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अभिषेक बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी की तुलना बिना लक्षण वाले कोविड-19 मरीज से की

अभिषेक बनर्जी ने अधिकारी पर 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के साथ 'विश्वासघात' करने और इसे 'अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाने' का आरोप लगाया.
अभिषेक बनर्जी ने अधिकारी पर 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के साथ 'विश्वासघात' करने और इसे 'अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाने' का आरोप लगाया.

अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने कहा कि स्वार्थी लोग तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं. आपमें हिम्मत है तो स्वयं अपनी पार्टी का गठन करें, जैसा ममता बनर्जी ने किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2020, 9:11 PM IST
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डायमंड हार्बर (प. बंगाल). मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने पार्टी का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) की तुलना रविवार को बिना लक्षण वाले कोविड-19 मरीज के साथ की. साथ ही उन्होंने अधिकारी पर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections) में पार्टी के साथ 'विश्वासघात' करने और इसे 'अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाने' का आरोप लगाया.

तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई के अध्यक्ष अभिषेक (Abhishek Banerjee) ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के पूर्व सहयोगी ने सीबीआई और ईडी के डर के चलते बीजेपी में शामिल होने के लिए अचानक 'राजनीतिक पैंतरेबाजी' का सहारा लिया. अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करते हुए डायमंड हार्बर के सांसद ने कहा, ' पार्टी में कुछ ऐसे लोग थे जोकि बिना लक्षण वाले कोविड-19 (Covid-19) मरीजों की तरह थे. हम ऐसे वायरसों से पीछा छूट जाने से खुश हैं, जिन्होंने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के साथ 'विश्वासघात' किया और पिछले कुछ महीनों से इसे 'अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाने' में लगे थे.'

गृह मंत्री अमित शाह की 19 दिसंबर की मेदिनीपुर रैली के दौरान अधिकारी तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के पांच विधायकों एवं एक सांसद के साथ बीजेपी में शामिल हो गए थे. अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'स्वार्थी कारणों से तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के इच्छुक लोग, ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं. अगर आपमें हिम्मत है तो अपनी स्वयं की पार्टी का गठन करें जिस तरह 1998 में ममता बनर्जी ने किया था. उन्होंने बीजेपी या माकपा का दामन नहीं थामा था.'

उन्होंने अधिकारी का नाम लिए बिना चुनौती दी कि यदि कोई यह साबित कर दे कि वह अवैध वसूली की किसी गतिविधि में शामिल थे, तो वह जनता की अदालत में कोई भी सजा भुगतने को तैयार हैं.
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