Bengal Elections 2021 : ममता बनर्जी ने साबित किया- जिद के आगे दीदी हैं, टीएमसी की बंपर जीत

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर जीत दर्ज की. वह लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की सीएम बनने की तैयारी में हैं.

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर जीत दर्ज की. वह लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की सीएम बनने की तैयारी में हैं.

Mamata Banerjee in West Bengal Elections : ममता के जिद्दीपन के बारे में तो एक किस्सा काफी मशहूर है जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उनसे कहा था कि आप अगर नहीं मानेंगी तो वह खाना नहीं खाएंगे. नंदीग्राम से अधिकारी के सामने चुनाव लड़ने का फैसला भी ममता ने जिद में किया. उनसे करीबियों ने कहा था कि वह किसी और सीट से भी नामांकन दाखिल करें लेकिन वह जिद पर अड़ गईं.

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नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने की तैयारी होने लगी है. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्य में जीत की हैट्रिक लगाई है और वह लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज होंगी. 'दीदी' से मशहूर ममता बनर्जी की टीएमसी ने लगातार तीसरी बार राज्य में जीत दर्ज की है.

ममता बनर्जी को जिद्दी माना जाता है और ऐसा उनके करीबी भी कहते हैं. वह किसी काम को करने के लिए जिद पर अड़ जाती हैं तो उसे पूरा करके ही दम लेती हैं. यही कारण है कि पिछले दो कार्यकाल पूरा करने के बाद पश्चिम बंगाल की जनता ने उन पर तीसरी बार भरोसा जताया. उनकी जीत कुछ अन्य दलों के नेताओं के लिए भी फायदे का सौदा लग रही है और उन्होंने इसके बहाने केंद्र सरकार पर निशाना साधा जिसमें अखिलेश यादव, महबूबा मुफ्ती और शिवसेना के संजय राउत शामिल हैं.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे थे और ऐसा इसलिए भी कहा गया क्योंकि केंद्र की बीजेपी सरकार ने इस राज्य में प्रचार के दौरान काफी मेहनत की. केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो तक ने विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया. आसनसोल से मौजूदा लोकसभा सांसद सुप्रियो टॉलीगंज से चुनावी समर में उतर गए. इतना ही नहीं, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रैलियां की लेकिन तृणमूल कांग्रेस को दो तिहाई बहुमत मिल गया. ममता बनर्जी को चोट भी नंदीग्राम के इलाके में लगी जिसके बाद ममता ने चुनाव प्रचार व्हीलचेयर पर बैठकर किया. उन्हें काफी लोगों ने सलाह दी थी कि वह आराम करें लेकिन जिद्दी ममता ने थोड़ा ही आराम करने के बाद चुनाव प्रचार में जुट गईं. उन्हें सहानुभूति के सहारे भी काफी वोट पड़े लेकिन आखिरकार उनकी जिद जीती. बीजेपी नेताओं ने ममता बनर्जी के निजी तौर पर निशाना बनाया लेकिन उसे भी उन्होंने अपने पक्ष में ही कर लिया.

ममता के जिद्दीपन के बारे में तो एक किस्सा काफी मशहूर है जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उनसे कहा था कि आप अगर नहीं मानेंगी तो वह खाना नहीं खाएंगे. दरअसल, ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाने के बाद से ही एनडीए सरकार में रही थीं. उन्होंने रेल मंत्री का पद संभाला लेकिन तहलका कांड के चलते उन्होंने 17 महीने बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया और एनडीए सरकार से अलग हो गईं. अटल बिहारी ने उन्हें फोन कर दिल्ली बुलाया और सरकार में बने रहने को कहा लेकिन ममता भी जिद पर अड़ गईं. तब पूर्व प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि अगर वह नहीं मानेंगी तो वह खाना नहीं खाएंगे. बाद में ममता मानीं तो लेकिन बिना किसी पोर्टफोलियो के मंत्री बनीं.

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राज्य में इस बार का चुनाव इतना अनिश्चित नजर आने लगा था ममता के राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी एक वक्त परेशानी में नजर आए. उन्होंने भी नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और बीजेपी की व्यूह रचना का लोहा मान लिया था लेकिन टीएमसी ने एकतरफा अंदाज में ही जीत दर्ज की. मामला जहां चुनाव से पहले तक बराबर का लग रहा था, बाद में परिणाम ममता बनर्जी के पक्ष में ही आया. पश्चिम बंगाल के चुनाव में बीजेपी ने हालांकि बहुत कुछ हासिल किया है और 2016 की तीन सीटों से बढ़कर जीत दर्ज की है.
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