सीएम पद की शपथ दिलाते ही राज्यपाल ने दी हिंसा पर लगाम की नसीहत, ममता बनर्जी ने दिया जवाब

शपथ ग्रहण के बाद सीएम ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ (News18 India)

शपथ ग्रहण के बाद सीएम ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ (News18 India)

West Bengal Assembly Election 2021: पश्चिम बंगाल में राज्य विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Election 2021) में राज्य विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर बुधवार को शपथ ली. राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के बीच राजभवन में आयोजित साधारण समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

बनर्जी ने बांग्ला भाषा में शपथ ली. पार्थ चटर्जी और सुब्रत मुखर्जी जैसे TMC नेताओं के अलावा, TMC की जीत में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी इस समारोह में मौजूद थे. बनर्जी ने कहा कि पद संभालने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता कोविड-19 स्थिति से निपटना होगी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शपथ लेने के तुरंत बाद सभी राजनीतिक दलों से शांति सुनिश्चित करने की अपील की. ममता ने राजनीतिक हिंसा पर कहा कि बंगाल का प्रशासनिक तंत्र निर्वाचन आयोग के अधीन था, अब हम गड़बड़ियों से निपटेंगे.

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राज्यपाल ने हिंसा पर ममता से क्या कहा?
वहीं, ममता के शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘हमारी पहली प्राथमिकता राज्य में चुनाव के बाद हो रही हिंसा को समाप्त करना है.’ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने कहा, 'मैं ममता जी को उनके तीसरे कार्यकाल की बधाई देता हूं. हमारी प्राथमिकता यह है कि हमें इस हिंसा का अंत करना चाहिए, जिसने बड़े पैमाने पर समाज को प्रभावित किया है. मुझे पूरी उम्मीद है कि सीएम तत्काल आधार पर कानून के शासन को बहाल करने के लिए सभी कदम उठाएंगी.'



ममता बनर्जी के शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, 'पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए ममता दीदी को बधाई.' बता दें पश्चिम बंगाल में 292 सीटों पर हुए चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि भाजपा विधानसभा में अपनी सदस्य संख्या तीन से 77 तक पहुंचाने में सफल रही.
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