कई जगह पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई और पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा.

किसानों के एक समूह ने लाल किले पर पहुंचकर उसकी गुंबद पर निशान साहेब का झंडा भी फहरा दिया. जबकि लाल किले पर केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाता है.

किसानों को विश्वास में लिए बगैर ये तीन कानून बनाए गए
बनर्जी ने कहा, 'पहले तो किसानों को विश्वास में लिए बगैर ये तीन कानून बनाए गए. उसके बाद पूरे देश में प्रदर्शन और दो महीने से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के धरने के बावजूद वह (केन्द्र सरकार) बहुत बेरुखी से इस मुद्दे से निपट रही है.' उन्होंने कहा, 'केन्द्र को किसानों से बातचीत करनी चाहिए और तानाशाही कानूनों को वापस लेना चाहिए.'
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