तमिनलाडु: 13 जून को कम्युनिस्ट परिवार की बहू बनेंगी 'ममता बनर्जी', रचाएंगी 'समाजवाद' से ब्याह

अपने बेटों-कम्युनिज्म, लेनिनिज्म और सोशलिज्म के साथ मोहन. (फोटो: News18 English)

अपने बेटों-कम्युनिज्म, लेनिनिज्म और सोशलिज्म के साथ मोहन. (फोटो: News18 English)

Tamil Nadu Communist Family: मोहन ने कहा कि वो जिस जगह पर रहते हैं, वहां कम्युनिस्ट और कांग्रेस से जुड़े परिवार ही बीते 60 सालों से रह रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हमने फैसला किया है कि भविष्य की पीढ़ियों का नाम केवल वामपंथी विचारधारा पर ही रखेंगे.'

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(अर्चना आर)


चेन्नई. तमिलनाडु का एक 'राजनीतिक' ब्याह चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां के सेलम जिले में जल्द ही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और सोशलिज्म एक दूजे के होने जा रहे हैं. नाम देखकर चौंकिएगा नहीं, यह बात सही है. यहां दूल्हा सोशलिज्म (Socialism) और दुल्हन बनर्जी 13 जून को शादी करने जा रहे हैं. हालांकि, केवल जोड़ा ही नहीं, इस परिवार के कई रिश्तेदारों के बेहद अनोखे नाम हैं.

सोशलिज्म के पिता का नाम मोहन है. वो बताते हैं कि उनके तीन बेटे हैं, जिनका नाम- कम्युनिज्म, लेनिनिज्म और सोशलिज्म है. उन्होंने बताया कि उनके पोते यानि कम्युनिज्म के बेटे का नाम मार्क्सिज्म है. दरअसल, मोहन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के जिला सचिव हैं. वो वामपंथी विचारधारा के बड़े समर्थक है और पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं.
फोन पर बातचीत के दौरान मोहन ने अपने परिवार के बारे में कई बातें बताईं. उन्होंने कहा, 'हमारा परिवार वामपंथ से संबंध रखता है. सेलम के कट्टूर इलाके में कम्युनिज्म 80 साल पहले फैल गया था. हम हमारे पूर्वजों के समय से साम्यवाद से ताल्लुक रखते हैं और मैं चौथी पीढ़ी हूं. सेलम के इस खास इलाके में कई लोगों के वियतनाम, चेकोस्लोवाकिया, मॉस्को, रूस जैसे नाम हैं.'

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बेटे का नाम कम्युनिज्म रखने पर उन्होंने बताया, '90 के दशक में सोवियत संघ टूट गया था. जब मेरी पत्नी गर्भवती थी, तो मैंने अपने बच्चे का नाम मजबूत साम्यवादी विचारधारा वाला रखने का फैसला किया. इसलिए मैंने अपने बेटे का नाम कम्युनिज्म रखा. इसके बाद जब लेनिनिज्म हुआ, तो मैं 15 दिनों तक झूठे मामले में आरोपित होने के बाद भाग रहा था. तीसरी बार हमने सोशलिज्म को पैदा किया. मैं इंतजार कर रहा था कि अगर बेटी होती, तो उसका नाम मार्क्सिया रखता.'



मोहन से जब उनके बेटों की राजनीतिक विचारधारा को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि बेटे कई प्रदर्शनों का हिस्सा रहे हैं. साथ ही वे सीपीआई (एम) के सदस्य भी हैं. मोहन बताते हैं कि उन्होंने महज 5 साल की उम्र से ही बच्चों को पार्टी की बैठकों में जाने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया था. उन्होंने जानकारी दी कि दिल्ली में 2009 में हुए प्रदर्शनों में कम्युनिज्म और लेनिनिज्म भी शामिल थे.


मोहन ने कहा कि वे जिस जगह पर रहते हैं, वहां कम्युनिस्ट और कांग्रेस से जुड़े परिवार ही बीते 60 सालों से रह रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हमने फैसला किया है कि भविष्य की पीढ़ियों का नाम केवल वामपंथी विचारधारा पर ही रखेंगे.' वे कहते हैं, 'मेरे किसी भी बेटे को अब तक बेटी नहीं हुई है. अगर ऐसा होता है, तो हमने उसका नाम क्यूबाइज्म रखने का फैसला किया है. मेरा मानना है कि साम्यवाद कभी खत्म नहीं होगा, जब तक मानव से तब तक साम्यवाद रहेगा.'

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