पीएम की बैठक से लेकर बंगाल के मुख्य सचिव का विवाद, ममता बनर्जी के आरोपों को बताया गलत

मुख्य सचिव अलपन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है.

मुख्य सचिव अलपन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है.

पीएम के इंतजार करने की बात तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद के ट्वीट से भी पुख्ता हो जाती है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पीएम को इंतजार करना पड़ा है, इसमें बुराई क्या है. ममता बनर्जी अपने हेलीकॉप्टर से उतर कर बैठक की जगह पहुंची जो कि हेलीपैड से सिर्फ 500 मीटर दूर था.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरे के बाद शुरू हुई ममता सरकार से केंद्र की तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले ममता ने पीएम मोदी की बैठक का बहिष्कार किया और फिर मुख्य सचिव को लेकर विवाद उठ गया. ममता ने इसके लिए केंद्र सरकार को दोषी करार दिया है. केंद्र सरकार इस तू-तू मैं-मैं में नहीं पड़ना चाहती है. केंद्र सरकार के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि पीएम मोदी ने कोई मुद्दा खड़ा नहीं किया बल्कि उनके दिल में सिर्फ राहत की चिंता थी इसलिए वो ओडिशा भी गए और बंगाल भी. बहरहाल दोनों मुख्यमंत्रियों और राज्य सरकारों का रुख देखकर ही देश की जनता को समझ में आ गया होगा कि टकराव कौन चाहता था.

इस विवाद में पीएमओ और केंद्र सरकार नहीं पड़ रही है, लेकिन केंद्र सरकार के सूत्रों ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हर आरोप को सिलसिलेवार तरीके से खारिज कर दिया. न्यूज18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी का हर आरोप बेबुनियाद और टकराव को बढ़ाने वाला है.

ममता के बैठक में नहीं आने की दलीलें और केंद्र सरकार का पलटवार

बंगाल सरकार का पहला आरोप है कि ममता को पीएम के कार्यक्रम और बैठक की सूचना देर से मिली और वो अपना कार्यक्रम छोड़कर पीएम के कार्यक्रम में पहुंचीं. लेकिन केंद्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि पीएम का दौरा तूफान यास से हुए नुकसान का आकलन करना था. इसलिए तूफान आने से पहले दौरे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता था. पिछले साल भी अम्फान तूफान आने के बाद भी पीएम के दौरे के लिए एक टाइमलाइन का पालन किया गया था. इसलिए इस बार फिर ओडिशा और बंगाल का दौरा तय हो जाने के बाद, दोनों मुख्यमंत्रियों को साथ ही समय बताया गया था. लेकिन ओडिशा ने उस कार्यक्रम के सभी प्रोटोक़ॉल का पालन किया जबकि वो पीएम के बंगाल के दौरे से पहले था.
ममता बनर्जी का दूसरा आरोप ये है कि उन्हें पीएम मोदी का इंतजार करना पड़ा. जबकि केंद्र सरकार के सूत्र बता रहे हैं कि पीएम कलाईकुंडा में दोपहर 13.59 पर उतरे और ममता 14.10 बजे वहां उतरीं. इससे ये साफ है कि पीएम को ही ममता का इंतजार करना पड़ा. पीएम के इंतजार करने की बात तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद के ट्वीट से भी पुख्ता हो जाती है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पीएम को इंतजार करना पड़ा है, इसमें बुराई क्या है. ममता बनर्जी अपने हेलीकॉप्टर से उतर कर बैठक की जगह पहुंची जो कि हेलीपैड से सिर्फ 500 मीटर दूर था. पीएम से मिलकर वो 14.35 पर वापस भी चली गयीं. इसलिए वो सिर्फ 500 मीटर चलीं और 25 मिनट में वापस उड़ गयीं. उनका पहले वापस जाना भी प्रोटोकॉल के खिलाफ था. इसलिए बंगाल सरकार का ये दावा गलत है की ममता ने इंतजार किया बल्कि इसके उलट पीएम को ही इंतजार करना पड़ा था.

ममता बनर्जी का तीसरा आरोप ये भी था कि उनके कार्यक्रम पहले से ही तय थे. साथ ही ये भी कहा गया कि ये जरूरी नहीं कि हर बार मुख्यमंत्री ही पीएम का स्वागत करे. सीएम के दूसरे कार्यक्रम भी तो हो सकते हैं. जवाब में केंद्र सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि ममता ने बैठक में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया था. लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल लिया क्योंकि उस बैठक में बंगाल के नेता विपक्ष भी शामिल होने वाले थे. ये बात तो ममता बनर्जी ने अपने खत में भी लिखी है. इसलिए ये साफ है कि ये कोई मुद्दा नहीं कि उनका कार्यक्रम पहले से तय था. ये बात बंगाल के गवर्नर ने भी ट्वीट कर कही है कि ममता ने उन्हें फोन करके कहा था कि अगर नेता विपक्ष पीएम की बैठक में होंगे तो वो बैठक का बहिष्कार करेंगी.

ममता बनर्जी का चौथा आरोप है कि उन्हें सागर में 20 मिनट इंतजार करना पड़ा क्योंकि उन्हें पीएम के हेलीकॉपटर को कलाईकुंडा में उतरना था. उनके हेलीकॉप्टर को 15 मिनट तक हवा में घूमते रहना पड़ा. केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि प्रोटोकॉल के मुताबिक बतौर सीएम उनका पीएम से पहले आना अपेक्षित था. जैसा कि बाकी सभी मुख्यमंत्री करते हैं. पीएम की सुरक्षा का जिम्मा एसपीजी के पास है जो भारत के पीएम की सुरक्षा करने वाली एक प्रोफेशनल सरकारी एजेंसी है.



मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाने पर ममता को लगा झटका

ममता बनर्जी का पांचवां आरोप है कि मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाने के आदेश को लेकर उन्हें झटका लगा है और वे सदमे में हैं. ममता का आरोप है कि बिना राज्यों की सलाह के आदेश निकालना सही नहीं था और ये कानूनी रूप से मान्य नहीं है और असंवैधानिक भी है. जबकि केंद्र सरकार ये दावा कर रही है कि ये आदेश पूरी तरह से संवैधानिक हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि मुख्य सचिव एक अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी होता है और उन्होंने अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं की. पीएम के सामने राहत के लिए कोई प्रेजेंटेशन नहीं हो सका और न ही कोई बंगाल का अधिकारी पीएम की रिव्यू बैठक में शामिल हो पाया. मुख्य सचिव का रियायरमेंट लेना साबित करता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं. मुख्य सचिव का व्यवहार ऐसा रहा कि ऑल इंडिया सर्विस रूल के मुताबिक उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कारवाई की जाएगी. केंद्र सरकार का कहना है कि ये मुख्य सचिव की ड्यूटी थी कि राहत के लिए ये रिव्यू बैठक सुनिश्चित की जाए. ममता बनर्जी जानती हैं ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी किसी भी राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकते इसलिए मुख्य सचिव का रिटायरमेंट लेना उन्हें बचाने का ममता का आखिरी दांव था.

ममता बनर्जी का छठा आरोप है कि जब सिर्फ 3 महीने पहले ही मुख्य सचिव का कार्यकाल 3 महीने के लिए बढ़ाया गया था तो वो फैसला भी केंद्र के साथ लिखित में सलाह करने के बाद ही लिया गया था. ये फैसला उस वक्त बंगाल के लिए खासा जरूरी था. इसलिए 24 मई को उनके कार्यकाल को बढ़ाने का आदेश भी इसी तरह केंद्र के साथ लिखित बातचीत के बाद हुआ. केंद्र सरकार ने दावा किया कि मोदी सरकार द्वार मुख्य सचिव को चर्चा के बाद दिया एक्सटेंशन ही साबित करता है कि केंद्र सरकार बंगाल सरकार के साथ सहयोग भी कर रही है और बिना किसी दुर्भावना के काम कर रही है.

बंगाल विधानसभा के नेता विपक्ष शुभेन्दु अधिकारी को लेकर टकराव की राह पर ममता

ममता बनर्जी का सातवां आरोप पीएम मोदी की बैठक के रिवाइज्ड शेड्यूल पर है जिसमें बीजेपी के एक विधायक को जोड़ लिया गया. उस विधायक के पीएम और सीएम की बैठक में मौजूद होने का कोई औचित्य नहीं था. ममता बनर्जी ने कहा कि गवर्नर और केंद्रीय मंत्रियों को राहत के लिए हुई बैठक में बुलाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी. इस पर सूत्रों ने बताया कि वो सिर्फ विधायक ही नहीं बल्कि बंगाल की विधानसभा में नेता विपक्ष हैं और जनता के चुने हुआ प्रतिनिधि भी हैं. देश भर में पीएम मोदी ने ऐसी कई बैठकें की हैं. गैर बीजेपी शासित राज्यों में दूसरी पार्टी के नुमाइंदों को भी बैठकों में शामिल किया गया है.

ममता बनर्जी का आठवां आरोप पीएम सीएम की बैठक को लेकर उनकी मांग पर है. आरोप ये है कि बंगाल के मुख्य सचिव ने पीएम के साथ आ रहे एक वरिष्ठ अधिकारी को एक संदेश भेजा था कि आप सभी मुद्दे को सुलझा कर पीएम-सीएम की मीटिंग कराएं. लेकिन ममता बनर्जी को कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. ममता ने दावा किया कि उनकी सुरक्षा के निदेशक भी एसपीजी के साथ संपर्क में थे. जवाब में केंद्र  सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने बैठक का बहिष्कार किया क्योंकि उसमें बंगाल के नेता विपक्ष मौजूद थे. भारत सरकार ने कोई मुद्दा खड़ा नहीं किया था क्योंकि वक्त की मांग यही थी कि हम सब तूफान राहत पर चर्चा करें. केंद्र सरकार ने दावा किया कि ममता को बताया गया था कि बैठक के खत्म होने के तुरंत बाद पीएम उनसे मिलेंगे क्योंकि वो सिर्फ इसी राहत बैठक के लिए बंगाल आए हैं. ममता को जब लगा कि उन्हें बैठक खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा तो उन्होंने अपने अधिकारियों को भी बैठक में जाने से रोकने के साथ साथ पीएम के साथ अपनी बैठक रद्द कर दी.


अब आखिरी नौवें आरोप में ममता कहती हैं कि मैं जब मुख्य सचिव के साथ बैठक में पीएम को रिप्रेजेंटेशन देने पहुंची. तब पीएम ने रिप्रेजेंटेशन अपने हाथों में ले लिया. उसके बाद मैंने पीएम से दीघा जाने की इजाजत मांगी जहां मेरी बैठक होनी बाकी थी तो उन्होंने मुझे जाने की इजाजत दे दी थी. लेकिन केंद्र सरकार के सूत्रों ने ये आरोप सिरे से खरिज कर दिया और कहा कि पीएम मोदी ने ममता बनर्जी को जाने की इजाजत नहीं दी थी.

ये टकराव जल्दी खत्म होने वाला नजर नही आ रहा. क्योंकि बंगाल पर वर्चस्व की लड़ाई इस बार ममता बनर्जी भले ही जीत गयी हों, लेकिन नतीजों के बाद की हिंसा ने जता दिया है कि तल्खियां बरकरार रहेंगी.

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