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    सरकार ने पाठ्यक्रम से नागरिकता और सेकुलरिजम जैसे शब्द हटाए, ममता बोलीं-हैरान हूं

    ममता बनर्जी ने इस पर गहरी आपत्ति जाहिर की है. (फाइल फोटो)
    ममता बनर्जी ने इस पर गहरी आपत्ति जाहिर की है. (फाइल फोटो)

    पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने एक ट्वीट कर रहा है कि स्तब्ध हूं कि सरकार ने कोरोना संकट के दौरान ऐसी महत्वपूर्ण बातें सिलेबस से हटा दी हैं.

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    कोलकाता. सीबीएसई (CBSE) के पाठ्यक्रम से नागरिकता (Citizenship), संघवाद (Federalism), धर्मनिरपेक्षता (Secularism) और राष्ट्रवाद जैसे चैप्टर हटाए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने आश्चर्य जाहिर किया है. उन्होंने एक ट्वीट कर रहा है कि स्तब्ध हूं कि सरकार ने कोरोना संकट के दौरान ऐसी महत्वपूर्ण बातें सिलेबस से हटा दी हैं. उन्होंने इस पर गहरी आपत्ति जाहिर की है और एचआडी मंत्रालय से अपील की है कि इन महत्वपूर्ण अध्यायों को किसी भी कीमत पर सिलेबस से न हटाया जाए.

    कोरोना के मद्देनजर लिया गया फैसला
    मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल द्वारा सीबीएसई से देश और दुनिया में चल रही असाधारण स्थिति को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम को संशोधित करने के लिए कहा गया था. इसके बाद ही सीबीएसई ने ये फैसला लिया है. महामारी के दौरान हुए नुकसान के लिए भी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सभी ग्रेड के लिए पहले यही सुझाव दिया था.


    छात्रों के लिए परेशानी


    सीबीएसई ने घोषणा की है, वर्तमान अकादमिक सत्र के लिए 9वीं से 12वीं तक का 30% सिलेबस घटाया जाएगा. इस निर्णय का स्वागत कोरोनोवायरस महामारी की वजह से मुश्किलों से गुजरने वालों ने किया है. सिलेबस घटाने के फैसले के साथ ही दूसरी मुश्किलें सामने आ रही हैं. आशंका जताई जा रही है पाठ्यक्रम से प्रमुख अध्यायों को निकालने से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वर्तमान बैच की तैयारी प्रभावित हो सकती है.

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    राजनीतिक बन सकता है मसला
    सिलेबस कम करने के नाम पर महत्वपूर्ण अध्यायों को हटाए जाने का ये मसला राजनीतिक रूप अख्तियार कर सकता है. अभी इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी है लेकिन माना जा रहा है कि इस मामले पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं.
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